
भाजपा ने अभी तक कर्नाटक में सरकार बनाने का दावा क्यों नहीं किया? जानें कारण
क्या है खबर?
मंगलवार को कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने के बाद बेहद उत्साहित नजर आ रही भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक राज्य में सरकार बनाने का दावा नहीं किया है।
इस बीच पार्टी के कई नेताओं ने बुधवार को सरकार बनाने का दावा पेश करने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भाजपा आखिर किसी चीज का इंतजार कर रही है और इस देरी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं, आइए आपको बताते हैं।
भाजपा शीर्ष नेतृत्व
शीर्ष नेतृत्व से नहीं मिली है हरी झंडी
खबरों के अनुसार, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा तो सरकार बनाने के लिए दावा करने को पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन उन्हें अभी तक शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी नहीं मिली है।
शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता है कि लोगों में ऐसा संदेश जाए कि भाजपा को सत्ता का लालच है।
इसके अलावा शीर्ष नेतृत्व ये भी नहीं चाहता कि भाजपा अभी जल्दबाजी में सरकार बना ले और कुछ महीने बाद ये सरकार गिर जाए।
देरी का कारण
बागी विधायकों के इस्तीफों पर फैसले को इंतजार कर रही है भाजपा
शीर्ष नेतृत्व के इस रवैये का मुख्य कारण है कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के 16 बागी विधायकों पर फंसा पेंच।
विधानसभा स्पीकर केआर रमेश कुमार के अभी तक इन बागी विधायकों के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं लिया है।
जब तक वह इस्तीफों पर फैसला नहीं लेते, विधानसभा का संख्याबल 225 ही रहेगा और सरकार बनाने के लिए 113 विधायकों की जरूरत होगी।
भाजपा के पास मात्र 105 विधायक हैं।
दूसरा कारण
सरकार बनने पर भी लटकी रहेगी तलवार
लेकिन अगर स्पीकर कुमार इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं तो विधानसभा का संख्याबल घटकर 209 रह जाएगा और बहुमत के लिए 105 विधायकों की जरूरत होगी जोकि भाजपा के पास हैं।
उसे 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन मिल सकता है।
लेकिन इस तरीके को लेकर भी भाजपा पूरा आत्मविश्वास नहीं है क्योंकि जब तक बागी विधायक भाजपा की टिकट पर वापस विधायक बनकर नहीं आते, उनकी सरकार पर तलवार लटकी रहेगी।
रणनीति
कुछ समय के लिए लगाया जा सकता है राष्ट्रपति शासन
इन खतरों को देखते हुए माना जा रहा है कि कर्नाटक में कुछ समय के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति शासन एक तरीके से केंद्र सरकार का शासन ही है।
पार्टी प्रवक्ता जी मधुसुदन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "अगर स्पीकर बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने या अस्वीकार करने में ज्यादा समय लेते हैं तो राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं क्योंकि इस स्थिति में सरकार बनाने का दावा नहीं करेंगे।"