
#NewsBytesExplainer: G-20 का स्थायी सदस्य बना अफ्रीकी संघ, जानें इस संगठन से जुड़ी सभी बातें
क्या है खबर?
G-20 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो चुकी है। इस दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीकी संघ (AU) को G-20 का स्थायी सदस्य बनाने का बड़ा ऐलान किया।
इसके बाद प्रधानमंत्री ने AU के अध्यक्ष अजाली असौमनी को गले लगाकर बधाई दी और उन्हें बतौर सदस्य सीट आवंटित की गई। इसके साथ ही AU अब G-20 का स्थायी सदस्य बन गया है।
आइए समझते हैं कि AU क्या है और क्यों अहम है।
यूनियन
क्या है अफ्रीकन यूनियन?
यूरोपीयन संघ (EU) की तरह ही AU भी एक महाद्वीपीय निकाय है, जिसमें 55 सदस्य देश शामिल हैं। इसे अफ्रीका महाद्वीप का सबसे बड़ा समूह माना जाता है।
इसका उद्देश्य अफ्रीकी महाद्वीप को आर्थिक तौर पर विकसित करने, शांति, सुरक्षा और स्थिरता बढ़ाना है। इसे आधिकारिक तौर पर साल 2002 में अफ्रीकी एकता संगठन के उत्तराधिकारी के तौर पर शुरू किया गया था।
वर्तमान में अजाली असौमनी इसके अध्यक्ष हैं।
गठन
कैसे हुआ AU का गठन?
मई, 1963 में स्वतंत्र अफ्रीकी राज्यों के 32 प्रमुखों ने इथियोपिया में 'द ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी' (OAU) की स्थापना की थी। इसके गठन के पीछे का उद्देश्य लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा देना, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना और अफ्रीका से सभी प्रकार के उपनिवेशवाद का उंमूलन करना था।
1999 में इस संगठन के कामों में तेजी लाने के लिए AU बनाने का विचार आया और 2002 में AU की स्थापना हुई।
आकार
कितना बड़ा है अफ्रीकन यूनियन?
AU अफ्रीकी महाद्वीप के करीब 1.3 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें शामिल देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 2.26 ट्रिलियन डॉलर है।
AU की वेबसाइट के मुताबिक, इस संगठन का अपना बैंक, कोर्ट ऑफ जस्टिस और एक संसद भी है।
AU के पास अपनी सेना भी है, जिसे अफ्रीकी स्टैंडबाई फोर्स (ASF) कहा जाता है। संगठन की एक दर्जन से ज्यादा अलग-अलग समितियां हैं, जो कई काम संभालती हैं।
प्रस्ताव
भारत ने पेश किया था AU को शामिल करने का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने G-20 के सदस्य देशों के नेताओं को जून में पत्र लिखकर AU को शामिल करने का प्रस्ताव भेजा था। इसका अमेरिका, जापान और चीन समेत 19 देशों ने समर्थन किया था।
हाल ही में प्रधानमंत्री ने कहा था, "भारत AU को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह G-20 में बतौर पूर्ण सदस्य शामिल करने का समर्थन करता है। धरती के भविष्य से जुड़ी कोई भी योजना सभी के प्रतिनिधित्व और आवाज सुने बिना सफल नहीं हो सकती।"
मायने
क्या है इस फैसले के मायने?
ग्लोबल साउथ को साधने के लिहाज से भारत के लिए ये बड़ा कदम है।
चीन की नजरें ग्लोबल साउथ पर रही हैं और वो इस क्षेत्र में खुद की पैठ बढ़ाने की कोशिशें करता रहा है। अब AU को G-20 में शामिल कराकर भारत ने ग्लोबल साउथ को साधने के साथ ही चीन को भी जवाब दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को कम करने के लिहाज से कई अफ्रीकी देशों के दौरे करते रहे हैं।
बदलाव
AU के शामिल होने से कितना बदलेगा G-20?
बता दें कि वर्तमान में G-20 में 19 देश और EU शामिल हैं। इस तरह इसमें कुल 20 सदस्य हैं, जो दुनिया की करीब 65 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
AU के शामिल होने के बाद G-20 दुनिया की 80 प्रतिशत आबादी की आवाज बन जाएगा।
इसका लाभ अफ्रीका को भी होगा। अफ्रीकी देशों को आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए बड़ा मंच मिलेगा।