
BCCI के लोकपाल ने अजीत चंदीला के आजीवन प्रतिबंध को घटाकर 7 साल किया
क्या है खबर?
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के लोकपाल विनीत सरन ने राजस्थान रॉयल्स (RR) के पूर्व स्पिनर अजीत चंदीला पर लगे प्रतिबंध को घटाकर 7 साल कर दिया है।
चंदीला पर 2013 के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सीजन के दौरान भारत के पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत और अंकित चव्हाण के साथ स्पॉट फिक्सिंग कांड में कथित संलिप्तता के आरोप लगे थे।
इसके बाद इस मामले में BCCI ने जांच के बाद चंदीला पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था।
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श्रीसंत और अंकित पर पहले ही हट चुका है प्रतिबंध
स्पॉट फिक्सिंग कांड के सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया था।
स्पॉट फिक्सिंग के परिणामस्वरूप भारतीय क्रिकेट में एक बड़ा झटका लगा, जिसने सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने और अपने संविधान को बदलने के लिए मजबूर किया।
बोर्ड श्रीसंत और अंकित के प्रतिबंध को पहले ही हटा चुका है। श्रीसंत अपनी घरेलू टीम केरल के लिए खेलने लगे थे, जबकि चव्हाण ने मुंबई में अपनी क्लब टीम के लिए खेलना शुरू किया था।
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लोकपाल ने अपने आदेश में क्या कहा?
अपने आदेश में लोकपाल सरन ने कहा, "वर्तमान मामला IPL के क्रिकेट मैचों में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों पर आवेदक के खिलाफ दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ में दर्ज केस 09.05.2013 से उत्पन्न हुआ था।"
उन्होंने आगे कहा, "BCCI ने आवेदक को 17.05.2013 को सभी क्रिकेट गतिविधियों से निलंबित कर दिया था। आवेदक के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही के अलावा बोर्ड द्वारा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही भी शुरू की गई थी।"
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लोकपाल ने स्वीकार की चंदीला की प्रार्थना
सरन ने आगे कहा, "आवेदक का दिनांक 04.11.2019 का प्रतिनिधित्व स्वीकार किया जाता है और उसे श्रीसंत और अंकित चव्हाण के साथ समानता प्रदान करने के लिए उसकी प्रार्थना की अनुमति दी जाती है।"
उन्होंने आगे कहा, "BCCI अनुशासनात्मक समिति के 18.01.2016 के आदेश द्वारा उन पर लगाया गया आजीवन प्रतिबंध घटाकर 7 वर्ष की अवधि के लिए कम किया जाता है।"
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केरल हाई कोर्ट ने उठाए थे जांच पर सवाल
केरल हाई कोर्ट ने 2017 में स्पॉट फिक्सिंग कांड के मद्देनजर BCCI द्वारा श्रीसंत पर लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को हटा दिया गया था।
तब अपने फैसले में जज ए मुहम्मद मुस्ताक ने कहा था कि स्पॉट फिक्सिंग कांड में श्रीसंत की संलिप्तता को इंगित करने के लिए कोई आपत्तिजनक सबूत नहीं था।
तब अदालत ने यह भी कहा था कि समिति केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची है।