
केंद्र ने दी थी बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई को मंजूरी- गुजरात सरकार
क्या है खबर?
गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों को केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद रिहा किया, जबकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इनकी रिहाई का विरोध किया था।
दरअसल, गुजरात सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया है कि इन दोषियों को अच्छे व्यवहार के चलते रिहाई दी गई है और केंद्र ने दो हफ्तों के भीतर इनकी रिहाई को मंजूरी दी थी।
पृष्ठभूमि
क्या है दोषियों की रिहाई का मामला?
2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया गया था।
उस वक्त बिलकिस पांच महीने की गर्भवती थीं। दंगाइयों ने उनकी तीन वर्षीय बेटी समेत परिवार के सात लोगों को मौत की नींद सुला दिया था।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इस मामले में उम्रकैद की सजा पाए 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने माफी नीति के तहत रिहा कर दिया। सरकार के इस कदम की कई तबकों में आलोचना हो रही है
सवाल
रिहाई पर उठ रहे सवाल
ऐसे मामलों में कैदियों की रिहाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी की जरूरत होती है। हालांकि, उस समय गुजरात सरकार ने इस मंजूरी को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया था, जिसके बाद इस पर कई सवाल उठने लगे।
कई आलोचकों ने पूछा था कि क्या केंद्र ने इसकी मंजूरी दी है क्योंकि राज्यों और केंद्र के मौजूदा कानूनों के तहत रेप और उम्रकैद के दोषियों की वक्त से पहले रिहाई पर कई पाबंदियां लगी हुई हैं।
जानकारी
पाबंदी के बावजूद कैसे रिहा हुए दोषी?
गुजरात सरकार ने इन दोषियों को 1992 की माफी नीति के तहत रिहा किया है और उस नीति में उपरोक्त प्रावधान नहीं है। इसी के आधार पर राज्य सरकार ने एक समिति का गठन किया, जिसने इन दोषियों की रिहाई की सिफारिश की थी।
हलफनामा
गुजरात सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में गुजरात ने कहा है कि केंद्र ने 11 जुलाई को भेजे एक पत्र में दोषियों की रिहाई को हरी झंडी दिखाई थी।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट इन दिनों दोषियों की रिहाई के खिलाफ दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इनमें से एक याचिका में कहा गया है कि चूंकि इस मामले की जांच CBI कर रही थी, इसलिए केंद्र की इजाजत के बिना गुजरात सरकार दोषियों को कोई रियायत नहीं दे सकती।
जानकारी
कोर्ट ने मांगा है पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से दोषियों की रिहाई सहित बिलकिस बानो मामले की पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड जमा करने का आदेश दिया था।
जानकारी
दोषियों की रिहाई को रद्द करने की मांग कर चुकी हैं बिलकिस
बिलकिस बानो ने दोषियों की रिहाई का फैसला पलटने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस रिहाई ने न्याय में उनके विश्वास को हिला दिया है।
बिलकिस का कहना है कि दोषियों की रिहाई के बाद उन्होंने इस 20 साल पुरानी घटना के सदमे को एक बार फिर से महसूस किया।
उन्होंने कहा, "आज मैं केवल यह पूछ सकती हूं कि किसी औरत की न्याय की लड़ाई ऐसे कैसे खत्म हो सकती है?"