
सम्मेद शिखरजी विवाद: केंद्र सरकार का बड़ा कदम, इलाके में पर्यटन गतिविधियों पर लगाई रोक
क्या है खबर?
जैन धर्म के तीर्थस्थल सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल घोषित करने पर हो रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने पारसनाथ पर्वत इलाके में पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। सम्मेद शिखरजी इसी पर्वत पर स्थित है।
केंद्र ने झारखंड सरकार को इलाके की पवित्रता बनाए रखने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा उससे शराब के सेवन और बिक्री समेत तमाम तरह के प्रतिबंधों को इलाके में कड़ाई से लागू करने को भी कहा गया है।
प्रतिबंध
केंद्र ने कौन-कौन से प्रतिबंध लागू करने का निर्देश दिया?
पर्यावरण मंत्रालय ने झारखंड सरकार को पारसनाथ पर्वत के संरक्षण के लिए अगस्त, 2019 में जारी किए नोटिफिकेशन में लगाए गए प्रतिबंधों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है।
इन प्रतिबंधों में शराब और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री, तेज आवाज में संगीत बजाना, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को नुकसान पहुंचना, प्रदूषण करना, जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाना, पालतू जानवरों के साथ इलाके में आना और पर्वत पर अनाधिकारिक कैंपिंग या ट्रैकिंग आदि शामिल हैं।
जानकारी
मंत्रालय ने निगरानी के लिए समिति भी गठित की
मंत्रालय ने अपने ज्ञापन में एक निगरानी समिति गठित करने की जानकारी भी दी, जो पूरे मामले पर नजर रखेगी। राज्य सरकार से जैन समुदाय के दो सदस्यों और स्थानीय आदिवासी समुदाय के एक सदस्य को समिति में जगह देने को कहा गया है।
बयान
इलाके की पवित्रता बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध- मंत्रालय
ज्ञापन में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र जैन धर्म का दुनिया का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है, सरकार को इसकी पवित्रता ज्ञात है और वह इसे बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
बता दें कि ये ज्ञापन पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की जैन समुदाय के सदस्यों के साथ बैठक के बाद जारी किया गया है।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी कहा कि किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि
क्या है पूरा विवाद?
केंद्र ने अगस्त, 2019 में नोटिफिकेशन जारी करते हुए सम्मेद शिखरजी समेत पूरे पारसनाथ पर्वत क्षेत्र को पर्यावरण के नजरिए से संवेदनशील (इको-सेंसटिव) घोषित किया था।
उसके इसी आदेश के प्रावधानों पर अमल करते हुए झारखंड सरकार ने हाल ही में इलाके को इको-टूरिज्म स्थल घोषित कर दिया था।
जैन समुदाय इसके खिलाफ है और उसका कहना है कि पर्यटन स्थल घोषित किए जाने से इलाके की पवित्रता खंडित होगी। मामले में रविवार को देशभर में बड़ा प्रदर्शन हुआ था।
महत्व
क्यों इतना पवित्र माना जाता है सम्मेद शिखरजी?
झारखंड के सबसे ऊंचे पारसनाथ पर्वत पर स्थित सम्मेद शिखरजी जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है।
यहां पर जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष की प्राप्ति की थी। 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ ने भी यहीं निर्वाण प्राप्त किया था।
इस पवित्र पर्वत के शिखर तक श्रद्धालु पैदल जाते हैं। इसके लिए उन्हें जंगलों और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से होते हुए नौ किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है।