
महाराष्ट्र का सियासी संकट: हालिया सालों में किस-किस राज्य में गिरी हैं सरकारें?
क्या है खबर?
महाराष्ट्र में शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की सरकार पर संकट के बाद घिर आए हैं।
सरकार जाती देख उद्धव ठाकरे ने अपना आधिकारिक निवास खाली कर दिया है और निजी आवास में लौट आए हैं।
हालिया वर्षों में सियासी संकट खड़ा कर सरकार गिराने की यह पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले भी कई राज्यों में ऐसा हो चुका है। आइये उनमें से कुछ घटनाओं पर नजर डालते हैं।
सरकार का तख्तापलट
जुलाई, 2019 में कर्नाटक
जुलाई, 2019 में कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) गठबंधन की सरकार गिर गई थी। दरअसल, गठबंधन के 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद सरकार अल्पमत में चली गई थी।
उस वक्त कांग्रेस ने भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था। कुमारस्वामी सरकार गिरने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया था। आगे चलकर भाजपा ने उनके नेतृत्व में ही कर्नाटक में सरकार का गठन किया था।
सरकार का तख्तापलट
मार्च, 2020 में मध्य प्रदेश
कर्नाटक में सरकार गिरने के बाद एक साल से भी कम समय में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई थी।
2018 में सत्ता संभालने के बाद करीब 15 महीने बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने बगावत कर दी थी।
सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था। इससे कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और फ्लोर टेस्ट पास नहीं कर सकी।
पुडुचेरी
पिछले साल पुडुचेरी में गिरी कांग्रेस की सरकार
पिछले साल फरवरी में केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में वी नारायणसामी की सरकार गिरी थी। एक के बाद एक विधायकों के इस्तीफे के बाद सरकार ने बहुमत गंवा दिया था।
इसके बाद राज्यपाल ने नारायणसामी को बहुमत साबित करने को कहा था। इस पूरे प्रकरण के बीच केंद्र सरकार ने तत्कालीन उप राज्यपाल किरण बेदी को उनके पद से हटा दिया था।
नारायणसामी सरकार गिरने के बाद विधानसभा चुनावों तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा था।
शिवसेना में बगावत
महाराष्ट्र में क्या हो रहा है?
महाराष्ट्र में भी उद्धव ठाकरे की सरकार गिरना लगभग तय है। असम की राजधानी गुवाहाटी में बैठे शिवसेना के बागी मंत्री एकनाथ शिंदे ने 49 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।
शिंदे की तरफ से जारी तस्वीर में उनके साथ शिवसेना के 42 और सात निर्दलीय विधायक नजर आ रहे हैं, जबकि ठाकरे सरकार गिराने के लिए उन्हें केवल 37 विधायकों का साथ चाहिए।
इसी बीच भाजपा ने शिंदे को सरकार गठन के लिए ऑफर भेजा है।