
अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी का दावा, चीन की वुहान लैब से ही लीक हुआ था कोरोना वायरस
क्या है खबर?
पूरी दुनिया में तबाही मचाने वाले खतरनाक कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर रहस्य बना हुआ है।
अब अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन की वुहाल स्थित लैब में ही हुई थी।
इस रिपोर्ट में इस दावे को भी खारिज किया गया है कि वायरस की उत्पत्ति मीट बाजार से हुई थी। रिपोर्ट में वायरस की उत्पत्ति को लेकर पुख्ता सुबूत होने की भी बात कही गई है।
शुरुआत
चीन के वुहान मे सामने आया था कोरोना संक्रमण का पहला मामला
कोरोना संक्रमण का पहला मामला 2019 के आखिरी दिनों में चीन के वुहान शहर में सामने आया था। उसके बाद यह धीरे-धीरे दुनिया के सभी देशों में पहुंच गया और इसने जमकर तबाही मचाई।
यही कारण है कि वर्तमान में दुनियाभर में 19.82 करोड़ लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं और इनमें से 42.23 लाख लोगों की मौत हो चुकी है।
दुनियाभर में अमेरिका, भारत, ब्राजील, फ्रांस, टर्की, रूस, यूनाइटेड किंगडम और इटली सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं।
दावा
सितंबर 2019 में लीक हुआ था वायरस- रिपोर्ट
TOI के अनुसार, हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के शीर्ष रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइक मैककॉल ने पैनल ने सोमवार को रिपोर्ट जारी कर दावा किया कि कोरोना महामारी को जन्म देने वाले कोरोना वायरस की उत्पत्ति चीन की वुहान लैब में हुई थी।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वायरस 12 सितंबर, 2019 से कुछ समय पहले वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (WIV) से लीक हो गया था। हालांकि, दुनिया ने इस बीमारी पर कई महीनों बाद गौर किया था।
खारिज
वुहान के मीट बाजार से नहीं हुई वायरस की उत्पत्ति
रिपोर्ट में कहा गया है, 'हम मानते हैं कि वुहान मीट बाजार को स्रोत के रूप में पूरी तरह खारिज करने का समय आ गया है। सबूत इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि वायरस लैब से लीक हुआ था। ऐसे में कोरोना वायरस के उत्पत्ति की द्विदलीय जांच किया जाना बहुत अधिक आवश्यक है।'
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वायरस लीक होने के तथ्य अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भी हाथ नहीं लग पाए हैं।
तैयार
कोरोना वायरस को तैयार कर रहे थे चीनी वैज्ञानिक- रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि जुलाई 2019 में वेस्ट ट्रीटमेंट सिस्टम के लिए WIV ने 1.5 मिलियन डॉलर की मांग की गई थी। उसे अमेरिका और चीनी सरकार दोनों से भारी फंडिंग मिल रही थी।
इसी लैब में चीनी वैज्ञानिक इंसानों को संक्रमित करने के लिए कोरोना वायरस को बदलने के लिए काम कर रहे थे, लेकिन वहां के सुरक्षा प्रोटोकॉल कमजोर होने के कारण यह वायरस लीक हो गया था। उसके बाद वायरस पूरी दुनिया में फैल गया।
जांच
अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने जांच एजेंंसियों को सौंपी जिम्मेदारी
बता दें कि इसके पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन को कटघरे में खड़ा किया था। इसके बाद अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ष्ट्रपति जो बाइडन भी ट्रंप के स्टैंड पर कायम रहे।
उन्होंने गत 27 मई को खुफिया एजेंसियों से वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के अपने प्रयासों को और अधिक तेज करने तथा 90 दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। हालांकि, एजेंसियों ने अभी कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
प्रतिक्रिया
अमेरिका के कदम से खफा हो गया था चीन
अमेरिकी राष्ट्रपति के जांच तेज करने के आदेश देने के बाद चीन बौखला गया था।
उस दौरान चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा था कि हो सकता है वायरस अमेरिका से फैला हो और इसके लिए अमेरिका को भी अपनी प्रयोगशालाओं को जांच के लिए खोलना चाहिए।
उन्होंने कहा चीन ने मामले की जांच में WHO की पूरी मदद की और WHO की टीम 14 जनवरी से 10 फरवरी तक वुहान में गहन जांच कर चुकी है।