
दिसंबर तक उपलब्ध हो सकता है कोरोना के इलाज के लिए पहला स्वदेशी एंटीबॉडी कॉकटेल
क्या है खबर?
महाराष्ट्र के कोल्हापुर के पास स्थित आईसेरा (iSera) बायोलॉजिकल कोरोना वायरस के इलाज के लिए भारत की पहली स्वदेशी दवा तैयार कर रही है।
शुरुआती अध्ययनों में सामने आया है कि यह दवा 72-90 घंटों के बीच कोरोना के हल्के और मध्यम लक्षण वाले मरीजों को ठीक कर सकती है। अभी इस एंटीबॉडी कॉकटेल के इंसानी ट्रायल का पहला चरण चल रहा है, जो इस महीने के अंत तक पूरा हो जाएगा।
दिसंबर तक यह बाजार में आ सकता है।
संभावित दवा
हल्के और मध्यम लक्षणों के लिए तैयार कर रही एंटीबॉडी कॉकटेल
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, चार साल पुरानी कंपनी आईसेरा बॉयोलॉजिकल सीरम इंस्टीट्यूट की मदद से कोविड एंटीबॉडीज वाला एक कॉकटेल बना रही है। संक्रमण के हल्के और मध्यम लक्षणों वाले मरीजों को यह कॉकटेल दिया जाता है, जो संक्रमण को आगे फैलने और शरीर में पहले से मौजूद वायरस को खत्म करने में मदद करता है।
मुख्य तौर पर यह कंपनी सांप काटने पर, रेबीज और डिप्थीरिया के समय काम आने वाले एंटीसीरम उत्पाद बनाती है।
जानकारी
कैसे तैयार किया जा रहा है कॉकटेल?
इस कॉकटेल में कोरोना वायरस को निष्क्रिय करने वालीं एंटीबॉडीज डाली गई हैं। घोड़ों को कोरोना वायरस के विशेष एंटीजन वाला इंजेक्शन लगाकर ये एंटीबॉडीज तैयार की जाती हैं। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने सही एंटीजन चुनने में आईसेरा की मदद की है।
कंपनी के निदेशक (नए उत्पाद) नंदकुमार कदम ने कहा कि घोड़ों को इसलिए चुना गया है कि क्योंकि वे बड़े जानवर होते हैं इसलिए उनमें ज्यादा एंटीबॉडीज बनती हैं।
बयान
वैक्सीन लगाने जैसी है प्रक्रिया- कदम
कदम ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया वैक्सीन देने के समान ही है। घोड़ों को विशेष एंटीजन लगाए जाते हैं ताकि उनमें एंटीबॉडीज विकसित हो सके। ये बिल्कुल वैसी ही एंटीबॉडीज होती हैं, जैसी कोरोना संक्रमण से लड़ाई के दौरान इंसानी शरीर में बनती हैं।
दावा
सभी वेरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी होगा कॉकटेल- कदम
कोरोना संक्रमित व्यक्ति को एंटीबॉडीज देकर संक्रमण के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार करने का तरीका लंबे समय से चला आ रहा है। आईसेरा की संभावित दवा में केवल वहीं एंटीबॉडीज हैं, जो कोरोना को निष्क्रिय करने के लिए जरूरी होती हैं। इसलिए इसका असर ज्यादा होता है।
कदम ने बताया कि यह कॉकटेल वायरस को निष्क्रिय तो करता ही है, साथ ही सभी मौजूदा और भविष्य में आने वाले वेरिएंट के खिलाफ भी प्रभावी होगा।
जानकारी
दूसरे कॉकटेल की तुलना में कम होगी कीमत
कदम ने कहा कि यह पहले से मौजूद एंटीबॉडी कॉकटेल की तुलना में काफी सस्ता होगा और इसकी कीमत कुछ हजार रुपये हो सकती है। कंपनी सितंबर और अक्टूबर में इसके दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल पूरा कर लेगी।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञ इस दवा को लेकर कितने आश्वस्त हैं?
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एनके गांगुली ने बताया कि यह भरोसेमंद दवा लग रही है। इसके इंसानी ट्रायल के नतीजों का इंतजार करना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर यह प्रभावी होती है तो यह भारत जैसे देश के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फिलहाल मौजूद कई अंतरराष्ट्रीय उत्पादों की तुलना में बेहद किफायती भी है।
कंपनी को उम्मीद है कि साल के अंत तक यह बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
जानकारी
भारत में फिलहाल दिया जा रहा यह एंटीबॉडी कॉकटेल
भारत ने मई में स्विट्जरलैंड स्थित फार्मा कंपनी रॉश (Roche) के एंटीबॉडी कॉकटेल को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी थी।
इस दवा में कासिरिविमैब और इमडेविमैब का कॉकटेल होता है। ये दोनों मोनोक्लॉनल एंटीबॉडीज या लैब में बनाए हुए प्रोटीन होते हैं, जो इंसान के इम्युन सिस्टम की नकल करते हुए वायरस आदि से लड़ने के लिए तैयार किए जाते हैं।
जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना संक्रमित हुए थे, तब उन्हें यह कॉकटेल दिया गया था।