
वक्फ विधेयक पर चर्चा के लिए पार्टियों ने जारी किया व्हिप, जानें ये क्या होता है
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किया है। सरकार की कोशिश है कि आज ही चर्चा के बाद विधेयक को लोकसभा से पारित कराया जाए।
वहीं, विपक्ष ने विधेयक के विरोध में कमर कस ली है। इस वजह से कई पार्टियों ने अपने-अपने सांसदों को व्हिप जारी कर संसद में अनिवार्य तौर पर उपस्थित रहने को कहा है।
आइए जानते हैं कि व्हिप क्या होता है।
व्हीप
क्या होता है व्हिप?
व्हिप किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्यों को एक निश्चित आदेश का पालन करने के लिए दिया गया लिखित आदेश है। 'व्हिप' शब्द ब्रिटिश प्रथा से लिया गया है, जिसमें सांसदों को पार्टी आदेशों का पालन करने के लिए मजबूर किया जाता था।
पार्टियां इसे सदस्यों को विशेष अवसर पर संसद में मौजूद रहने और मतदान में हिस्सा लेने के लिए जारी करती हैं।
इससे सुनिश्चित होता है कि सदस्य सदन में उपस्थित हों और पार्टी रुख के अनुसार मतदान करें।
प्रकार
व्हिप कितने तरह के होते हैं?
व्हिप 3 तरह के होते हैं।
सदस्यों को किसी महत्वपूर्ण मतदान के बारे में सूचित करने के लिए एक लाइन का व्हिप जारी किया जाता है।
वहीं, मतदान के दौरान सदन में उपस्थित रहने का निर्देश देने के लिए 2 लाइन का व्हिप जारी किया जाता है।
3 लाइन का व्हिप सबसे सख्त होता है। इसमें सदस्यों को अनिवार्य तरीके से उपस्थित रहने और पार्टी लाइन के मुताबिक मतदान करने का निर्देश दिया जाता है।
उल्लंघन
व्हिप का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
व्हिप का पालन करना हर पार्टी सदस्य के लिए जरूरी होता है। व्हिप का उल्लंघन करने पर पार्टी सख्त कदम उठा सकती है।
अगर 3 लाइन के व्हिप का उल्लंघन किया जाता है तो पार्टी दलबदल विरोधी कानून के तहत संबंधिक सदस्य को अयोग्य घोषित कर सकती है और उसकी संसद सदस्यता भी जा सकती है।
हालांकि, जब किसी पार्टी के एक-तिहाई से ज्यादा संसद सदस्य व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती है।
अन्य देश
क्या बाकी देशों में भी इस तरह की व्यवस्था है?
हां। ब्रिटेन में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर सांसद को पार्टी की सदस्यता से हाथ धोना पड़ सकता है। हालांकि, वह निर्दलीय के तौर पर संसद सदस्य बना रह सकता है।
अमेरिका में भी इस तरह की व्यवस्था है।
भारत में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्यों के लिए व्हिप जारी किया जाता है। इसके लिए हर राजनीतिक पार्टी सदन में एक मुख्य सचेतक की नियुक्ति करती है।