
दुनिया-जहां: विश्वभर में क्यों बढ़ रहे खाद्य वस्तुओं के दाम और क्या इनमें कमी आएगी?
क्या है खबर?
दुनियाभर के देशों में इन दिनों खाने की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन के कारण कहीं गर्मी, कहीं सूखा, कहीं बाढ़ और पिछले कुछ हफ्तों से यूक्रेन में जारी युद्ध के चलते अनाज और फर्टिलाइजर का निर्यात प्रभावित हुआ है और इन सबका असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि अगर खाद्य वस्तुओं की महंगाई ऐसे ही बढ़ती रही तो कई मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
महंगाई
14 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे अनाज के दाम
इंटरनेशनल पैनल ऑफ एक्सपर्ट्स ऑन सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स (IPES) में कहा गया है कि मार्च में अनाज के दाम 14 सालों के और मक्के के दाम अपने अब तक सबसे ज्यादा हो गए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन, बड़े स्तर पर फैली गरीबी और संघर्ष अब मिलकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। अगर उचित कदम नहीं उठाए जाते हैं तो ऊंची कीमतें रहना अब सामान्य हो सकता है।
कारण
खाद्य वस्तुओं के दाम इतने महंगे क्यों हुए हैं?
अनाज के वैश्विक निर्यात का 30 प्रतिशत हिस्सा रूस और यूक्रेन से आता है, लेकिन युद्ध के चलते यह रुका हुआ है। इस देशों से निर्यात रुकने के कारण अनाज के दाम आसमान छूने लगे हैं। निम्न आय और आयात पर निर्भर रहने वाले देशों के लिए यह स्थिति काफी मुश्किलें पैदा कर रही हैं।
अफ्रीका अपनी जरूरत का करीब 40 प्रतिशत अनाज यूक्रेन और रूस से आयात करता है और यहां इन दिनों हालात काफी खराब हो गए हैं।
विशेषज्ञों की राय
"सरकारों ने नहीं उठाए पर्याप्त कदम"
कनाडा की वाटरलू यूनिवर्सिटी में खाद्य सुरक्षा की विशेषज्ञ प्रोफेसर जेनिफर क्लेप्प ने कहा कि 2007-2008 और 2011-2012 के खाद्य वस्तुओं की कीमतों के संकट के बाद सरकारें खाद्य भंडारण और कमॉडिटी बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए जरूरी कदम उठाने में असफल रही हैं।
उन्होंने कहा कि जलवायु संकट, संघर्षों और दूसरे खतरों के बीच अगर दुनिया को खाद्य कीमतों में अधिक स्थिरता चाहिए तो इस समस्या के तुरंत समाधान की जरूरत है।
समाधान
क्या आपूर्ति बढ़ाने के लिए अधिक अन्न नहीं उगाया जा सकता?
अनाज उत्पादक देशों ने कहा है कि वो अधिक अन्न उगाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इस पर भी युद्ध का असर पड़ा है।
दरअसल, वैश्विक जरूरत का करीब 40 फीसदी पोटाश रूस और बेलारूस निर्यात करते हैं, लेकिन युद्ध के चलते इस पर असर पड़ा है और कई देशों में उर्वरक का संकट खड़ा हो गया है।
भारत ने अनाज का निर्यात बढ़ाने की बात कही है, लेकिन यहां भी गर्मी के चलते उत्पादन पर असर पड़ा है।
चुनौतियां
अन्य क्या चुनौतियां सामने आ रही हैं?
जलवायु परिवर्तन के चलते असामान्य बारिश, सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों के लिए फसलें उगाना मुश्किल कर रही हैं। जानकार मानते हैं कि बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के साथ यह समस्या बढ़ती जाएगी।
इसके अलावा अनाज, चावल और दूसरी फसलों की खेती करने लायक जमीन भी सीमित है। ब्राजील जैसे देशों में जब फसलें उगाने के लिए जमीन बढ़ाई गई तो वहां जंगलों को काटना पड़ा, जो पर्यावरण के लिहाज से बड़ा नुकसान है।
उपाय
कीमतें नियंत्रण में रखने के लिए क्या किया जा सकता है?
फ्रांस के एक कृषि विशेषज्ञ पियरे-मैरी ऑबर्ट कहा कि अनाज का एक बड़ा हिस्सा जानवरों को खिलाने में जाता है। ऐसे में अगर लोग मांस और दूध से बने उत्पाद खाना कम कर दें तो अनाज की आपूर्ति में सुधार हो सकता है।
इसके अलावा जानकारों का कहना है कि आयात पर निर्भर देशों की अनाज उगाने में मदद कर भी इस समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
नतीजा
अगर दाम बढ़ते रहे तो क्या होगा?
अगर वैश्विक बाजार में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ते रहे तो संघर्ष प्रभावित देशों में मानवीय सहायता करने वाली संस्थाओं के लिए अनाज खरीदना मुश्किल हो जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की एक अधिकारी ने बताया कि ये संस्थाएं पहले ही बढ़ती जरूरत और कम होती फंडिंग के चलते दबाव में हैं और अब उनके लिए महंगे दामों में अनाज खरीदना और मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मुश्किल हालात पहली बार पैदा हुए हैं।
नतीजा
इससे बुरा क्या हो सकता है?
अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतों में ऐसे तेजी बनी रही तो यह सरकारों की जेब तो खाली करेगी ही साथ ही देशों में राजनीतिक उथल-पुथल को बढ़ावा दे सकती है। यह जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए उठाए जा कदमों को प्रभावित कर सकती है।
कई जानकारों का कहना है कि यूक्रेन में जारी युद्ध खाद्य कीमतों को हमेशा के लिए बदल सकता है। लोगों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने वाला खाना मिलना मुश्किल होने वाला है।
परेशानी
भारत में भी लोग बढ़ती महंगाई से परेशान
भारत में भी अन्य देशों की तरह महंगाई दर लोगों की जेब ढीली कर रही है।
देश में मार्च में महंगाई दर 6.95 प्रतिशत रही जो पिछले 17 महीने में सबसे अधिक थी। महंगाई दर में ये उछाल सब्जी, दूध, मीट और अनाज जैसी खाद्य सामग्रियों और ईंधन की कीमत में उछाल के कारण आया है।
खाद्य सामग्रियों की कीमत में सबसे अधिक उछाल देखने को मिला और इनकी महंगाई दर 7.68 प्रतिशत रही।
महंगाई
किस खाद्य पदार्थ की कीमत कितनी बढ़ी?
खाद्य सामग्रियों में वृद्धि के लिए मुख्य तौर पर तेल और फैट की कीमतों में वृद्धि रही। मार्च में इन दोनों की महंगाई दर 18.79 प्रतिशत रही। सब्जियों की कीमत में 11.64 प्रतिशत वृद्धि हुई।
मीट और मछली की कीमतों में 9.63 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं मसालों की कीमत 8.50 प्रतिशत बढ़ी। नॉन-एल्कोहोलिक पेय पदार्थों की कीमत 5.62 प्रतिशत और दूध की कीमत 4.71 प्रतिशत बढ़ी।
अनाजों और उनसे संबंधित उत्पादों की कीमत ने 4.93 प्रतिशत उछाल मारा।