
#NewsByetsExplainer: पंजाब में BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ने से संबंधित विवाद क्या है?
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट पंजाब में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र (क्षेत्राधिकार) के विस्तार से संबंधित विवाद पर सुनवाई को तैयार हो गया है।
22 जनवरी को कोर्ट ने कहा कि BSF का अधिकार क्षेत्र तय करते समय सभी सीमावर्ती इलाकों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।
अब कोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर अप्रैल के तीसरे हफ्ते में सुनवाई तय की है।
आइए जानते हैं कि क्यों पंजाब सरकार BSF के क्षेत्राधिकार विस्तार के खिलाफ है।
मामला
क्या है BSF के क्षेत्राधिकार विस्तार का मामला?
11 अक्टूबर, 2021 को गृह मंत्रालय ने पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में BSF के अधिकार में आने वाले क्षेत्र का विस्तार करते हुए एक अधिसूचना जारी की थी।
इसमें BSF को सीमा के 50 किलोमीटर के अंदर तक क्षेत्राधिकार दिया गया है।
इसी आदेश को दिसंबर, 2021 में पंजाब सरकार ने कोर्ट में चुनौती दी थी।
मंत्रालय की अधिसूचना से पहले BSF के पास पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में सीमा के 15 किलोमीटर के भीतर तक क्षेत्राधिकार था।
कानून
अधिकार क्षेत्र बढ़ने का क्या मतलब?
केंद्र सरकार ने BSF का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने के लिए BSF अधिनियम, 1968 की धारा 139(1) का उपयोग किया। इस अधिनियम में BSF को केंद्रीय कानूनों की विशेष शक्तियां दी गई हैं।
इसके तहत BSF अपने क्षेत्राधिकार में पासपोर्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा, तस्करी और ड्रग्स आदि से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकता है।
इस विशेष प्रावधान को बनाने का उद्देश्य राज्य पुलिस के सहयोग से सीमावर्ती क्षेत्रों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना था।
कारण
केंद्र ने क्यों बढ़ाया BSF का अधिकार क्षेत्र?
7 दिसंबर, 2021 को केंद्र ने स्पष्ट किया था कि इन राज्यों में BSF के क्षेत्राधिकार का विस्तार ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों के बढ़ते उपयोग के कारण किया गया है। इससे सीमा पर निगरानी और तस्करी रोकने में मदद मिलेगी।
सरकार का तर्क है कि पाकिस्तान से लगी सीमा पर नकली मुद्रा, ड्रग्स, हथियारों और मवेशियों की तस्करी जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं और BSF का क्षेत्राधिकार न होने के कारण अक्सर ऐसे अपराध छिपे रहते हैं।
पंजाब सरकार
पंजाब सरकार क्यों विरोध कर रही?
पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार ने BSF के क्षेत्राधिकार के विस्तार की अधिसूचना किसी भी संबंधित राज्य से परामर्श किए बिना जारी की है।
उसके अनुसार, इस विस्तार से पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मामलों पर कानून बनाने की राज्य की विशेष शक्तियों से समझौता होगा और उसकी संवैधानिक शक्तियों का हनन होगा।
बता दें, संविधान की राज्य सूची के तहत कानून व्यवस्था का मुद्दा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
कोर्ट में सुनवाई
दोनों पक्षों की ओर से कोर्ट में क्या कहा गया?
केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि गुजरात में BSF का अधिकार क्षेत्र 80 किलोमीटर है, राजस्थान में ये 50 किलोमीटर है और कुछ राज्यों में ये पूरी तरह केंद्र के पास है।
इसके जवाब में पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि BSF का अधिकार क्षेत्र आबादी और इलाके जैसे कई कारणों पर निर्भर करता है और पंजाब में शहर और कस्बे भी 50 किलोमीटर के दायरे में आ जाएंगे।
अन्य राज्य
क्या अन्य राज्यों ने जताई है आपत्ति?
पंजाब के अलावा किसी अन्य राज्य ने BSF के क्षेत्राधिकार विस्तार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की। हालांकि, अधिसूचना जारी होने के बाद पश्चिम बंगाल ने इसका विरोध करते हुए विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र और राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने का अधिकार प्राप्त है। इसका मतलब है कि अब सुप्रीम कोर्ट ही मामले में अंतिम निर्णय ले सकता है।
बेंच करेगी सुनवाई
कोर्ट किन मुद्दों पर करेगी विचार?
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी।
कोर्ट इस बात पर विचार करेगी कि क्या धारा 131 की शक्ति का केंद्र सरकार ने मनमाना प्रयोग किया है और पंजाब सरकार की शक्तियों में असंवैधानिक हस्तक्षेप हुआ है।
इसके अलावा कोर्ट ये भी देखगी कि क्या अधिसूचना पंजाब पुलिस की शक्तियों में हस्तक्षेप कर रही है और इससे संविधान के तहत राज्यों को प्रदत्त शक्तियों का अतिक्रमण तो नहीं हो रहा है।