
नागरिकता संशोधन कानून: सरकार ने नियम बनाने के लिए 6 महीने का समय और मांगा
क्या है खबर?
केंद्र सरकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA), 2019 के प्रभावी होने के तीन साल बाद भी इसके लिए आवश्यक नियमावली तैयार नहीं कर पाई है।
ऐसे में अब केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने लोकसभा और राज्यसभा की अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों से नियमावली बनाने के लिए छह महीने का समय और मांगा है। इसको समितियों ने मंजूरी भी दे दी है।
बता दें कि नियामवली के लिए MHA की ओर से मांगा गया यह सातवां विस्तार है।
अनुरोध
MHA ने समितियों से किया था अनुरोध
द हिंदू के अनुसार, MHA ने लोकसभा और राज्यसभा की अधीनस्थ विधान पर संसदीय समितियों से CAA के नियम बनाने के लिए छह महीने और समय देने की मांग की थी।
MHA ने कहा है कि अधिनियम के नियम बनाए जा रहे हैं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसमें कुछ देरी हुई है।
इस पर राज्यसभा समिति ने 30 जून तक विस्तार देने के मंत्रालय के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, लेकिन लोकसभा समिति के जवाब का इंतजार है।
पुनरावृत्ति
अक्टूबर, 2022 में मिला था पिछला विस्तार
इससे पहले CAA के नियम बनाने का समय 9 अक्टूबर, 2022 को खत्म हो गया था। उस दौरान भी MHA ने दोनों समितियों से समय बढ़ाने की मांग की थी।
इस पर राज्यसभा की समिति ने उसे नियम बनाने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था और लोकसभा की समिति ने 9 जनवरी, 2023 तक का समय दिया था।
उससे पहले भी MHA ने संसदीय समितियों से छह बार नियमों के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया था।
परिणाम
नियमों के बिना पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा है CAA
संसदीय कार्य संबंधी नियमावली के मुताबिक, राष्ट्रपति की सहमति के छह महीने के अंदर ही किसी भी कानून के लिए नियम तैयार कर लिए जाने चाहिए।
ऐसा न होने पर सरकार को लोकसभा और राज्यसभा के अंतर्गत आने वाली संसदीय समितियों से विस्तार का अनुरोध करना होता है।
नियमावली के अनुसार, कोई भी कानून बिना नियमों के प्रभावी नहीं हो सकता है। ऐसे में CAA भी राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियमों के अभाव में अटका हुआ है।
पृष्ठभूमि
क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
सरकार ने दिसंबर 2019 में CAA को संसद से पारित करा लिया था। इस कानून में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है।
31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले इन समुदाय के लोगों को तुरंत नागरिकता दे दी जाएगी, वहीं उसके बाद या आगे आने वाले लोगों को छह साल भारत में रहने के बाद नागरिकता मिल सकेगी।
विरोध
देश में CAA को लेकर हुआ है भारी विरोध
इस कानून में मुस्लिम समुदाय का जिक्र नहीं होने को लेकर इस समुदाय के लोगों का मानना है कि इस कानून उनके खिलाफ दुरूपयोग किया जा सकता है।
इसको लेकर 15 दिसंबर, 2019 से शाहीन बाग पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, जो करीब 100 दिनों तक चला था। इसमें मुस्लिम महिलाओं सहित बच्चों ने भागीदारी निभाई थी।
इसको लेकर दिल्ली में भी हिंसा हुई थी, जिसमें करीब 54 लोगों की मौत हो गई थी।