
नागालैंड: सैन्य फायरिंग में 14 लोगों की मौत का मामला, जवानों के खिलाफ नहीं चलेगा मुकदमा
क्या है खबर?
नागालैंड के मोन जिले में सेना की फायरिंग में मारे गए 14 नागरिकों की हत्या के मामले में आरोपी जवानों पर मुकदमा नहीं चलेगा। रक्षा मंत्रालय ने इसकी मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।
इस मामले में नागालैंड पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी चार्जशीट में 30 सैन्य कमांडों को आरोपी बनाया था। इनमें एक सैन्य अधिकारी और 29 कमांडों शामिल थे।
नागालैंड पुलिस ने मोन सत्र न्यायालय को ये जानकारी दी है।
मामला
क्या है मामला?
ये घटना 4 दिसंबर, 2021 को नागालैंड के मोन जिले में हुई थी। यहां के तिरु और ओटिंग गांव के 6 लोग कोयला खदान में काम करने गए थे।
जब ये लोग देर शाम तक घर नहीं लौटे तो स्थानीय ग्रामीण और परिजन उन्हें तलाश करने निकले। परिजनों को सभी 6 लोगों के शव एक पिकअप गाड़ी में मिले थे।
पता चला कि सेना की फायरिंग में इन लोगों की मौत हो गई।
गुस्सा
गुस्साए ग्रामीणों ने लगाई थी गाड़ियों को आग
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हो गए और देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। गुस्साए ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों के वाहनों में आग लगा दी थी।
जब भीड़ बेकाबू हुई तो सुरक्षा बलों ने दोबारा फायरिंग की, जिसमें 7 और लोगों की मौत हो गई। एक सुरक्षाकर्मी की भी मौत हुई।
घटना के बाद सेना ने कहा कि गलत पहचान की वजह से पिकअप पर फायरिंग की गई थी।
SIT
SIT कर रही थी मामले की जांच
राज्य पुलिस ने SIT को नागालैंड फायरिंग की जांच का जिम्मा सौंपा था।
SIT ने 30 मई, 2022 को पेश की गई चार्जशीट में 21 पैरा स्पेशल फोर्सेज के 30 जवानों को आरोपी बनाया। उनके खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और सबूत नष्ट करने के आरोप लगाए गए।
घटना की जांच के लिए सेना ने स्वतंत्र कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी स्थापित की, जिसमें दोषी पाए जाने पर जवानों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
सरकार
नागालैंड सरकार ने केंद्र से मांगी थी अनुमति
SIT ने कहा था कि सैनिकों ने गाइडलाइंस का पालन नहीं किया और उनकी अंधाधुंध गोलीबारी में नागरिकों की जान चली गई। इसके बाद नागालैंड सरकार ने जवानों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी थी।
दरअसल, इस इलाके में सशस्त्र बल विशेष शक्ति अधिनियम (AFSPA) लागू है। इसके तहत जवानों के खिलाफ मुकदमे के लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है, जिसे देने से इनकार कर दिया गया है।
कानून
क्या है AFSPA कानून?
AFSPA कानून ब्रिटिश सरकार के जमाने का है। 1958 में एक अध्यादेश के जरिए AFSPA के वर्तमान स्वरूप को लाया गया।
AFSPA में सैन्य बलों को अधिकार है कि वे कानून तोड़ने वाले किसी व्यक्ति पर बल प्रयोग, यहां तक कि गोली भी चला सकते हैं। सैन्य बल बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं और तलाशी ले सकते हैं।
सुरक्षा बलों के खिलाफ बिना केंद्र सरकार की मंजूरी कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता।