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#NewsBytesExplainer: क्या होती है दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति और इसे लेकर इतना घमासान क्यों?
MCD की स्थायी समिति के चुनाव झगड़े के कारण स्थगित किए गए

#NewsBytesExplainer: क्या होती है दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति और इसे लेकर इतना घमासान क्यों?

लेखन आबिद खान
Feb 23, 2023
08:08 pm

क्या है खबर?

बुधवार को दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव तो शांतिपूर्ण तरीके से हो गए, लेकिन स्थायी समिति के चुनावों में हंगामा हो गया।  आम आदमी पार्टी (AAP) और भाजपा के सदस्यों ने आपस में मारपीट शुरू की, सदन में बोतलें फेंकी गईं और बैलेट बॉक्स पलट दिए गए। भारी हंगामे के बाद कार्यवाही 24 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई है। आइए MCD की स्थायी समिति के बारे में जानते हैं।

स्थायी समिति

MCD की स्थायी समिति क्या है और इसके पास कितनी शक्तियां? 

स्थायी समिति को MCD में सबसे शक्तिशाली माना जाता है औऱ ये समिति ही इसका सारा कामकाज देखती है। स्थायी समिति निगम के सभी आर्थिक और प्रशासनिक फैसले लेती है। सदन में किसी भी तरह के प्रस्ताव को पास करने से पहले समिति के पास भेजा जाना जरूरी होता है। इसका MCD से जुड़ा हर फैसला समिति ही लेती है। समिति में एक चेयरपर्सन और एक डिप्टी चेयरपर्सन होता है, जो सदस्यों के बीच में से ही चुना जाता है।

चुनाव

समिति में कितने सदस्य होते हैं और इसका चुनाव कैसे होता है?

स्थायी समिति में कुल 18 सदस्य होते हैं। इसके 6 सदस्यों का चुनाव सदन की पहली बैठक में गुप्त वोटिंग के जरिये किया जाता है। ये चुनाव राज्यसभा सदस्यों की तरह वरीयता के आधार पर होता है। बचे हुए 12 सदस्यों का चुनाव नगर निगम के 12 अलग-अलग जोन से किया जाता है। हर जोन में एक समिति होती है, जिसमें क्षेत्र के सभी पार्षद और एल्डरमैन शामिल होते हैं।

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विवाद

स्थायी समिति को लेकर इतना घमासान क्यों?

दरअसल, स्थायी समिति के पास दिल्ली नगर निगम की लगभग सभी प्रशासनिक और आर्थिक शक्तियां होती हैं। सदन में पेश होने वाला हर प्रस्ताव पहले समिति के पास जाता है। इसके मतलब MCD का मेयर पद भले ही AAP के पास हो, लेकिन अगर स्थायी समिति में उसके सदस्य कम हुए तो उसे किसी भी प्रस्ताव को पास कराने में दिक्कत होगी। इसी वजह से दोनों पार्टियां चाह रही हैं कि स्थायी समिति में उनके सदस्यों की संख्या ज्यादा हो।

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सदस्य संख्या

स्थायी समिति चुनाव में किसका पलड़ा भारी? 

MCD में पार्षदों की संख्या के लिहाज से वोटिंग से भरी जाने वाली 6 में 4 सीट AAP जीत सकती है। इसके अलावा अलग-अलग जोन की 12 में से 8 सीट पर भी AAP की जीत की संभावना है। फिलहाल 3 जोन में मनोनीत पार्षद हैं, जिससे भाजपा को उम्मीद है कि वो 4 की बजाय 7 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है। ऐसा हुआ तो स्थायी समिति में भाजपा के सदस्यों की संख्या ज्यादा हो सकती है।

विवाद

कब-कब टले स्थायी समिति के चुनाव?

मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के 6 सदस्यों के चुनाव पहले भी तीन बार टल चुके हैं। 6 जनवरी, 24 जनवरी और 6 फरवरी को भी चुनाव कराने की कोशिश की गई, लेकिन हंगामे की वजह से कार्यवाही स्थिगत कर दी गई। मनोनीत पार्षदों को वोटिंग का अधिकार मिलने के बाद AAP मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई थी। कोर्ट ने अपने फैसले में मनोनीत पार्षदों के वोट डालने पर रोक लगा दी थी।

चुनाव

मेयर और डिप्टी मेयर के चु्नाव में क्या हुआ था? 

MCD मेयर पद के लिए बुधवार को हुए चुनाव में AAP की शैली ओबरॉय की जीत हुई थी। उन्हें 150 वोट मिले थे। उनकी प्रतिद्वंदी और भाजपा उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 116 वोट मिले थे। डिप्टी मेयर पद पर भी AAP प्रत्याशी आले मोहम्मद इकबाल ने जीत दर्ज की थी। आले इकबाल को 147 वोट मिले थे, वहीं भाजपा के कमल बांगड़ी को 116 वोट मिले थे। मोहम्मद इकबाल मटिया महल के वार्ड 76 से पार्षद हैं।

हार

न्यूजबाइट्स प्लस

MCD के चुनाव 4 दिसंबर को हुए थे और 8 दिसंबर को इनके नतीजे आए थे। कुल 250 सीटों में से AAP ने 134, भाजपा ने 104 और कांग्रेस ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। 15 साल बाद भाजपा की MCD चुनाव में हार हुई थी। AAP पहली बार MCD की सत्ता पर काबिज हुई है। 2017 के MCD चुनावों में भाजपा को 181, AAP को 48 और कांग्रेस को 30 सीटों पर जीत मिली थी।

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