
मणिपुर में जारी हिंसा के बीच रक्षा सचिव ने म्यांमार के सैन्य अधिकारियों से की मुलाकात
क्या है खबर?
मणिपुर में पिछले 2 महीने से जारी हिंसा के बीच रक्षा सचिव गिरिधर अरमने ने म्यांमार के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ मुलाकात की है।
उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, अवैध सीमा पार आंदोलनों और मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।
हाल ही में सामने आईं कुछ खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि मणिपुर हिंसा के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों की तस्करी म्यांमार के रास्ते की गई थी।
बयान
रक्षा मंत्रालय ने मुलाकात को लेकर क्या कहा?
रक्षा सचिव ने म्यांमार की प्रशासनिक परिषद के अध्यक्ष जनरल मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने कहा कि उनके देश के संबंधित क्षेत्रों में दूसरे देश के विरुद्ध किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
भारत म्यांमार के साथ लगभग 1,700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है और किसी भी घटनाक्रम का सीधा असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर पड़ता है।
बयान
हिंसा के पीछे हो सकती हैं अंतरराष्ट्रीय शक्तियां- मुख्यमंत्री सिंह
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि हिंसा के पीछे अंतरराष्ट्रीय शक्तियों का हाथ हो सकता है और इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, "मणिपुर म्यांमार के साथ सीमा साझा करता है।। हमारी 398 किलोमीटर लंबी सीमा पर हर जगह सुरक्षा नहीं है। हमारी सुरक्षा में भारतीय सुरक्षाबल तैनात हैं, लेकिन वे सब कुछ कवर नहीं कर सकते हैं। कोई भी कल्पना कर सकता है कि वहां क्या हो सकता है।"
निशाना
मुख्यमंत्री ने राहुल के दौरे पर भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मणिपुर दौरे को लेकर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, "हम किसी को नहीं रोक सकते हैं, लेकिन वह 40 दिन के बाद क्यों आए? वह किस हैसियत से यह दौरा कर रहे थे? मुझे नहीं लगता कि यह समय सही था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह कोई राजनीतिक एजेंडा लेकर आए थे।'
बता दें कि राहुल ने हिंसाग्रस्त चुराचांदपुर में राहत शिविर का दौरा कर लोगों के साथ मुलाकात की थी।
हिंसा
मणिपुर में 3 मई को भड़की थी हिंसा
मणिपुर हाई कोर्ट ने मार्च में मणिपुर सरकार से गैर-आदिवासी मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिए जाने की याचिका पर विचार करने को कहा था।
इसका कुकी आदिवासियों ने विरोध किया और उनके एकजुटता मार्च के बाद 3 मई को हिंसा भड़क गई थी।
उसके बाद से ही मणिपुर में जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है और यहां 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।