
विधानसभा चुनाव: पूर्वोत्तर के तीन छोटे राज्यों में लगा है बड़ा राजनीतिक दांव, जानिए चुनावी समीकरण
क्या है खबर?
फरवरी में त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनके परिणाम 12 मार्च को घोषित होंगे। यह तीनों राज्य भले ही आकार में छोटे हैं, लेकिन यहां राजनीतिक रूप से बड़ा दांव लगा हुआ है।
देश में 2023 के व्यस्त चुनावी मौसम की शुरुआत पूर्वोत्तर के इन तीनों राज्यों में होने वाले चुनाव के साथ हो रही है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव की पटकथा लिखेंगे।
आइए विस्तार से इन राज्यों के चुनावी समीकरणों को जानते हैं।
NEDA
पूर्वोत्तर के विकास पर भाजपा का विशेष जोर
अभी त्रिपुरा में भाजपा की सरकार है, जबकि सहयोगी के रूप में नागालैंड और मेघालय में सत्तारूढ़ गठबंधन में भी पार्टी की हिस्सेदारी है। हालांकि, जैसे-जैसे चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं, कुछ समीकरण भी बदल रहे हैं।
पूर्वोत्तर राज्यों के विकास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष जोर और नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलाइंस (NEDA) के उपस्थिति से इसे समझा जा सकता है।
NEDA पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय जनत्रांत्रिक गठबंधन (NDA) का एक स्थानीय संस्करण है।
भाजपा का गठबंधन
इन चीजों से भाजपा को मिल रहा फायदा
पूर्वोत्तर में भाजपा की किस्मत बदलने वालों में असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा का नाम शामिल है, जिन्होंने 2015 में कांग्रेस छोड़कर पार्टी की सदस्यता ली और वह NEDA के प्रमुख भी हैं।
केंद्र सरकार से गठबंधन की पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय पार्टियों की पारंपरिक भावना का भी भाजपा को यहां फायदा हुआ है।
इसके अलावा चुनावी कार्यक्रम की घोषणा के बाद यहां दलबदल की सुगबुगाहट से भी भाजपा को फायदा मिल सकता है।
IPFT गठबंधन
त्रिपुरा में तेजी से बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण
त्रिपुरा में 2018 के चुनाव में भाजपा ने 36 सीटें जीतकर पहली बार सत्ता हासिल की थी।
हाल में इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) ने भाजपा के साथ संबंध तोड़ने की घोषणा की थी और आदिवासी सहयोगी नवगठित TIPRA मोथा के साथ बातचीत कर रही है, जो 'ग्रेटर तिप्रालैंड' नामक एक अलग राज्य की मांग कर रहा है।
ऐसे में IPFT और भाजपा के बीच यहां प्रमुख मुकाबला माना जा रहा है।
गठबंधन
TIPRA मोथा ने भाजपा से गठबंधन की पेशकश भी की
TIPRA मोथा को लगता है कि स्वदेशी लोग अपनी ही मातृभूमि में अल्पसंख्यक बन गए हैं क्योंकि अब बांग्लादेश से हिंदू प्रवासियों की बाढ़ आ गई है।
उसने अप्रैल, 2021 में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद चुनावों में जीत हासिल की थी और इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हालांकि, TIPRA मोथा ने भाजपा से चुनावी गठबंधन की पेशकश की है।
त्रिपुरा में लगभग 20 आदिवासी सीटें हैं, जो चुनावी जीत के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
त्रिपुरा चुनाव
त्रिपुरा में कांग्रेस और लेफ्ट ने किया गठबंधन
त्रिपुरा में 16 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा ने कुछ समय पहले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी से बिप्लब देब को हटाकर माणिक साहा को बैठाया था।
भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट में यहां गठबंधन हो गया है और पहले दोनों पार्टियां यहां हमेशा से एक-दूसरे के धुर विरोधी रही थीं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी चुनावी मैदान में है।
मेघालय चुनाव
मेघालय में भाजपा अकेले दम पर लड़ेगी चुनाव
मेघालय में 27 फरवरी को चुनाव होने हैं। यहां भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के साथ भाजपा ने कोई चुनाव पूर्व गठबंधन नहीं किया है।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने घोषणा की है कि आगामी चुनावों में उनकी पार्टी NPP अकेले चुनाव लड़ेगी।
ऐसे में दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं, लेकिन यह बात भी गौर करने वाली है कि चुनाव के बाद अक्सर राज्य में सरकार बनाने के लिए जोड़-तोड़ किया जाता है।
नुकसान
पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
2018 के मेघालय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और 60 विधानसभा सीटों में से उसने 21 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि NPP के हिस्से 19 सीटें आई थीं।
इस चुनाव में मेघालय डेमोक्रेटिक फ्रंट (MDF) बना, जिसके बाद भाजपा समेत अन्य क्षेत्रीय दलों ने समर्थन किया और NPP ने सरकार बनाई।
चुनाव के बाद कांग्रेस के कई विधायक दलबदल करके TMC में शामिल हो गए और कांग्रेस को यहां भारी नुकसान उठाना पड़ा।
नागालैंड विधानसभा चुनाव
नागालैंड में गठबंधन से साथ चुनाव लड़ेगी भाजपा
नागालैंड में भी 27 फरवरी को चुनाव होने हैं और भाजपा यहां सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP) के साथ अपना गठबंधन जारी रखेगी। भाजपा ने अपने 20 उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए हैं। नेफियू के नेतृत्व वाली NDPP बाकी बची 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
कांग्रेस की कभी नागालैंड में अच्छी खासी पकड़ मानी जाती थी, लेकिन 2018 के चुनाव में उसका राज्य से सफाया हो गया था।
चुनाव समीकरण
नागालैंड में NPF विधायकों से टूटने से भाजपा की राह आसान
2018 के नागालैंड चुनाव में नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) 26 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन सरकार नहीं बना पाई। NDPP ने 18 और भाजपा ने 12 सीटें हासिल करते हुए गठबंधन की सरकार बनाई थी।
हालांकि, इस चुनाव के बाद विपक्षी दल NPF के करीब 21 विधायक NDPP में शामिल हो गए थे।
इस विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नेफियू रियो के लिए भाजपा के गठबंधन के साथ सत्ता पर वापसी करना आसान लग रहा है।