
#NewsBytesExplainer: अनुच्छेद 370 हटने के 4 साल पूरे, अब कैसी है जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के 4 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
केंद्र सरकार के मुताबिक, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा वातावरण के साथ-साथ बुनियादी ढांचे में भी काफी सुधार हुआ है।
आइए जानते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद से जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति में किस तरह का बदलाव देखने को मिला है।
घटना
पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं काफी कम
कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों की भारी मौजूदगी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की गई कठोर कार्रवाई के कारण पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग खत्म हो गई हैं।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2021 में जनवरी-जुलाई की अवधि के दौरान घाटी में पत्थरबाजी की 76 घटनाएं हुईं, जो 2019 और 2020 में इस अवधि के दौरान दर्ज की गई 618 और 222 घटनाओं से काफी कम हैं।
इसके साथ आतंकवाद की घटनाओं में भी काफी कमी देखी गई है।
हत्या
नागरिकों की लक्षित हत्याएं में हुई बढ़ोतरी
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीरी हिंदुओं और गैर-कश्मीरियों की लक्षित हत्याओं में इजाफा हुआ है, जो सुरक्षाबलों के लिए चिंता का विषय हैं।
5 अगस्त, 2019 के बाद से घाटी में मारे गए सभी नागरिकों में से 50 प्रतिशत से अधिक नागरिक पिछले आठ महीनों के दौरान मारे गए हैं।
आतंकवादियों ने आमतौर पर शांत माने जाने वाले जम्मू क्षेत्र में भी हिंदू बहुल इलाकों पर हमले की कई कोशिशें की हैं।
कार्रवाई
आतंकवादी घटनाओं में 32 प्रतिशत की गिरावट
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, आतंकवादी संगठनों की मदद करने वाले कार्यकार्ताओं की गिरफ्तारियों में भी बढ़ोतरी हुई है। जहां एक तरफ 2019 के जनवरी और जुलाई के बीच 82 लोग गिरफ्तार हुए थे, वहीं 2022 में इसी अवधि दौरान यह संख्या बढ़कर 178 हो गई।
केंद्र सरकार के मुताबिक, अगस्त, 2019 और जून, 2022 के बीच आतंकवादी घटनाओं में 32 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
आंकड़ा
सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम लोग हुए घायल
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 2019 में जनवरी-जुलाई की अवधि में सुरक्षाबलों द्वारा की गई पैलेट गन और लाठीचार्ज की कार्रवाई के कारण 339 नागरिक घायल हो गए थे, जबकि 2022 में इस अवधि के दौरान यह संख्या गिरकर 25 रह गई।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश में 2022 में कानून-व्यवस्था को लेकर केवल 20 घटनाएं देखने को मिली हैं।
जम्मू-कश्मीर में किसी मुठभेड़ के विरोध में बंद या हड़ताल देखने को भी नहीं मिली है।
हमले
ग्रेनेड हमले और IED धमाकों में भी हुई कमी
अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले घाटी में करीब 162 ग्रेनेड हमले हुए थे। हालांकि, अब यह संख्या करीब 15 प्रतिशत घटकर 138 हो गई है, जो सार्वजनिक सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव का संकेत देती है।
इसके अलावा कश्मीर घाटी में IED धमाकों की संख्या में कमी देखने को मिली है, जो खुफिया एजेंसियों द्वारा जानकारी एकत्र करने और आतंकवाद से निपटने के लिए बेहतर दृष्टिकोण की तरफ इशारा करती है।
कार्रवाई
आतंकवादी समूहों की भर्ती में गिरावट
भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अन्य सुरक्षाबलों ने आतंकवादी समूहों में भर्ती पर नकेल कस दी है। इसके साथ आतंकवादियों और संदिग्धों की गिरफ्तारी में बढ़ोतरी हुई है।
इसके साथ ही हथियार छीने जाने की घटनाओं में 60 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
इन घटनाओं में कमी सुरक्षाबलों के मनोबल को बढ़ाने वाली है क्योंकि इससे पता चलता है कि घाटी में आतंकवादी संगठन बैकफुट पर हैं।
निवेश
जम्मू-कश्मीर को मिले हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षित वातावरण से आश्वस्त होकर केंद्र शासित प्रदेश में करीब 25,000 करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाएं क्रियान्वित हो रही हैं, जबकि 80,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं।
आजादी के बाद से जम्मू-कश्मीर को केवल 14,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश प्राप्त हुआ था।
हालांकि, अनुच्छेद 370 के निरस्त होने और नई औद्योगिक विकास योजना की शुरुआत के बाद केंद्र शासित प्रदेश को 81,122 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।