
बालासन के अभ्यास से मिल सकते हैं कई स्वास्थ्य लाभ, जानिए इसके बारे में जरूरी बातें
क्या है खबर?
योग में स्वास्थ्य संबंधित कई समस्याओं का इलाज करने के लिए योगासन मौजूद हैं। इन्हीं में से एक 'बालासन' है।
यह एक ऐसी योग मुद्रा है, जो शरीर को आराम पहुंचाती है। इसे अंग्रेजी में चाइल्ड पोज भी कहा जाता है।
नियमित रूप से इसके अभ्यास से स्वास्थ्य संबंधी कई लाभ मिलते हैं।
ऐसे में आइये आज इस प्राचीन योग मुद्रा के अभ्यास का तरीका और अन्य महत्वपूर्व बातें जानते हैं।
इतिहास
क्या है बालासन?
इस योग मुद्रा को बालासन या बाल मुद्रा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका अभ्यास करते वक्त व्यक्ति एक बच्चे जैसा दिखता है।
हालांकि, वास्तिवक तौर पर यह योग मुद्रा दैवीय शक्ति के प्रति समर्पण का प्रतीक है क्योंकि इसमें आप अपने घुटनों के बल झुकते हैं और अपने सिर को नीचे रखते हैं।
यह मुद्रा अपने अहंकार को त्याग करके जमीन से जुड़े रहने और सौम्य स्वभाव रखने के बारे में बताता है।
तरीका
बालासन करने का तरीका
इसके लिए सबसे पहले योगा मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठ जाएं और गहरी सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं।
अब सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे आगे की ओर झुककर माथे को जमीन से सटाएं। इस अवस्था में दोनों हाथ सामने, माथा जमीन से टिका हुआ और छाती जांघों पर रहेगी।
कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहकर सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसके बाद सांस लेते हुए वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
फायदे
बालासन के अभ्यास से मिलने वाले फायदे
रोजाना बालासन के अभ्यास से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
यह आसन कब्ज और गैस से राहत दिलाने में मदद करता है और तनाव और चिंता जैसी समस्याओं से मुक्त होने में भी मदद करता है।
इससे आपकी छाती की मांसपेशियां भी खुलती है, जिससे बेहतर सांस लेने में मदद मिलती है।
इसके अलावा यह रीढ़ की मांसपेशियों को भी खींचता है और थकान को दूर करता है।
सावधानियां
कौन इस योगासन का अभ्यास नहीं कर सकता?
भले ही यह योगासन आसान है और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद भी, लेकिन हर कोई इसे नहीं कर सकता है।
ऐसे लोग जो डायरिया और उच्च रक्तचाप जैसी समस्या से पीड़ित हैं, उन्हें इसके अभ्यास से बचना चाहिए।
अगर आपके घुटने, कंधे, गर्दन या पीठ में चोट लगी है, तो भी इस योगासन को करने से बचें या फिर इसे करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को भी इसे बिल्कुल नहीं आजमाना चाहिए।