
अमेरिकी संसद पर हमले के लिए जिम्मेदार क्यों माने जा रहे हैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप?
क्या है खबर?
अमेरिकी संसद पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के हमले ने अमेरिका समेत पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है।
अमेरिकी मीडिया और ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं समेत तमाम प्रभावशाली हस्तियों ने इस हमले के लिए ट्रंप को जिम्मेदार माना है और उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है।
आइए जानते हैं कि उनके इस आरोप के पीछे क्या कारण हैं और क्यों ट्रंप को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि
चुनावों में धांधली को लेकर ट्रंप का लोगों को गुमराह करना समस्या की जड़
नवंबर में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बाइडन के हाथों शिकस्त का सामना करने वाले ट्रंप इस चुनाव से पहले से ही अमेरिकी चुनावी व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को कमजोर करने में लगे हुए हैं और लगातार चुनाव में धांधली का आरोप लगा रहे हैं।
राज्य प्रशासनों और सुप्रीम कोर्ट के चुनावों में धांधली की सभी शिकायतों को खारिज करने के बावजूद वे अपने इन निराधार आरोपों के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं।
रैली
ट्रंप ने समर्थकों को संसद की तरफ मार्च के लिए उकसाया
धांधली का आरोप लगा चुनावों के नतीजों को पलटने के अपने इन्हीं प्रयासों के तहत ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस के सामने मौजूद एलिप्स पार्क में 'सेव अमेरिका रैली' की थी।
इसमें धांधली के अपने आरोपों को दोहराते हुए ट्रंप ने अपने समर्थकों से रैली के बाद अमेरिकी संसद की तरफ मार्च करने को कहा था।
उन्होंने कहा था, "हम कभी हार नहीं मानेंगे... ऐसा नहीं होता। जब चोरी शामिल हो तो आप हार स्वीकार नहीं करते हैं।"
भड़काऊ बयान
समर्थकों को हिंसा के लिए उकसाते हुए प्रतीत हुए ट्रंप
ट्रंप ने अपने भाषण में कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिनसे ऐसा प्रतीत होता है कि वे अपने समर्थकों को हिंसा के लिए भड़का रहे थे।
अपने भाषण में उन्होंने कहा, "आप कभी भी हमारे देश को कमजोरी के साथ वापस नहीं ले सकते। आपको अपनी ताकत दिखानी होगी और आपको मजबूत होना पड़ेगा।"
"चुनाव में धांधली" के कारण पहले से ही गुस्से से भरे ट्रंप समर्थकों ने इस उकसावे के बाद संसद पर धावा बोल दिया।
हमला
सुरक्षा घेरे को तोड़ संसद के अंदर दाखिल हुए ट्रंप समर्थक
ट्रंप की रैली से जाने के बाद उनके समर्थक पहले हजारों की संख्या में संसद के सामने जमा हुए और फिर सभी सुरक्षा घेरों को तोड़ते हुए इसके अंदर दाखिल हो गए।
अंदर दाखिल होने के बाद उन्होंने जमकर तोड़फोड़ की और सांसदों के कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा वे ट्रंप के समर्थन में नारेबाजी करते हुए भी नजर आए।
ट्रंप समर्थकों की पुलिस से झड़प भी हुई और इसमें चार लोग मारे गए।
हमले का समय
हमले के समय चल रही थी संसद की कार्यवाही
ट्रंप समर्थकों ने ये हमला ऐसे समय पर किया जब बाइडन की जीत पर मुहर लगाने के लिए संसद के संयुक्त सत्र की कार्यवाही चल रही थी। भीड़ के हमले के कारण इस कार्यवाही को रोकना पड़ा और सांसदों को सुरक्षित जगहों पर पनाह लेनी पड़ी।
उग्र भीड़ ने डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता और अमेरिकी संसद के निचले सदन की स्पीकर नेन्सी पेलोसी के कार्यालय पर भी हमला किया और कुछ लोग उनकी कुर्सी पर बैठ गए।
दलील
ट्रंप ने की समर्थकों की हिंसा को सही ठहराने की कोशिश
ट्रंप ने हमले के बाद हिंसा को सही ठहराने की कोशिश भी की।
सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा, "मैं आपका दर्द जानता हूं। मैं जानता हूं कि आप आहत हुए हैं। चुनाव को हम से चुराया गया।"
अपने समर्थकों से घर लौटने की अपील करते हुए उन्होंने ये भी कहा कि वह उन्हें प्यार करते हैं।
ट्रंप की कई पोस्ट को भड़काऊ मानते हुए ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम ने उनके एकाउंट्स भी लॉक कर दिए हैं।
मांग
उठ रही ट्रंप को तत्काल पद से हटाने की मांग
पहले अपने समर्थकों के दिमाग में चुनाव में धांधली की बात डालने और फिर उन्हें हिंसा के लिए उकसाना और संसद पर उनके हमले को जायज ठहराने के ट्रंप के इन्हीं कृत्यों के कारण उन्हें इस हमले का असली जिम्मेदार बताया जा रहा है।
कई मीडिया संगठनों और सांसदों ने कहा है कि उनका एक मिनट भी पद पर रहना अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और इसलिए उन्हें तत्काल पद से हटा देना चाहिए।
आरोप
समर्थकों को क्यों उकसा रहे हैं ट्रंप?
अपनी चुनावी हार को पलटने के लिए ट्रंप सुप्रीम कोर्ट जाने से लेकर राज्यों से अपील करने तक, हर कानूनी तरीका अपना चुके हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
अब ट्रंप पर आरोप हैं कि वह गैरकानूनी तरीके से नतीजों को पलटने की कोशिश कर रहे हैं। चूंकि संसद से बाइडन की जीत पर मुहर लग जाने के बाद उनके पास राष्ट्रपति बने रहने का कोई विकल्प नहीं बचता, इसलिए उन्होंने संसद की कार्यवाही को ही रुकवाने की कोशिश की।