
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: सुरक्षा के लिए तैनात की जाएंगी अर्द्धसैनिक बलों की 725 कंपनियां
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव में पहला चरण का मतदान 27 मार्च को होगा।
इसके लिए जहां राजनीतिक दल जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं, वहीं भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हो रही है। ऐसे में बंगाल का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसको लेकर राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव कराने और सुरक्षा के लिए अर्द्धसैनिक बलों की 725 कंपनियों की तैनाती की जा रही है।
चुनावी कार्यक्रम
बंगाल में आठ चरणों में होने हैं चुनाव
बंगाल की 294 सीटों पर 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। नतीजे 2 मई को आएंगे।
इन चुनाव में मुख्य टक्कर सत्तारूढ़ TMC और भाजपा के बीच मानी जा रही है। अभी तक बंगाल में छोटी पार्टी रही भाजपा इस बार TMC के किले में सेंध लगाने की तैयारी के साथ उतरी है और अमित शाह ने पार्टी को 200 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है।
बयान
चुनाव में तैनात की जाएंगी कुल 725 कंपनियां- CRPF महानिदेशक
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पश्चिम बंगाल चुनाव में सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के नवनियुक्त महानिदेशक कुलदीप सिंह ने कहा कि राज्य में सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की 725 कंपनियां तैनात की जाएंगी। इनमें से 415 कंपनियां पश्चिम बंगाल पहुंच भी चुकी है और पहले चरण के मतदान के लिए उनकी तैनाती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि तैनात कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों फ्लैग मार्च कर रही है।
तैनाती
राज्य में तैनात होंगे कुल 70,000 जवान
महानिदेशक सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तैनात होने वाली केंद्रीय बलों की 725 कंपनियों में से 350-370 CRPF की होंगी। एक कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। ऐसे में राज्य में होने वाले चुनावों में कुल 70,000 से अधिक जवान तैनात होंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने ही CRPF की नौ कंपनियों को कोलकाता में तैनात कर दिया गया था। इसी तरह सशस्त्र सीमा बल (SSB) की तीन कंपनियों को हावड़ा में तैनात किया गया था।
संवेदनशील
राज्य के संवेदनशील बूथों पर तैनात होंगे अर्द्धसैनिक बलों के जवान
महानिदेशक सिंह ने बताया कि केंद्रीय बलों को विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राज्य पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की सहायता से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने के लिए तैनात किया जा रहा है। संवदेशनीशल बूथों पर मतदाताओं के आने, वोट डालने और बूथ के बाहर भीड़ के एकत्र नहीं होने की जिम्मेदारी जवानों पर होगी।
उन्होंने बताया कि अर्द्धसैनिक बलों का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है।
बैठक
चुनाव आयोग ने की पर्यवेक्षकों के साथ बैठक
बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनावों को लेकर इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने चुनाव ड्यूटी के लिए नियुक्त सभी पर्यवेक्षकों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में 1,600 से अधिक पर्यवेक्षक मौजूद थे।
उस दौरान आयोग ने सभी पर्यवेक्षकों को शारीरिक और वस्तुतः, चुनावी योजना, सुरक्षा प्रबंधन, राज्य-विशिष्ट मुद्दों और कोरोना महामारी के दिशानिर्देशों सहित SVEEP पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने को कहा था। इसके अलावा चुनावों में पूरी पारदर्शिता बतरने की सलाह दी थी।
मांग
भाजपा ने की थी अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग
बता दें कि पश्चिम बंगाल में पिछले काफी समय से भाजपा और TMC के बीच हिंसक झड़पें हो रही हैं। इसमें कई भाजपा और TMC कार्यकर्ताओं की मौत भी हो चुकी है।
इसी को देखते हुए भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने फरवरी में चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपकर राज्य में अर्द्धसैनिक बलों की मौजूदगी में चुनाव कराने की मांग की थी।
इसके बाद चुनाव आयोग ने राज्य की स्थिति की समीक्षा करने के बाद कंपनियां तैनात करने का निर्णय किया था।