
#NewsBytesExplainer: क्यों प्रतिष्ठित है ऑस्कर की लाइब्रेरी, यहां क्या-क्या है मौजूद?
क्या है खबर?
कुछ दिन पहले खबर आई थी कि मनोज बाजपेयी की फिल्म 'जोरम' के स्क्रीनप्ले को अकैडमी की प्रतिष्ठित लाइब्रेरी (ऑस्कर की लाइब्रेरी) में रखा जाएगा।
निर्माताओं के साथ ही हिंदी सिनेमा के लिए भी यह गर्व की बात है। यह खबर आते ही हर कोई 'जोरम' की टीम को बधाई देने लगा।
आपको बताते हैं कहां है ऑस्कर की लाइब्रेरी, क्या है इसका इतिहास और महत्व और यहां पर क्या कुछ मौजूद है।
पहचान
'मार्गरेट हेरिक लाइब्रेरी' है औपचारिक नाम
इस लाइब्रेरी को 'लाइब्रेरी ऑफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स एंड साइंसेज' के नाम से भी जाना जाता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे ऑस्कर की लाइब्रेरी कहते हैं।
इसका औपचारिक नाम 'मार्गरेट हेरिक लाइब्रेरी' है। हेरिक यहां की पहली लाइब्रेरियन थीं। उनके सम्मान में 1971 में इस लाइब्रेरी का नाम उनके नाम पर रखा गया था।
कैलिफोर्निया के बेवरली हिल्स स्थित इस लाइब्रेरी का संचालन अकैडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स करती है।
इतिहास
क्यों की गई लाइब्रेरी की शुरुआत?
ऑस्कर की लाइब्रेरी की स्थापना 1928 में हुई थी। यहां पर फिल्म से जुड़ी पत्रिकाओं, अखबारों और अन्य सामग्रियों को सहेजा जाता था।
फिल्म विशेषज्ञ शुरू से ही इस बात के लिए सजग थे कि फिल्मों के इतिहास को सहेजना जरूरी है और इस पर काम होना चाहिए।
पहले यह लाइब्रेरी रूजवेल्ट होटल में चलती थी। बाद में इसे अकैडमी के हेडक्वॉटर में शुरू किया गया। यहां के 2 मंजिलों में यह लाइब्रेरी संचालित होती थी।
मौजूदा इमारत
पुरानी इमारत में शुरू हुआ नया दौर
धीमे-धीमे इस लाइब्रेरी की सामग्री बढ़ने लगी। यहां आने वाले पाठकों की संख्या भी बढ़ने लगी।
लाइब्रेरी को फिल्म स्टूडियो से सामग्री मिलने लगी। कुछ फिल्म निर्माता और निर्देशक निजी तौर पर अपना कलेक्शन यहां देने लगे। ऐसे में इसके लिए जगह छोटी पड़ने लगी।
इसके बाद बेवरली हिल्स के बंद पड़े वाटर प्लांट को नई लाइब्रेरी के लिए चुना गया। यह इमारत भूकंप से टूटी और जली हुई थी। अकैडमी ने इसे नया रूप दिया।
सामग्री
इस लाइब्रेरी में आपको क्या मिलेगा?
कहा जाता है कि फिल्म इतिहास से जुड़े किसी भी विषय पर काम करने के लिए इस लाइब्रेरी से बेहतर कोई जगह नहीं है। फिल्म जगत से जुड़े जिस चीज की भी कोई कल्पना कर सकता है, वह यहां मौजूद है।
यहां जरूरी रसीद, तस्वीरें, कार्टून, फिल्मों के स्क्रीनप्ले, पोस्टर, विज्ञापन समेत अन्य चीजें मौजूद हैं।
इस लाइब्रेरी में करीब 30,000 किताबें और 4,000 से ज्यादा पत्रिकाएं मौजूद हैं।
छात्रों से लेकर इतिहासकार तक इस लाइब्रेरी का इस्तेमाल करते हैं।
संचालन
पाइरेसी रोकने के लिए होती है निगरानी
यह लाइब्रेरी लोगों के पढ़ने के लिए मुफ्त में सुविधा देती है।
इसका मकसद फिल्म के इतिहास को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी में इसका प्रसार करना भी है।
यहां मौजूद सामग्री सिर्फ यहीं बैठकर पढ़ने के लिए उपलब्ध होती हैं। इसकी सख्ती से निगरानी की जाती है कि कोई इसे चुरा या बांट न सके। लोग लाइब्रेरी में इन सामग्रियों को डिजिटल तौर पर भी पढ़ सकते हैं।
भारतीय फिल्में
इन भारतीय फिल्मों को मिली जगह
'जोरम' के अलावा पिछले साल लाइब्रेरी ने विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द वैक्सीन वॉर' का सक्रीनप्ले भी मांगा था।
पिछले साल आई नंदिता दास की फिल्म 'ज्विगाटो' के स्क्रीनप्ले को भी यहां जगह मिली है।
शाहिद कपूर की फिल्म 'आर राजकुमार', करण जौहर की 'कभी अलविदा न कहना', फरहान अख्तर की 'रॉक ऑन' जैसी फिल्में भी इस लाइब्रेरी का हिस्सा हैं।
'गुजारिश', 'देवदास', 'चक दे इंडिया' भी यहां के संग्रह में शुमार हैं।