
मध्य प्रदेश: CBI ने भाजपा विधायक पर दर्ज की FIR, 29.41 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला
क्या है खबर?
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार के पूर्व मंत्री और भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) से 29.41 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में FIR दर्ज की है। इसमें उनकी पत्नी मोनिका पटवा का भी नाम शामिल है।
इससे पहले CBI ने उनके भोपाल और इंदौर स्थित प्रतिष्ठानों की तलाश लेकर अहम दस्तावेज बरामद किए थे।
बता दें कि पटवा पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा के भतीजे हैं।
प्रकरण
पटवा ने BOB से लिया था 36 करोड़ का ऋण
TOI के अनुसार, पटवा और उनकी पत्नी ने मैसर्स पटवा ऑटोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (वर्तमान में भगवती पटवा ऑटोमोटिव) इंदौर के डायरेक्टर पद रहते हुए 2014 में IDBI बैंक से ओवर क्रेडिट की सुविधा ली थी।
इसके बाद 13 सितंबर, 2014 को BOB द्वारा 36 करोड़ रुपए का ऋण बढ़ाया गया था।
इसके बाद पटवा ने बैंक को ऋण की राशि चुकाए बिना ही 2 मई, 2017 को कंपनी को गैर निष्पादित आस्तियां (NPA) घोषित कर दिया।
बकाया
पटवा की कंपनी पर बकाया था 29.41 करोड़ का ऋण
पटवा द्वारा कंपनी को NPA घोषित करने के दौरान कंपनी पर BOB का 29.41 करोड़ का ऋण बकाया था।
इसके बाद जब बैंक को पटवा द्वारा दूसरी कंपनी खोलने की जानकारी हुई तो उन्होंने इसे धोखाधड़ी मानते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को इसकी सूचना कर दी।
इसके बाद BOB की एक शाखा के प्रबंधक ने इंदौर में इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर ही मामले की जांच शुरू की गई थी।
आरोपी
मामले में कंपनी के कर्मचारियों को भी बनाया गया है आरोपी
CBI के एक अधिकारी ने बताया कि शिकायत के बाद मामले की जांच की तो सामने आया कि फोरेंसिक अकाउंटिंग से कंपनी द्वारा धन की हेराफेरी और डायवर्जन किया गया था।
इसको लेकर शुक्रवार को विधायक पटवा के भोपाल और इंदौर स्थित प्रतिष्ठानों की तलाशी ली गई थी, जहां से मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं।
इसको लेकर पटवा, उनकी पत्नी और कंपनी के कई अन्य कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पृष्ठभूमि
पटवा के खिलाफ पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
गौरतलब है कि पटवा के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी एक मामले में कोर्ट सुरेंद्र पटवा को सजा सुना चुका है।
पटवा के खिलाफ चेक अनादरण के कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं। दो साल पहले भी भोपाल कोर्ट ने चेक अनादरण के चार मामलों में उन्हें आरोपी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी।
हालांकि, उस दौरान उन्हें कोर्ट से उसी दिन जमानत मिल गई थी।