
राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर: पुलिस ने फिर चलाई वॉटर कैनन और आंसू गैस, बैरिकेडिंग हटा आगे बढ़े किसान
क्या है खबर?
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहा किसानों का एक समूह आज राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ कर आगे बढ़ने में कामयाब रहा। हरियाणा पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों की मदद से उन्हें रोकने की कोशिश की, हालांकि वह इसमें असफल रही।
अभी किसान रेवाड़ी के रास्ते दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए एक और कोशिश करने की बात कही है।
मामला
20-25 ट्रैक्टरों पर आए थे किसान
मामले की जानकारी देते हुए बावल के उप पुलिस अधीक्षक (DSP) राजेश कुमार ने कहा, "आज दोपहर लगभग 20 से 25 ट्रैक्टर बैरिकेडिंग को पार करने और रेवाड़ी में घुसने में कामयाब रहे। हम भूदला फ्लाईओवर पर उन्हें रोकने की एक और कोशिश करेंगे।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें उन्हें रोकने के लिए किसी तरह का लाठीचार्ज नहीं किया, लेकिन हमें वॉटर कैनन और आंसू गैस के गोलों को उपयाग करना पड़ा। हालांकि ये भी उन्हें नहीं रोक पाए।"
प्रदर्शन
तीन हफ्ते से दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस वे पर प्रदर्शन कर रहे हैं किसान
बता दें कि राजस्थान और हरियाणा के किसान पिछले तीन हफ्ते से दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस वे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। शुरू में उनकी संख्या मात्र 200 थी, लेकिन गुजरात और महाराष्ट्र के किसानों के भी उनके साथ जुड़ने से अब ये संख्या लगभग 1,500 हो गई है।
आज बैरिकेडिंग को पार करने के बाद जहां कुछ किसान दिल्ली की तरफ आगे बढ़ गए हैं, वहीं ज्यादातर बॉर्डर पर ही बैठे हुए हैं और शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं।
कृषि कानून
क्या है किसानों के विरोध की वजह?
दरअसल, मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है। इनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और MSP से छुटकारा पाना चाहती है।
संघर्ष
किसानों की मांग- वापस लिए जाए तीनों कानून
इन कानूनों के खिलाफ किसान पिछले कई महीने से सड़कों पर हैं और 25 नवंबर से दिल्ली के आसपास डटे हुए हैं। इस दौरान किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है और कम से कम 22 किसानों की जान भी गई है।
हालांकि इन सभी परेशानियों के बावजूद किसान पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और कानून वापस लेने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
बातचीत
दो मुद्दों पर बनी सहमति, लेकिन अहम मांगों पर गतिरोध बरकरार
इस गतिरोध को तोड़ने के लिए सरकार और किसानों के बीच छह दौर की बैठक भी हो चुकी है और बुधवार को हुई अंतिम बैठक में दो मुद्दों पर सहमति बनी। सरकार ने पराली जलाने पर आर्थिक जुर्माने और इलेक्ट्रिसिटी एक्ट पर किसानों की मांग मान ली है और इन्हें वापस लेने को तैयार है।
हालांकि सरकार आंदोलन के केंद्र तीन कृषि कानूनों को वापस लेने को राजी नहीं हुई है और इस पर समिति बनाने की बात कही है।