
मणिपुर हिंसा: केंद्र सरकार ने CBI को सौंपी जांच, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट में मणिपुर में 2 महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के मामले की सुनवाई टल गई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अनुपस्थिति के कारण आज सुनवाई नहीं होगी।
इससे पहले केंद्र की ओर से कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया, जिसमें बताया गया है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई है।
20 जुलाई को कोर्ट ने वायरल वीडियो का स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा था।
हलफनामा
केंद्र सरकार ने हलफनामे में क्या कहा?
गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्रालय के सचिव अजय कुमार भल्ला ने मणिपुर के वायरल वीडियो के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है।
इसमें सरकार ने घटना की समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी करने के लिए कोर्ट से इस मामले को मणिपुर से बाहर ट्रांसफर करने का आग्रह किया है।
सरकार ने कोर्ट को बताया है कि मामले में अब तक 7 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
हलफनामा
सरकार ने कहा- महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति 'जोरी टॉलरेंस'
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कोर्ट से कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध खासकर मणिपुर जैसे जघन्य अपराधों के प्रति उसकी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और इस मामले में आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी, ताकि पूरे देश में इसका संदेश जाए।
केंद्र ने कहा कि मणिपुर सरकार ने 26 मई को जांच को CBI को स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी और गृह मंत्रालय ने 27 जुलाई को सिफारिश को मंजूरी दे दी है।
फास्ट ट्रैक
सरकार का फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने का अनुरोध
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मामले से संबंधित मुकदमे को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का आदेश पारित करने का अनुरोध किया है, ताकि CBI द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने की तारीख के 6 महीने के भीतर कार्रवाई हो सके।
हलफनामे में कहा गया है कि किसी भी राज्य से बाहर मुकदमे को ट्रांसफर करने का अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट के पास है और सरकार कोर्ट से मामले में ऐसा आदेश पारित करने का अनुरोध करती है।
पुनर्वास
केंद्र ने राज्य सरकार के पुनर्वास कार्यों के बारे में भी बताया
केंद्र ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को मणिपुर हिंसा के पीड़ितों के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे पुनर्वास उपायों की भी जानकारी दी है। इसमें बताया गया है कि मणिपुर सरकार ने विभिन्न राहत शिविरों में मानसिक जांच के लिए जिला मनोवैज्ञानिक सहायता टीमों को तैनात किया है।
साथ ही चुराचांदपुर के जिला अस्पताल से एक वरिष्ठ मनोचिकित्सक, एक मनोरोग विशेषज्ञ और एक मनोवैज्ञानिक की महिला टीम को पीड़ितों की सहायता के लिए तैनात किया गया है।
सुरक्षा
केंद्र ने कोर्ट को सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जानकारी दी
केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि 3 मई को हिंसा भड़कने के बाद से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की अतिरिक्त कंपनियों को मणिपुर में तैनात किया गया है और वर्तमान में मणिपुर में स्थानीय पुलिस के अलावा CAPF की 124 अतिरिक्त कंपनियां और असम राइफल्स की 185 टुकड़ियां तैनात हैं।
इसके अलावा एकीकृत कमान में सभी सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन का प्रतिनिधित्व शामिल है और यहां सुरक्षा सलाहकार भी तैनात किए गए हैं।