
प्रवासी मजदूरों की दयनीय स्थिति को लेकर मानवाधिकार आयोग ने रेलवे और राज्यों को भेजा नोटिस
क्या है खबर?
लॉकडाउन के दौरान विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भूख और प्यास से हो रही मजदूरों की मौत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा कदम उठाया है।
मजदूरों की दयनीय स्थिति को लेकर मीडिया में प्रकाशित हो रही रिपोर्टों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए NHRC ने केंद्रीय गृह सचिव के अलावा रेलवे बोर्ड के चेयरमैन के साथ-साथ गुजरात और बिहार के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है।
विफलता
मजदूरों का जीवन बचाने में विफल रही सरकार-NHRC
NHRC ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर रेलवे द्वारा चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में भोजन, पानी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण मजदूरों के साथ बर्बरता की जा रही है। सरकार गरीब तबके के लोगों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकती है।
यहां तक की राज्यों की ओर से मजदूरों के टिकट का भुगतान किया गया है। कुल मिलाकर रेलवे और सरकार मजदूरों का जीवन बचाने में विफल रही है।
नोटिस
NHRC ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में मांगा जवाब
NHRC ने गुजरात और बिहार के मुख्य सचिवों, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और केंद्रीय गृह सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
इसी प्रकार दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को यह बताने के लिए कहा है कि ट्रेन में सवार हुए प्रवासी कामगारों के लिए चिकित्सकीय सहायता समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए उनकी सरकार की ओर से क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।
जानकारी
विलंब से चल रही हैं श्रमिक स्पेशल ट्रेनें
NHRC ने कहा सभी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें पहली बात तो निर्धारित समय पर रवाना नहीं हो रही है। इतना ही नहीं अधिकतर ट्रेनें अपने गंतव्य पर पहुंचने में एक दिन का ज्यादा समय ले रही है। कुछ ट्रेनें तो दूसरे स्टेशनों पर पहुंच रही हैं।
मौत
भूख-प्यास के कारण हो रही श्रमिकों की मौत
NHRC ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि यात्रा की लंबी अवधि, भीषण गर्मी और खाने-पानी की कमी के कारण ट्रेनों में कई प्रवासी मजदूरों की मौत हो चुकी है।
मुजफ्फरपुर में दो, दानापुर, सासाराम, गया, बेगूसराय और जहानाबाद में हुई एक-एक मजदूर की मौत इसके प्रमुख उदाहरण है। इनमें एक 4 साल का बच्चा भी शामिल था। उन सभी की कथित तौर पर भूख के कारण मौत हुई है।
मार्मिक
बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आई थी मार्मिक घटना
NHRC ने उस मार्मिक घटना का भी उल्लेख किया है जिसमें बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर एक महिला का शव पड़ा है और उसका बच्चा उसके ऊपर पड़े कंबल के साथ खेल रहा है और उसे जगाने की कोशिश कर रहा है।
महिला श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन की मदद से यहां पहुंची थी और अत्यधिक गर्मी, भूख और पानी की कमी की वजह से उसकी मौत हुई।
इसको लेकर NHRC ने रेलवे और राज्य की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी
श्रमिक स्पेशल ट्रेन ने सूरत से बिहार पहुंचने में लगाए नौ दिन
NHRC ने बताया कि एक ट्रेन गत 16 मई को गुजरात के सूरत स्टेशन से बिहार के सिवान के लिए रवाना हुई थी, लेकिन इसके संचालन में इतनी बड़ी खामी रही कि यह ट्रेन करीब नौ दिन बाद यानी 25 मई को बिहार पहुंची।
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिया मजदूरों से किराया नहीं लेने का आदेश
बता दें गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रवासी मूजदूरों के मामले में सुनवाई करते हुए उनसे किसी भी तरह का किराया नहीं लेने, रेलवे का किराया दो राज्य सरकारों के बीच शेयर करने का आदेश दिया था।
इसी तरह मजदूर जिस भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में फंसे हैं, वहां की सरकार द्वारा खाने-पीने की व्यवस्था करने, मजदूरों को उन्हें भेजने के लिए बस और रेल में चढ़ने के समय की भी जानकारी देने का आदेश दिया था।
प्रवासी मजदूर
91 लाख मजदूर पहुंच चुके हैं अपने घर
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि अभी तक 91 लाख मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है, जिनमें से लगभग 80 फीसदी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं।
केंद्र ने कहा कि राज्यों के आपसी सहयोग के कारण लगभग 40 लाख मजदूर सड़क मार्ग से अपने घर तक पहुंचाए गए हैं।
बता दें कि लॉकडाउन में हुए विभिन्न हादसों में 150 मजदूरों की मौत भी हो चुकी है।