
कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव: मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर में से किसका पलड़ा भारी?
क्या है खबर?
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में कई अटकलों, राजस्थान में विद्रोह और कई नामों के सामने आने के बाद अब आखिरकर स्पष्ट हो गया है कि इस पद के लिए मुख्य मुकाबला शशि थरूर और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच होगा।
हालांकि, इस पद की दौड़ में झारखंड के नेता केएन त्रिपाठी भी हैं, लेकिन उन्हें मुकाबले में नहीं माना जा रहा है।
ऐसे में आइये जानते हैं कि इस मुकाबले में थरूर और खड़गे में से किसका पलड़ा भारी रहेगा।
एंट्री
दिग्विजय सिंह के बाद हुई खड़गे की एंट्री
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह का नाम सामने आया था, लेकिन बाद में खड़गे के चुनाव लड़ने की पुष्टि हो गई थी। उसके बाद सिंह ने चुनाव न लड़ने का फैसला करने के साथ खड़गे का समर्थन करने का ऐलान किया था।
उन्होंने कहा था कि खड़गे उनके वरिष्ठ नेता हैं और वह उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं।
शुरुआती जीवन
कैसा रहा है थरूर और खड़गे का शुरुआती जीवन?
शशि थरूर का जन्म 9 मार्च, 1956 को लंदन में हुआ था, लेकिन बाद में उनका परिवार भारत आ गया। उन्होंने मुंबई और कोलकाता से स्कूली पढ़ाई की और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफन कॉलेज से स्नातक किया। वह तीन दशक तक संयुक्त राष्ट्र से जुड़े रहे।
इसी तरह मल्लिकार्जुन खड़गे का जन्म 21 जुलाई, 1942 को कर्नाटक के बीदर में हुआ था। उनकी स्कूली पढ़ाई गुलबर्गा के नूतन स्कूल से हुई और सरकारी कॉलेज से कानून की डिग्री ली।
राजनीति
थरूर और खड़गे का राजनीतिक अनुभव
थरूर 2009 में राजनीति में आए थे। 2009 में पहली बार तिरुवनंतपुरम से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वह यहां से लगातार तीन बार के सांसद हैं। वह IT की संसदीय समिति के अध्यक्ष भी हैं।
इसी तरह खड़गे कॉलेज में मजदूर आंदोलन से जुड़े और छात्र संघ महासचिव बने। वह 1969 में कांग्रेस में आकर गुलबर्गा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष बने। 1972 में पहला चुनाव लड़ा। वह नौर बार विधायक और दो बार लोकसभा सांसद रहे हैं।
जानकारी
संपत्ति में खड़गे से आगे हैं थरूर
2019 के लोकसाभा चुनाव में दिए गए शपथ पत्र के अनुसार, खड़गे के पास 15.77 करोड़ की सपंत्ति है और उन पर एक आपराधिक मुकदमा दर्ज है। इसी तरह थरूर के पास 35 करोड़ की संपत्ति है और दो अपराधिक मामले हैं।
ताकत
चुनाव में क्या है थरूर की ताकत?
66 वर्षीय थरूर सभी मुद्दों पर बोलने में मुखर हैं और ट्विटर पर उन्हें काफी पसंद किया जाता है। वह दो बार केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके पास प्रशासनिक अनुभव भी है।
यदि वह अध्यक्ष बनते हैं तो नए विचारों से पार्टी को फिर से जीवंत कर सकते हैं।
इसी तरह बेहतर सोशल मीडिया उपस्थिति और अच्छे भाषण कौशल के चलते भाजपा और आम आदमी पार्टी (AAP) को हर मुद्दे पर करारा जवाब दे सकते हैं।
कमजोरी
क्या है थरूर की कमजोरी?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, संगठनात्मक अनुभव की कमी थरूर की सबसे बड़ी कमजोरी है।
इसी तरह 2009 में उनकी 'कैटल क्लास के साथ यात्रा करने की टिप्पणी' और 2014 में पत्नी सुनंदा पुष्कर को आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य आरोप उनके लिए परेशानी है। हालांकि, सुनंदा पुष्कर मामले में उन्हें 2021 में बरी कर दिया गया था।
इसी तरह उनका स्पष्टवादी होना और पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करना भी उनके खिलाफ जाता है।
जानकारी
थरूर को नहीं माना जाता है गांधी परिवार का वफादार
थरूर के पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण उनका गांधी परिवार के प्रति वफादार न होना है। वह कांग्रेस के उस G-23 समूह का हिस्सा है, जिसने बगावत के रूप में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संगठनात्मक ढांचे में सुधार की मांग की थी।
मजबूती
क्या है खड़गे की मजबूती?
खड़गे की सबसे बड़ी मजबूती राजनीति में उनका 45 साल का अनुभव है। इसके अलावा वह एक दलित नेता के रूप में शांत और अच्छे स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उनके साथ कभी भी कोई राजनीतिक विवाद भी नहीं जुड़ा है।
उन्होंने पिछले कुछ सालों में गांधी परिवार का विश्वास हासिल किया है और उनके सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। वह 'मिशन साउथ' के साथ राहुल गांधी की मदद कर रहे हैं।
समर्थन
खड़गे को मिला हुआ है दिग्गज नेताओं का समर्थन
कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए खड़गे के नामांकन से पता चलता है कि उन्हें सभी दिग्गज नेताओं का समर्थन हैं।
इनमें अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह, प्रमोद तिवारी, आनंद शर्मा, बीएस हूडा और मनीष तिवारी, पीएल पुनिया, एके एंटनी, पवन कुमार बंसल और मुकुल वासनिक आदि का नाम शामिल है।
इनमें आनंद शर्मा, बीएस हूडा और मनीष तिवारी G-23 समूह के सदस्य हैं।
ऐसे में उनका खड़गे को समर्थन करना थरूर के पिछड़ने का सबसे बड़ा संकेत है।
अन्य
इन चीजों में भी थरूर पर भारी हैं खड़गे
खड़गे के विपक्ष के नेताओं से भी अच्छे संबंध हैं। उनके NCP प्रमुख शरद पवार, CPM महासचिव सीताराम येचुरी, TMC प्रमुख ममता बनर्जी से भी काफी अच्छे संबंध हैं।
इसी तरह उनकी कर्नाटक के साथ महाराष्ट्र में भी अच्छी पैठ है। ऐसे में वह दोनों राज्यों में कांग्रेस को फायदा दिला सकते हैं।
वह मजदूरों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं और लंबे समय तक मजदूरों के हक के लिए लड़े हैं। उन्हें इसका भी फायदा मिल सकता है।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
दोनों नेताओं के निजी और राजनीतिक जीवन की तुलना के बाद अध्यक्ष पद के चुनाव में काफी हद तक खड़गे का पलड़ा थरूर पर भारी नजर आ रहा है। ऐसे में यदि कोई भीतरघात नहीं होता है तो खड़गे की जीत पक्की है।