
#NewsBytesExplainer: क्या होता है पोस्टल बैलेट और इसे लेकर क्यों हो रहा है विवाद?
क्या है खबर?
लोकसभा चुनाव की मतगणना से पहले विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से कई मांगें की हैं।
इसमें एक मांग है कि 4 जून को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के वोटों की गिनती से पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाए। पार्टियों ने इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है, जिसमें कई मुद्दों पर चिंता जाहिर की गई है।
आइए जानते हैं कि पोस्टल बैलेट क्या होते हैं और इन्हें लेकर क्या विवाद है।
पोस्टल बैलेट
क्या होते हैं पोस्टल बैलेट?
पोस्टल बैलेट को डाक मतपत्र भी कहा जाता है। आसान भाषा में आप इसे डाक के जरिए मतदान कह सकते हैं।
ये मतदान का एक ऐसा तरीका है, जिसमें मतदान केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से जाने के बजाय डाक के जरिए वोट डाला जा सकता है। हालांकि, हर कोई इस सेवा का उपयोग नहीं कर सकता, केवल चुनिंदा लोग ही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसे इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम (ETPBS) भी कहा जाता है।
पात्रता
कौन डाल सकता है पोस्टल बैलेट के जरिए वोट?
दरअसल, ऐसे कई लोग होते हैं, जो मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान नहीं कर पाते हैं। इनमें सैनिक, चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी, देश के बाहर कार्यरत सरकारी अधिकारी, दिव्यांग व्यक्ति और बुजुर्ग मतदाता शामिल होते हैं।
साथ ही गुप्त लोगों को भी घर बैठे मतदान की सुविधा दी जाती है। इन्हें सर्विस वोटर या अब्सेंटी वोटर कहा जाता है।
इसके अलावा कैदियों को छोड़कर नजरबंदी में रखे गए लोग भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
तरीका
कैसे डाले जाते हैं वोट?
चुनाव आयोग यह पहले ही तय कर लेता है कि किन लोगों को और कितने लोगों को पोस्टल बैलेट देना है। इसके बाद इन्हीं लोगों को कागज पर छपा मतपत्र भेजा जाता है।
इस मतपत्र को प्राप्त करने वाला नागरिक अपने पसंदीदा प्रत्याशी को चुन कर इसे वापस चुनाव आयोग को लौटा देता है।
बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों को पोस्टल बैलेट के जरिए मतदान करने के लिए पहले पंजीयन कराना होता है।
विवाद
पोस्टल बैलेट को लेकर क्या है ताजा विवाद?
दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनावों तक पोस्टल बैलेट की गिनती पहले की जाती थी और उसके 30 मिनट बाद EVM की गिनती शुरू होती थी।
नियम ये भी था कि EVM के वोटों की गिनती से पहले पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी करनी होती थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में नियम बदल दिया। अब EVM के वोटों की गिनती पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के पहले भी शुरू हो सकती है।
नियम
चुनाव आयोग ने एक और नियम बदला
चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलेट के अनिवार्य रूप से दोबारा गिनती के नियम को भी बदल दिया है।
पहले नियम था कि अगर जीत का अंतर पोस्टल बैलेट की कुल संख्या से कम होता था तो पोस्टल बैलेट फिर से गिने जाते थे। अब केवल गिनती के दौरान अमान्य करार दिए गए पोस्टल बैलेट का फिर से सत्यापन किया जाएगा। वो भी तब, जब जीत का अंतर ऐसे मतपत्रों की संख्या से कम हो।
चिंता
विपक्ष को नए नियमों को लेकर क्या चिंता है?
विपक्षी पार्टियां आयोग के बार-बार बदलते नियमों की वजह से चिंतित है।
चुनाव आयोग को दिए ज्ञापन में विपक्ष ने बिहार का जिक्र किया है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जीत का अंतर 12,700 वोटों का था, जबकि डाक मतपत्रों की संख्या 52,000 थी।
कोरोनाकाल के बाद यह पहला विधानसभा चुनाव था। इस पर बिहार में काफी हंगामा हुआ था, क्योंकि EVM के वोटों की गिनती के बाद पोस्टल बैलेट गिने गए थे।