
#NewsBytesExplainer: ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट में सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े क्या-क्या गंभीर आरोप हैं?
क्या है खबर?
मानवाधिकार के लिए काम करने वाले संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने हाल ही में 'वर्ल्ड रिपोर्ट 2024' जारी की है। इसमें भारत सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव से लेकर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकतांत्रिक देशों में अधिकारों के सम्मान को लेकर भारत सरकार का रवैया कमजोर रहा है।
आइए जानते हैं कि रिपोर्ट में क्या-क्या बातें कही गई हैं।
सरकार
रिपोर्ट में सरकार को हिंदू राष्ट्रवादी सरकार बताया गया
रिपोर्ट में संगठन ने कहा है कि अधिकारों का सम्मान करने वाले लोकतंत्र के रूप में वैश्विक नेतृत्व की भारत सरकार की दावेदारी कमजोर हुई है।
रिपोर्ट में लिखा है कि भारत में पिछले साल 2023 मानवाधिकारों को दबाया गया है और लोगों के साथ उत्पीड़न की कई घटनाएं सामने आई हैं। संगठन ने भारत की सरकार को हिंदू राष्ट्रवादी सरकार कहा है।
रिपोर्ट में मणिपुर हिंसा, जम्मू कश्मीर और महिला पहलवानों के प्रदर्शन का जिक्र है।
घटना
रिपोर्ट में किन घटनाओं का जिक्र है?
रिपोर्ट में BBC के कार्यालय पर पड़े छापे, मणिपुर हिंसा, नूंह सांप्रदायिक हिंसा और राजधानी में महिला पहलवानों के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि BBC की डॉक्यूमेंट्री को लेकर सरकार ने इसके कार्यालयों पर छापे मारे और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) कानून के तहत मिली ताकतों का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
बता दें कि BBC की 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' डॉक्यूमेंट्री को लेकर खूब विवाद हुआ था।
नूंह
रिपोर्ट में नूंह सांप्रदायिक हिंसा को लेकर क्या-क्या है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई में हरियाणा के नूंह में हिंदू धर्म मानने वाले कुछ लोगों ने जुलूस निकाला, जिसके बाद इलाके में हिंसा भड़क गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने मुसलमानों के विरोध में कार्रवाई करते हुए कई मुसलमानों की संपत्तियों को तोड़ा और हिरासत में लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भी इस मामले पर भाजपा के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार से कड़े सवाल किए।
मणिुुप
मणिपुर हिंसा पर क्या कहती है रिपोर्ट?
मणपुर हिंसा को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि कई सप्ताह तक जारी इस हिंसा में करीब 200 लोगों की जान गई, हजारों विस्थापित हुए और सैकड़ों घरों-चर्चों को जला दिया गया।
रिपोर्ट में मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया कि बीरेन सिंह ने कुकी समुदाय के लोगों पर नशे की तस्करी और म्यांमार से आ रहे लोगों को पनाह देने का आरोप लगाया, इससे हिंसा और भड़की।
शरण
रिपोर्ट में सरकार पर बृजभूषण को बचाने के आरोप
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिला पहलवानों का आरोप था कि महासंघ के अध्यक्ष रहते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने उनसे यौन दुर्व्यवहार किया।
रिपोर्ट में सरकार पर बृजभूषण को बचाने और पहलवानों के विरोध प्रदर्शन को जबरन खत्म करने के आरोप हैं।
बता दें कि पिछले साल लगभग सालभर ये मुद्दा छाया रहा। हाल ही में खेल मंत्रालय ने कुश्ती संघ की नव-निर्वाचित कार्यकारिणी को निलंबित किया है।
जम्मू
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के कई मुद्दों का जिक्र
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर रोक, अभिव्यक्ति की आजादी, विरोध-प्रदर्शन और हिरासत में नागरिकों की मौतों समेत कई मुद्दों का जिक्र है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां लोगों को अपनी बात कहने की आजादी नहीं है और वे कथित तौर पर विरोध नहीं कर सकते हैं।
बता दें कि हाल ही सेना द्वारा हिरासत में लिए गए 3 आम नागरिकों की मौत का मुद्दा खूब गरमाया था।
मानवाधिकार
क्या होते हैं मानवाधिकार?
दरअसल, मनुष्यों कुछ बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता के हकदार हैं। ये किसी राज्य द्वारा प्रदान नहीं किए जाते हैं।
1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) सार्वभौमिक रूप से मौलिक मानव अधिकारों को निर्धारित करने वाला पहला कानूनी दस्तावेज था। इसमें जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा को मानव अधिकारों के रूप में मान्यता मिली हुई है।
भारतीय संविधान और राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में भी कई मानवाधिकारों का जिक्र है।