
पाकिस्तान के पत्र के बाद चीन ने की UNSC में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की मांग
क्या है खबर?
भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के बाद चीन ने संयुक्त राष्ट्र संयुक्त परिषद (UNSC) में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है।
इससे पहले पाकिस्तान ने इस महीने के लिए UNSC के अध्यक्ष देश पोलैंड को पत्र लिखा था।
अधिकारी ने बताया कि चीन ने हाल ही में यह मांग की है। अभी तक इसके लिए तारीख निश्चित नहीं हुई है।
चीन की मांग
पाक के पत्र के बाद आई चीन की यह मांग
समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए अधिकारी ने बताया, "चीन ने सुरक्षा परिषद के एजेंटा आइटम 'इंडिया पाकिस्तान क्वेश्चन' पर क्लोज्ड कंस्लटेशन की मांग की है। यह मांग पाकिस्तान द्वारा पोलैंड को लिखे पत्र के संदर्भ में है।"
उन्होंने कहा कि अभी तक बैठक की तारीख और समय को लेकर फैसला नहीं हुआ है। यह बैठक अगले शुक्रवार को हो सकती है।
बता दें, पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने UNSC से कश्मीर मामले पर बैठक करने को कहा था।
पाकिस्तान का अनुरोध
पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने UNSC को लिखा था पत्र
पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर मुद्दे पर आपातकाल बैठक बुलाने UNSC के प्रमुख को एक औपचारिक पत्र भेजा था।
कुरैशी ने कहा था कि यह पत्र UNSC के सभी सदस्य देशों के साथ भी शेयर किया जाएगा।
उन्होने कहा था, "मैंने इस पत्र में अनुरोध किया है कि UNSC एक आपात बैठक बुलाए और उसमें भारत द्वारा की गई कार्रवाई पर चर्चा करे, जिसे हम अवैध समझते हैं और जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ है।"
जानकारी
पोलैड ने कही थी द्विपक्षीय समाधान की बात
पाकिस्तान की इन कोशिशों को उस वक्त करारा झटका लगा था, जब पोलैंड ने उसके अनुरोध को ठुकरा दिया था। पोलैंड ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि यह द्विपक्षीय मामला है और दोनों देशों को मिलकर इसका हल निकालना चाहिए।
भारत का समर्थन
भारत के कदम का समर्थन कर चुका है रूस
पोलैंड से पहले UNSC के स्थायी देश रूस ने इस मामले में भारत का साथ दिया था।
रूस ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के फैसले को भारत के संविधान के दायरे के भीतर लिया गया कदम बताया था।
पोलैंड के बयान के बाद पाकिस्तान द्वारा UNSC में कश्मीर मुद्दा उठाने पर कुछ समय के लिए रोक लग गई है।
इस महीने UNSC की अध्यक्षता पोलैंड के पास है। अगले महीने यह दूसरे सदस्य देश के पास होगी।
भारत का पक्ष
भारत ने बताया था आंतरिक मामला
भारत द्वारा उठाए गए कदमों के बाद विदेश सचिव ने विदेशी उच्चायुक्तों को इसकी जानकारी दी थी।
वहीं एस जयशंकर ने पोलैंड के विदेश मंत्री से बात कर इसे भारत का आंतरिक मामला बताया था।
भारत में पोलैंड के राजदूत ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि पोलैंड को उम्मीद है कि दोनों देश एक फायदेमंद समाधान के लिए काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह इस मामले में बातचीत के हिमायती हैं।
जानकारी
कश्मीर पर तीसरे पक्ष की दखल नहीं चाहता भारत
पोलैंड का यह बयान भारत के उस रूख से मेल खाता है, जिसमें भारत ने कश्मीर को हमेशा द्विपक्षीय मामला बताया है। भारत मानता है कि कश्मीर दोनों देशों के बीच का मुद्दा है और वह इस मामले में तीसरे पक्ष की दखल नहीं चाहता।