
#NewsBytesExplainer: कैसे वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रहा 2 प्रमुख समुद्री मार्गों पर व्यवधान?
क्या है खबर?
दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों में से एक मेर्स्क ने उसके एक व्यापारिक जहाज पर हूती विद्रोहियों के हमले के बाद लाल सागर जलडमरूमध्य से अपने जहाजों की आवाजाही अगले 48 घंटे के लिए निलंबित कर दी है।
इससे पहले ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भारत आ रहे एक जहाज पर भी हमला किया था।
हालांकि, विश्व व्यापार के सामने केवल यही समस्या नहीं है और कुल 2 प्रमुख समुद्री मार्ग इन दिनों व्यवधानों का सामना कर रहे हैं।
संकट
किन-किन समुद्री मार्गों पर व्यापार में आ रहा व्यवधान?
समुद्री परिवहन में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चिंता है क्योंकि दुनिया का 80 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्र के रास्ते होता है।
वर्तमान में 2 महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग रुकावटों का सामना कर रहे हैं।
पहला है लाल सागर क्षेत्र में स्वेज नहर की ओर जाने वाला बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और दूसरा है 100 साल पुरानी पनामा नहर।
स्वेज नहर लाल सागर और भूमध्य सागर को जोड़ती है, जबकि पनामा नहर प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ती है।
पनामा नहर
पनामा नहर से कितना व्यापार होता है और ये क्यों प्रभावित हुआ?
हर महीने लगभग 1,000 जहाज पनामा नहर से होकर गुजरते हैं, जो कुल 4 करोड़ टन से अधिक सामान ले जाते हैं।
यह वैश्विक समुद्री व्यापार मात्रा का लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन नहर के 143 साल के इतिहास में सबसे खराब सूखे के कारण अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के बीच इस महत्वपूर्ण लिंक में जल स्तर गंभीर स्तर तक गिर गया है।
दरअसल, गैटुन झील, जो नहर को पानी देती है, उसमें अपर्याप्त वर्षा के कारण नहर सूख रही।
प्रभावित
पनामा नहर से कितना प्रभावित हुआ व्यापार?
पनामा नहर से 50 प्रतिशत व्यापार कम हो गया है क्योंकि यह नहर सूख रही है।
पानी की कमी के कारण एशिया से अमेरिका जाने वाले प्राकृतिक गैस (LNG) जहाजों को स्वेज नहर का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसमें पनामा नहर की तुलना में 6 दिन अधिक लगते हैं।
वैकल्पिक मार्ग अपनाने से शिपर्स की लागत बढ़ गई है। 2024 में यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या और आधी हो सकती है।
स्वेज नहर
स्वेज नहर से कितना व्यापार होता है?
मिस्र में स्थित 193 किमी लंबी यह नहर नवंबर, 1869 में खोली गई थी और यह एशिया और यूरोप के बीच सबसे तेज और सबसे सीधा समुद्री व्यापार लिंक बनी हुई है।
इससे हर साल 20,000 से ज्यादा जहाज गुजरते हैं। दुनिया के कुल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत माल इसी मार्ग से गुजरता है।
दुनिया के अनुमानित 8 प्रतिशत LNG आयात और 30 प्रतिशत कंटनेर शिपमेंट भी स्वेज नहर से होकर गुजरते हैं।
व्यापार
स्वेज नहर से व्यापार क्यों प्रभावित हो रहा?
स्वेज नहर के जरिए पूर्वी अफ्रीका, ईरान, अरब, भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया आदि देशों के लिए यूरोप और अमेरिका के साथ सीधा व्यापार करना आसान हो गया है।
इजरायल-हमास युद्ध शुरू के बाद यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना रहे हैं।
इसके कारण दुनिया के कम से कम 10 बड़े व्यापारिक जहाजों और एक बड़े तेल आपूर्तिकर्ता ने स्वेज नहर से माल न भेजने का फैसला किया है।
हूती हमले
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
भारत के लिए समुद्र के माध्यम से व्यापार महत्वपूर्ण है। भारतीय निर्यातकों ने कहा कि अगर लाल सागर व्यापार मार्ग पर चल रही सुरक्षा चिंता जारी रही तो यूरोप और अफ्रीका जाने वाले भारतीय शिपमेंट के लिए माल ढुलाई दरें 25-30 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।
दरअसल, यूरोपीय संघ भारत के दूसरे सबसे बड़े निर्यात स्थलों में से एक है और इस समस्या ने भारत के कपड़ा, रत्न और आभूषण निर्यात जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रभावित किया है।
रूसी तेल
क्या भारत आ रहे रूसी तेल पर भी असर पड़ा?
मेर्स्क जैसे वैश्विक शिपिंग प्रमुख भी लाल सागर के माध्यम से व्यापार करने से बच रहे हैं, जिससे वैश्विक तेल और पेट्रोलियम उत्पाद प्रवाह में पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है।
हालांकि, भारत को अब तक अपने रूसी तेल आयात में किसी व्यवधान का सामना नहीं करना पड़ा है। रूस ईरान का सहयोगी है और हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है, इसलिए रूस के टैंकर यहां से आसानी से गुजरते रहे हैं।