
सामान्य से ज्यादा तेजी से घूम रही है हमारी धरती, जानें क्या हैं इसके मायने
क्या है खबर?
हमारा ग्रह धरती अपने अक्ष पर घूमता है, जिसके चलते दिन और रात होते हैं, यह बात आपको जरूर पता होगी।
अब सामने आया है कि धरती के घूमने की रफ्तार तेज हो रही है, जो कई पहलुओं को प्रभावित कर सकती है।
29 जून, 2022 को पृथ्वी का अक्षीय घूर्णन रिकॉर्ड रेट पर पूरा हुआ, जिसके चलते दिन 1.59 मिलीसेकेंड्स छोटे हो गए हैं।
रिपोर्ट्स की मानें तो इस घूर्णन गति में बदलाव के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।
चिंता
शामिल हो सकता है एक लीप सेकेंड
मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस बात को लेकर चिंता जता चुकी हैं कि ऐसा ही रहा तो एक लीप सेकेंड शामिल हो जाएगा।
यह उस सॉफ्टवेयर को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा, जिसकी मदद से समय को एक खास ढंग से दिखाया जाता है।
बता दें, अपने अक्ष पर धरती का घूर्णन कभी-कभार धीमा या तेज होता रहता है, लेकिन अब इसमें वेव जैसा मूवमेंट देखने को मिल रहा है।
लीप सेकेंड
क्या है धरती के लीप सेकेंड का मतलब?
वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती का घूर्णन कुछ साल पहले तक धीमा हो रहा था।
इंटरनेशनल अर्थ रोटेशन एंड रिफरेंस सिस्टम्स सर्विस (IERS) की मदद से इस धीमे घूर्णन के चलते लीप सेकेंड्स ऐड किए गए थे, जो 31 दिसंबर, 2016 तक लागू थे।
आसान भाषा में समझें तो लीप सेकेंड्स की तरह ही 365 दिन का कैलेंडर बनाए रखने के लिए चार साल में एक बार फरवरी में अतिरिक्त दिन (लीप इयर में) जोड़ा जाता है।
घूर्णन
अपने अक्ष पर कितनी तेजी से घूमती है धरती?
धरती के घूमने की रफ्तार एक सी है, लेकिन किसी जगह पर मौजूदगी को लेकर अलग-अलग हो सकती है।
NASA के मुताबिक, धरती का सर्कमफ्रेंस (इक्वेटर) 40,070 किलोमीटर लंबा है।
इस दूरी को दिन के 24 घंटों से बांटा जाए, तो इक्वेटर पर स्पीड लगभग 1,670 किमी/घंटा आती है।
फाइनल स्पीड 94 करोड़ किलोमीटर को 365.25 से गुणा और रिजल्ट को 24 घंटे से बांटकर निकाली जाती है। इस तरह धरती रोज 26 लाख किलोमीटर/घंटा की रफ्तार से घूमती है।
जानकारी
इन दिनों तेजी से घूम रही है धरती
एटॉमिक क्लॉक्स ने बताया है कि धरती के घूर्णन की गति तेज हुई है। साल 2020 में सीधे साल 1960 के बाद 28 सबसे छोटे दिन हुए। 29 जून, 2022 को अब तक का सबसे तेज घूर्णन रिकॉर्ड किया गया।
वजह
तेज क्यों हो रहा है धरती का इसके अक्ष पर घूर्णन?
वैज्ञानिकों की मानें तो बड़े पहाड़ों और ग्लेशिर्स का पिघलना इसकी कई वजहों में से एक है।
जलवायु के अलावा यह बदलाव धरती की ऊपरी और निचली परतों पर भी निर्भर करता है।
धरती के गर्भ में होने वाली हलचल को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है, वहीं दूसरी थ्योरीज इसके घूर्णन अक्ष के भौगोलिक अक्ष के समांतर आने को वजह मान रही हैं।
ऐसा बड़े प्राकृतिक बदलावों, समुद्र में हलचल या भूकंप के चलते भी हो सकता है।
प्रभाव
क्या हो सकते हैं गति में बदलाव के प्रभाव?
लगातार ऐसा बदलाव होते रहने से पृथ्वी की कक्षा में मौजूद GPS सैटेलाइट्स के काम करने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि उनकी एटॉमिक क्लॉक्स धरती के बदलते घूर्णन का ध्यान नहीं रखतीं।
साथ ही नेटवर्क टाइम प्रोटोकॉल (NTP) पर पड़ने वाला प्रभाव स्मार्टफोन्स, PCs और कम्युनिकेशंस नेटवर्क्स को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा टाइम और शेड्यूलर्स से जुड़ी ऐप्लिकेशंस पर ऐसे बदलाव का बुरा असर पड़ सकता है।
जानकारी
न्यूजबाइट्स प्लस
साल 2012 में एक लीप सेकेंड ने रेडिट प्लेटफॉर्म को प्रभावित किया था। टाइम पैटर्न में हुए बदलाव के चलते इसकी वेबसाइट करीब 30 से 40 मिनट तक उपलब्ध नहीं थी और सर्वर के हाइपरऐक्टिव हो जाने के चलते उनका CPU लॉक हो गया था।