
शीतकालीन सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक, प्रधानमंत्री मोदी ले सकते हैं हिस्सा
क्या है खबर?
अगले सोमवार से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जानकारी सामने आ रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं।
शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू होकर 23 दिसंबर तक चलेगा और यह 17वीं लोकसभा का सातवां सत्र होगा।
इस सत्र में सरकार किसान कानूनों को वापस लेने वाली है, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
जानकारी
सर्वदलीय बैठक में उठ सकते हैं ये मुद्दे
शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में कृषि कानूनों की वापसी और किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग के मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि यह बैठक रविवार को सुबह 11 बजे शुरू होगी।
आमतौर पर हर सत्र की शुरुआत से पहले सरकार सभी पार्टियों को आमंत्रित कर ऐसी बैठक करती है ताकि जरूरी मुद्दों पर सहमति बनाई जा सके और सदन में अधिक से अधिक कामकाज हो सके।
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रविवार को ही भाजपा संसदीय दल की बैठक
रविवार को सर्वदलीय बैठक के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं की बैठक होगी और शाम में भाजपा के संसदीय दल की बैठक हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी इन दोनों बैठकों में भी शामिल हो सकते हैं।
शीतकालीन सत्र
सरकार को इन मुद्दों पर घेर सकता है विपक्ष
सरकार की कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के साथ ही विपक्ष के हाथों से एक बड़ा मुद्दा निकल गया है, लेकिन वह किसानों की अन्य मांगों को लेकर सरकार को घेर सकता है।
इसके अलावा इस सत्र में चीनी घुसपैठ, लखीमपुर खीरी हिंसा मामले, कश्मीर में नागरिकों पर हमले, पेगासस मामला और दूसरे कई मुद्दों की गूंज सुनाई दे सकती है।
दूसरी तरफ सरकार अपने कई लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का प्रयास करेगी।
शीतकालीन सत्र
कृषि कानून होंगे वापस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के नाम संबोधन देते हुए तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था।
उन्होंने कहा था कि शीतकालीन सत्र में इन कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
जानकारी के अनुसार, सरकार इस दिशा में प्रस्ताव तैयार करने का काम शुरू कर चुकी है और इसे बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।
जानकारी
अनुच्छेद 85 में है संसद सत्रों का प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत सरकार को सत्र बुलाने की शक्ति दी गई है। संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति इसका फैसला लेती है, जिसे राष्ट्रपति औपचारिक मंजूरी देते हैं।
साल में बजट, मानसून और शीतकालीन समेत तीन सत्र होते हैं और किन्हीं दो सत्रों के बीच छह महीने से अधिक का अंतराल नहीं हो सकता।
बता दें कि संविधान में सत्रों के नाम नहीं दिए गए हैं और न ही कोई संसदीय कैलेंडर की व्यवस्था है।