
#NewsBytesExplainer: वक्फ विधेयक से क्या-क्या बदलेगा और क्या है विरोध की वजह? जानें हर बड़ी बात
क्या है खबर?
केंद्र सरकार आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इसमें वक्फ बोर्ड के प्रशासन के तरीके में बदलाव, संपत्तियों के प्रबंधन और मालिकाना हक को लेकर कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि विधेयक के जरिए वह वक्फ से जुड़ी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। वहीं, मुस्लिम संगठन कह रहे हैं कि सरकार की नजर वक्फ की संपत्तियों पर है।
आइए जानते हैं विधेयक में क्या-क्या बड़े प्रावधान किए गए हैं।
बोर्ड
वक्फ बोर्ड में शामिल होंगे गैर-मुस्लिम सदस्य और महिलाएं
नए विधेयक में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों और महिलाओं को शामिल करने का प्रावधान है। अब बोर्ड में 2 महिला और 2 गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल होंगे।
वहीं, केंद्रीय वक्फ परिषद में एक केंद्रीय मंत्री, 3 सांसद, 2 पूर्व न्यायाधीश, 4 मशहूर लोग, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल होंगे। इनमें किसी का मुसलमान होना जरूरी नहीं है।
मुस्लिम संगठनों का कहना है कि बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना वक्फ प्रशासन में दखल देना है।
संपत्ति
संपत्ति पर नियंत्रण को लेकर होंगे ये बदलाव
सरकार वक्फ संपत्तियों के सर्वे के लिए कलेक्टर को नियुक्त करेगी। पहले ये काम सर्वे कमिश्नर किया करते थे। जिला कलेक्टर मौजूदा राजस्व प्रक्रियाओं का उपयोग कर सर्वेक्षण करेंगे।
बोर्ड को संपत्ति का पंजीयन कलेक्टर कार्यालय में करवाना होगा। कलेक्टर को इसकी जानकारी राज्य सरकार को देनी होगी।
सरकार की अनुमति मिलने के बाद ही संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का नियंत्रण हो सकेगा।
बिना कागजात के किसी संपत्ति पर वक्फ दावा नहीं कर सकेगा।
फैसले
वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को दी जा सकेगी चुनौती
अभी तक वक्फ ट्रिब्यूनल को फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। नए विधेयक में फैसले को चुनौती देने की व्यवस्था की गई है।
वक्फ किसी संपत्ति को अपनी संपत्ति घोषित नहीं कर सकेगा। इसके लिए कानून की धारा-40 को खत्म किया जाएगा।
वक्फ डीड के कोई भी संपत्ति दान नहीं की जा सकेगी।
कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहे मुसलमान ही संपत्ति दान कर सकेंगे।
विरोध
मुस्लिम संगठन क्यों कर रहे हैं विरोध?
मुस्लिमों का कहना है कि कई संपत्तियों सदियों पुरानी हैं, जिनके दस्तावेज नहीं है। ऐसी संपत्तियां विवादों में फंस जाएंगी।
विधेयक में कलेक्टर की भूमिका से मुस्लिमों को डर है कि सरकार का दखल बढ़ेगा।
वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार खत्म होंगे, क्योंकि इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।
दस्तावेज, सत्यापन और वक्फ डीड जैसे प्रावधानों से संपत्ति कानूनी पचड़े में फंस जाएंगी।
इसके अलावा मुस्लिम इसे धर्म में दखल के तौर पर भी देख रहे हैं।
संपत्ति
वक्फ बोर्ड के पास कितनी संपत्तियां हैं?
देश भर में 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फिलहाल 32 वक्फ बोर्ड हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, वक्फ बोर्ड के पास 8,65,644 अचल संपत्तियां हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 9 लाख एकड़ से भी ज्यादा है और अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है।
उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा (करीब 2 लाख) संपत्तियां हैं।
देश में भारतीय रेलवे और सेना के बाद वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा जमीन है।
शिकायतें
वक्फ बोर्ड के खिलाफ कितनी शिकायतें दर्ज हैं?
वक्फ बोर्ड के खिलाफ वर्तमान में 58,000 से अधिक शिकायतें हैं, जिनमें से 18,000 से अधिक न्यायाधिकरणों में और 150 से अधिक हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।
अलग-अलग राज्यों के वक्फ बोर्ड में 12,000 से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं। वहीं, 4.5 लाख संपत्तियां ऐसी हैं, जिनके मालिकाना हक के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
संपत्तियों पर वक्फ के दावे को लेकर हाल ही में कई विवाद भी हुए हैं।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
अरबी में 'वक्फ' का मतलब होता है- रोकना या निषिद्ध करना। इस्लाम में कोई व्यक्ति जब ईश्वर के नाम पर अपनी संपत्ति दान करता है तो इसे वक्फ करना कहते हैं।
भारत में ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ बोर्ड करता है। ये संस्था मुस्लिम धर्म के लिए दान की गई या पीढ़ियों से मुस्लिमों के नाम चल रही संपत्ति की देख-रेख करती है।
राज्यों में एक सुन्नी और एक शिया वक्फ बोर्ड होता है।