
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक टावरों को गिराने की अवधि को 28 अगस्त तक बढ़ाया
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के नोएडा में सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट के दो 40 मंजिला अवैध टावरों को गिराने की अवधि को बढ़ाकर 28 अगस्त कर दिया है।
कोर्ट ने यह आदेश टावरों को गिराने की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी की ओर से गत दिनों सुरक्षा के लिहाज से अवधि को आगे बढ़ाने की मांग करने के बाद दिया है।
बता दें कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने दोनों टावरों को 22 मई तक गिराने के आदेश दिए थे।
याचिका
एजेंसी ने क्या दायर की थी याचिका?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुपरटेक को अपने खर्च पर टावरों को गिराने का आदेश देने के बाद कंपनी ने एडिफिस इंजीनियरिंग को इन्हें गिराने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
गत 11 मई को एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर टावरों को गिराने की समय सीमा को 22 मई से बढ़ाकर 28 अगस्त करने की मांग की थी।
एजेंसी ने कहा था कि विस्फोट के दौरान हादसे को रोकने के लिए तैयारी के लिए उसे और समय चाहिए।
परेशानी
टावरों को गिराने वाली एजेंसी ने यह बताई थी परेशानी
याचिका में एडिफिस इंजीनियरिंग ने कहा था कि उसकी पार्टनर फर्म जेट डिमोलिशन टावरों को गिराने की प्रक्रिया का डिजाइन तैयार कर रही है। इसके तहत दोनों टावरों की 31वीं और 32वीं मंजिल को आपस में जोड़ते हुए प्राथमिक ब्लास्ट फ्लोर बनाया जाएगा। ऐसे में इस तैयारी के लिए और अधिक समय की जरूरत है।
एजेंसी ने यह भी कहा कि टावरों को गिराने में कम विस्फोटक के इस्तेमाल के लिए की जानी वाली लेयरिंग में भी अधिक समय लगेगा।
जानकारी
नोएडा प्राधिकरण ने समय सीमा बढ़ाने से किया था इनकार
बता दें टावरों को गिराने वाली एजेंसी ने पहले नोएडा प्राधिकरण से समय सीमा को आगे बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया था। उसके बाद एजेंसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
पृष्ठभूमि
क्या है टावरों के अवैध निर्माण का मामला?
सुपरटेक बिल्डर्स ने साल 2009 से 2012 के बीच नोएडा के सेक्टर-93 में एमराल्ड कोर्ट परिसर में 40 और 39 मंजिल के दो टावर बनाए थे। कंपनी ने पार्क के रास्ते पर टावरों का निर्माण कर दिया और दोनों टावरों की बीच की दूरी भी कम कर दी।
इस पर रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर टावरों के निर्माण में नियमों का पालन नहीं करने और अग्नि सुरक्षा मानकों अनदेखी का आरोप लगाया था।
अवैध
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2014 में दिए थे टावरों को गिराने के आदेश
मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साल 2014 में हाउसिंग सोसायटी में नियमों के उल्लंघन पर दोनों टावरों को गिराने के आदेश दिए थे। उसके बाद सुपरटेक ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाते हुए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (NBCC) को जांच करने के निर्देश दिए थे।
NBCC ने मामले की जांच की तो उसमे सामने आया कि यह निर्माण नोएडा प्राधिकरण के साथ सांठगांठ कर किया गया है।
आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था इलाहबाद हाई कोर्ट का फैसला
मामले में 31 अगस्त, 2021 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सुपरटेक को अपनी लागत से 915 फ्लैट वाले 40 मंजिला वाले दो टावरों को तीन महीने में गिराने का आदेश दिया था। हालांकि, इसकी पालना नहीं हो पाई।
इस पर 7 फरवरी, 2022 को कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को फटकार लगाते हुए दोनों टावरों को 22 मई तक गिराने के आदेश दिए थे।
जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे फ्लैट मालिकों को पैसा लौटने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने टावरों को गिराने से हाने वाले नुकसान को देखते हुए सुपरटेक को सभी फ्लैट मालिकों को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लिया गया भुगवान वापस लौटाने और RWA को दो करोड़ रुपये बतौर हर्जाना देने का भी आदेश दिया था।