
तेजी से बढ़ रहे 'ब्लैक फंगस' के मामले, राजस्थान सरकार ने महामारी घोषित किया
क्या है खबर?
देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण से ठीक होने वाले लोगों के लिए जानलेवा बने म्यूकरमायकोसिस यानी ब्लैक फंगस का कहर लगातार बढ़ रहा है।
यह फंगल संक्रमण विशेष तौर पर उन लोगों में मिल रहा है जो शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हैं और कोरोना संक्रमण से ठीक हुए हैं।
इसी बीच राजस्थान में भी इसके करीब 100 मामले आ चुके हैं। इसके बाद राज्य सरकार ने बुधवार को इसे महामारी घोषित कर दिया है।
जानकारी
आखिर क्या है म्यूकरमायकोसिस या ब्लैक फंगस?
म्यूकरमायकोसिस या ब्लैक फंगस एक बेहद दुर्लभ संक्रमण है। यह म्यूकर फंगस के कारण होता है जो मिट्टी, पौधों, खाद, सड़े हुए फल और सब्ज़ियों में पनपता है।
यह आम तौर पर उन लोगों को प्रभावित करते हैं जो लंबे समय दवा ले रहे हैं और जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है।
दिल्ली AIIMS के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना वायरस के मरीजों खासकर मधुमेह रोगियों में स्टेरॉयड का अधिक उपयोग इस संक्रमण का प्रमुख कारण है।
लक्षण
क्या है ब्लैक फंगस के प्रमुख लक्षण?
विशेषज्ञों के अुनसार ब्लैक फंगस से पीड़ित व्यक्ति को चेहरे के एक हिस्से में सूजन, सिरदर्द, नाक में संक्रमण, नाक या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव, बुखार, खांसी, छाती में दर्द, सांस लेने में परेशानी, आंखों में सूजन और दर्द, पलकों का गिरना, धुंधला दिखना, अंधापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
कोरोना संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में यह ठीक होने के दो-तीन दिन बाद या ठीक होने के दौरान भी नजर आ सकते हैं।
राजस्थान
राजस्थान में सामने आए 100 से अधिक मामले
ब्लैक फंगस ने अब राजस्थान में लोगों को शिकार बनाना शुरू कर दिया है। राज्य में अब तक 100 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
इन मामलों ने महामारी के प्रबंधन में जुटी राज्य सरकार की चिंता को बढ़ा दिया है। इन मरीजों में कई की आंखों की रोशनी चली गई तो कुछ के जबड़े निकालने पड़े हैं।
ऐसे में सरकार ने मरीजों के उपचार के लिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में अलग से वार्ड बनाया गया है।
अधिसूचना
राज्य के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने जारी की महामारी की अधिसूचना
राज्य में बढ़ते ब्लैक फंगस के मामलों को देखते हुए सरकार ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। राज्य के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को राजस्थान महामारी अधिनियम-2020 की धारा-3 की उप धारा-4 के तहत ब्लैक फंगस को संपूर्ण राज्य में महामारी और अधिसूचनीय रोग अधिसूचित किया है।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा अखिल अरोड़ा ने अधिसूचना जारी करने के बाद कहा कि ब्लैक फंगस के समन्वित उपचार के लिए यह कदम उठाया गया है।
जानकारी
मुख्यमंत्री गहलोत पहले ही जता चुके हैं चिंता
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कुछ दिन पहले प्रदेश भर में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों के ब्लैक फंगस की चपेट में आने को लेकर चिंता जता चुके हैं। उस दौरान उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों को बीमारी के उपचार के लिए कदम उठाने को कहा है।
अन्य
इन राज्यों में भी तेजी से बढ़ रहे हैं ब्लैक फंगस के मामले
राजस्थान की तरह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात में ब्लैक फंगस के 100 से अधिक, उत्तर प्रदेश में 50, उत्तराखंड में 38, हरियाणा में 115 मामले सामने आ चुके हैं।
यही कारण है कि हरियाणा सरकार ने इसे अधिसूचित बीमारी घोषित कर दिया है।
इसी तरह महाराष्ट्र ब्लैक फंगस से सबसे अधिक प्रभावित है। यहां अब तक ब्लैक फंगस से 52 लोगों की मौत हो चुकी है। इसी तरह स्वास्थ्य मंत्री ने 2,000 मामले होने की आशंका जताई है।
चेतावनी
तीन अंकों की संख्या के पार हुई ब्लैक फंगस के मामलों की संख्या- श्रीवास्तव
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) दिल्ली के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एमवी पद्मा श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि अस्पताल में ब्लैक फंगस के मामलों की संख्या तीन अंकों को पार कर गई है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रतिदिन ब्लैक फंगस के 20 से अधिक मामले आ रहे हैं। इसके कारण ट्रॉमा सेंटर और AIIMS में अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं।
उन्होंने मधुमेह रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जानकारी
मधुमेह रोगियों को बंद कर देना चाहिए चीनी का उपयोग- श्रीवास्तव
श्रीवास्तव ने कहा कि कमजोर इम्यूनिटी और मधुमेह रोगियों में ब्लैक फंगस का सबसे अधिक खतरा है। ऐसे में मधुमेह रोगियों को चीनी का उपयोग बंद कर देना चाहिए या इस पर सख्ती बरतनी चाहिए। इसी तरह स्टेरॉयड का भी तर्कसंगत उपयोग करना चाहिए।