
कृषि कानून: सरकार और किसानों की बैठक आज, कृषि मंत्री ने जताई हल निकलने की उम्मीद
क्या है खबर?
कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों और केंद्र सरकार के बीच आज सातवें दौर की बातचीत होगी।
दोनों पक्षों के बीच दिल्ली के विज्ञान भवन में दोपहर 2 बजे बैठक शुरू होगी।
किसानों का कहना है कि तीनों कानून रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की गारंटी के कानून की मांग उनके एजेंडे में होंगी।
दूसरी तरफ रविवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी।
किसान आंदोलन
बातचीत असफल होने पर किसानों की आंदोलन तेज करने की चेतावनी
केंंद्र की तरफ से आज की बैठक में कृषि मंत्री तोमर, पीयूष गोयल और सोम प्रकाश शामिल होंगे।
वहीं किसान संगठनों के 40 नेता किसानों का पक्ष सरकार के सामने रखेंगे।
किसानों ने आज की बैठक असफल रहने पर आंदोलन को तेज करने और 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करने की चेतावनी दी है।
सरकार जहां कानूनों में संशोधन को तैयार है, वहीं किसान इन्हें रद्द कराने की मांग पर मजबूती से डटे हुए हैं।
बयान
कानूनों के रद्द होने पर निर्भर है बातचीत की सफलता- किसान नेता
ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी (AIKSCC) के सचिव अविक साह ने कहा कि बातचीत की सफलता तीनों कानूनों के रद्द होने पर निर्भर करती है। इन कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया न तो पेचीदा है और न ही इसमें समय लगेगा।
रणनीति पर चर्चा
राजनाथ से मिले तोमर
दूसरी तरफ बातचीत को लेकर सरकार की रणनीति पर चर्चा करने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में दोनों मंत्रियों ने किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए बीच का रास्ता निकालने के सभी संभावित विकल्पों पर चर्चा की थी।
बैठक के बाद तोमर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि किसानों के साथ बातचीत से हल निकलेगा।
जानकारी
30 दिसंबर की बैठक में थोड़ी आगे बढ़ी थी बात
इससे पहले 30 दिसंबर को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें हवा की गुणवत्ता और बिजली से संबंधित अध्यादेशों से किसानों को दूर रखने पर सहमति बनी थी। हालांकि, किसानों का कहना है कि उनकी असल मांगे अभी भी जस की तस है।
बयान
सोनिया गांधी ने कानून वापस लेने की मांग की
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने रविवार को केंद्र सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से देश में पहली बार ऐसी अहंकारी सरकार सत्ता में आई है, जिसे अन्नदाताओं की पीड़ा दिखाई नहीं दे रही है।
सोनिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनभावनाओं की उपेक्षा करने वाली सरकारें और नेता ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रह सकते। किसान मजदूर अब सरकार के सामने घुटने टेकने वाले नहीं हैं।
टकराव
रेवाड़ी में पुलिस ने किसानों पर दागे आंसू गैस के गोले
बीते साल नवंबर के बाद जनवरी में एक बार फिर हरियाणा पुलिस और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हिंसक झड़प हो गई।
कई दिनों से शाहजहांपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा के किसानों ने दिल्ली की तरफ कूच करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें मसानी के पास रोक लिया।
इसी दौरान दोनों में झड़प शुरू हो गई। पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।
विरोध की वजह
क्यों प्रदर्शन कर रहे किसान?
मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तीन कानून लेकर लाई है।
इनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और MSP से छुटकारा पाना चाहती है।