
दिल्ली के केंद्र में पहुंचा कृषि कानूनों का विरोध, आज से जंतर-मंतर पर 'किसान संसद'
क्या है खबर?
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनं के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसान आज से दिल्ली के केंद्र में प्रदर्शन करेंगे। किसानों को ये प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर दिया गया है और रोजाना 200 किसान यहां जाकर 'किसान संसद' का आयोजन करेंगे।
उन्होंने सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई है। मानसून सत्र के अंत तक रोजाना ये 'किसान संसद' चलेगी।
प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
योजना
किसान संसद में की जाएगी किसानी से संबंधित मुद्दों पर चर्चा
किसान संगठनों के नेताओं का कहना है कि गुरूवार से संसद के मानसून सत्र जारी रहने तक रोजाना जंतर मंतर पर 'किसान संसद' का आयोजन होगा। रोजाना एक स्पीकर और उपसभापति चुना जाएगा। पहले दो दिन APMC कानून पर चर्चा होगी। इसके बाद दूसरे कानूनों पर चर्चा की जाएगी।
बता दें कि बीते सोमवार से शुरू हुआ मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा और किसानों कोे भी 13 अगस्त तक प्रदर्शन की अनुमति है।
प्रदर्शन
पहले संसद के सामने प्रदर्शन करना चाहते थे किसान
पहले किसान ये प्रदर्शन संसद के सामने करना चाहते थे, लेकिन पुलिस के अनुमति न देने के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने को तैयार हुए हैं।
किसानों ने पुलिस को आश्वासन दिया है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे और संसद भवन की तरफ नहीं जाएंगे। उन्होंने संसद की तरफ मार्च न करने का वादवा भी किया है।
किसानों ने कोरोना संबंधी सभी नियमों का पालन करने की बात भी कही है।
योजना
बसों के जरिए किसानों को जंतर-मंतर ले जाएगी पुलिस
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग धरना स्थलों से किसान पहले सिंघू बॉर्डर पर जमा होंगे और फिर जंतर-मंतर की तरफ निकलेंगे।
उन्हें जंतर-मंतर लाने-जाने की जिम्मेदारी पुलिस पर होगी। पहले सुबह 11 बजे किसानों को बसों में भरकर जंतर-मंतर लाया जाएगा और फिर 5 बजे के बाद उन्हें वापस बसों के जरिए सिंघू बॉर्डर छोड़ दिया जाएगा।
सब कुछ योजना के मुताबिक हो, इसके लिए पुलिस ने कड़े इंतजाम किए हैं।
किसान आंदोलन
कई तरह के विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं किसान
कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसान कई तरह के विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
आंदोलन की शुरुआत के बाद किसान 8 दिसंबर, 2020 को भारत बंद, 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड, 6 फरवरी को चार घंटे चक्का जाम, 18 फरवरी को रेल रोको आंदोलन, 26 मार्च को फिर से भारत बंद जैसे विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
हालांकि, सरकार पर इन प्रदर्शनों का असर नहीं हुआ है और वह अपने स्टैंड पर कायम है।
किसान आंदोलन
क्यों आंदोलन कर रहे हैं किसान?
मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पिछले साल सितंबर में तीन कानून लाई थी।
इनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद के लिए व्यापारिक इलाके बनाने, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडारण सीमा खत्म करने समेत कई प्रावधान किए गए हैं।
पंजाब और हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनके जरिये सरकार मंडियों और MSP से छुटकारा पाना चाहती है।