
#NewsBytesExplainer: कब लागू होगा महिला आरक्षण विधेयक और UPA सरकार के विधेयक से कितना अलग?
क्या है खबर?
संसद के विशेष सत्र के दूसरे और नई संसद के पहले दिन केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण विधेयक पेश किया है। इसे 'नारी शक्ति वंदन विधेयक' नाम दिया गया है।
इस विधेयक पर 20 सितंबर को चर्चा होगी और 21 सितंबर को इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक के कानून बनने के बाद लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा।
आइये इस विधेयक की खास बातें जानते हैं।
प्रावधान
विधेयक में क्या-क्या प्रावधान?
विधेयक के मुताबिक, इससे राज्य विधानसभाओं, केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।
इसी 33 प्रतिशत में से एक तिहाई सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए होंगी। यानी SC और ST महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं मिलेगा, बल्कि आरक्षण के भीतर ही आरक्षण होगा।
विधान परिषद और राज्यसभा में ये आरक्षण लागू नहीं होगा। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी आरक्षण नहीं मिलेगा।
लागू
कब से लागू होगा आरक्षण?
विधेयक में कहा गया है कि आरक्षण परिसीमन के बाद ही लागू होगा। माना जा रहा है कि अगली जनगणना के बाद ही देश में परिसीमन होगा और जनगणना 2027 में हो सकती है।
इस आधार पर देखा जाए तो लोकसभा में पहली बार 2029 के चुनावों में महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है।
अगर जनगणना और परिसीमन के बाद, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए तो वहां महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है।
संशोधन
विधेयक के जरिए कौन-कौन से संविधान संशोधन होंगे?
विधेयक के मसौदे में कुल 4 संविधान संशोधन का प्रस्ताव दिया गया है।
अनुच्छेद 239AA में संशोधन के जरिए दिल्ली विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण मिलेगा।
अनुच्छेद 330A में संशोधन के माध्यम से लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
अनुच्छेद 332A में संशोधन के माध्यम से विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा।
अनुच्छेद 334A के माध्यम से महिला आरक्षण की अवधि 15 साल होगी। हालांकि, इसे बढ़ाया जा सकता है।
बदलाव
विधेयक के कानून बनने के बाद क्या बदलेगा?
वर्तमान में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 78 है। इस विधेयक के कानून बनने के बाद लोकसभा में महिला सीटों की संख्या 181 हो जाएगी।
दिल्ली विधानसभा की 70 में से 23 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। इसी तरह बाकी राज्यों की विधानसभा में भी महिला विधायकों की संख्या बढ़ेगी।
बता दें कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें पहले से ही आरक्षित हैं।
अंतर
पुराने विधेयक से कितना अलग है वर्तमान विधेयक?
इससे पहले मनमोहन सिंह की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान भी महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था। उसमें और वर्तमान विधेयक में मुख्य अंतर जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने का है।
पिछले विधेयक में अनुच्छेद 333 और अनुच्छेद 331 में भी परिवर्तन का प्रावधान शामिल था, जिसके जरिए एंग्लो-इंडियन समुदाय के आरक्षण से जुड़े प्रावधान थे। नए विधेयक में इन दोनों अनुच्छेद में बदलाव का कोई प्रावधान नहीं है।
स्थिति
लोकसभा-विधानसभा में अभी कैसी है महिलाओं की स्थिति?
लोकसभा में वर्तमान में 78 महिला विधायक हैं, जो अब तक की सबसे ज्यादा है। ये कुल लोकसभा सदस्यों का 14.4 प्रतिशत हैं। सबसे ज्यादा महिला सांसद पश्चिम बंगाल से हैं। 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एक भी महिला सांसद नहीं है।
किसी भी राज्य की विधानसभा में 15 प्रतिशत से ज्यादा महिलाए नहीं हैं। प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा (14.44 प्रतिशत) महिला विधायक छत्तीसगढ़ से हैं। नागालैंड और मिजोरम में एक भी महिला विधायक नहीं हैं।
प्लस
न्यूजबाइट्स प्लस
महिला आरक्षण विधेयक को पहली बार 12 सितंबर, 1996 को तत्कालीन देवेगौड़ा सरकार ने संसद में पेश किया था। हालांकि, सरकार भंग होने के कारण ये पारित नहीं हो सका।
इसके बाद 1997, 1998, 1999 और 2003 में इसे 4 बार पेश किया गया, लेकिन एक बार भी पारित नहीं हो पाया।
UPA सरकार ने 2008 में इसे पेश किया और काफी मशक्कत के बाद 2010 में ये राज्यसभा से पारित हो गया, लेकिन लोकसभा में पेश नहीं हो सका।