
कर्नाटक विधानसभा चुनाव: मुख्य सीटें, जहां दांव पर लगी है दिग्गजों की सियासी किस्मत
क्या है खबर?
कर्नाटक में 10 मई को मतदान होने के बाद अब नतीजों की बारी है। पिछले करीब 2 महीने से कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने चुनाव जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। शनिवार को इस मेहनत के नतीजे सबके सामने होंगे।
इस चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की किस्मत भी दांव पर लगी है।
चलिए कर्नाटक की कुछ खास सीटों के बारे में जानते हैं, जहां से दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
वरुणा
वरुणा
वरुणा विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा ने कर्नाटक सरकार में मंत्री वी सोमन्ना को उतारा है। JD(S) से डॉ भारती शंकर प्रत्याशी हैं।
पिछले चुनावों में सिद्धारमैया के बेटे यतीन्द्र एस ने यहां से जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के टोआडप्पा बासवराजू को 58,616 वोट से हराया था।
2008 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई और उसके बाद से ही यहां कांग्रेस का कब्जा है।
शिग्गांव
शिग्गांव
इसे कर्नाटक की सबसे हाई प्रोफाइल सीट माना जा सकता है। यहां से मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई खुद मैदान में हैं। उनका सामना कांग्रेस के यासिर अहमद खान पठान और JD(S) के शशिधर चन्नबसप्पा यलीगर से है।
8 बार इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली है, लेकिन 2008 के बाद से इस पर बोम्मई का कब्जा है। 2018 में बोम्मई ने इस सीट पर मात्र 9,265 वोटों से जीत दर्ज की थी।
कनकपुरा
कनकपुरा
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार कनकपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने भाजपा ने राजस्व मंत्री आर अशोक को मैदान में उतारा है और JD(S) ने बी नागराजू को प्रत्याशी बनाया है।
शिवकुमार इस सीट पर लगातार तीन जीत दर्ज कर चुके हैं।
इस सीट पर पिछले 14 चुनावों में भाजपा को एक बार भी जीत नहीं मिली है, जबकि कांग्रेस ने 6 बार कब्जा जमाया है।
हुबली
हुबली-धारवाड़ सेंट्रल
इस सीट से कर्नाटक के दिग्गज लिंगाायत नेता और हाल ही में भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए जगदीश शेट्टार चुनाव लड़ रहे हैं। शेट्टार इस सीट से पहले 6 बार विधायक रह चुके हैं।
उनके सामने भाजपा ने महेश तेंगिनाकाई को उम्मीदवार बनाया है।
2018 के चुनावों में भाजपा में रहते हुए शेट्टार ने 75,794 वोट लेकर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के महेश नलवाड को 21,306 वोटों से हराया था।
अथणी
अथणी
अथणी सीट पर पिछले चुनावों में हारने-जीतने वाली प्रत्याशी इस बार अलग-अलग पार्टियों से आमने-सामने हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री और हाल ही में कांग्रेस में आए लक्ष्मण सावदी कांग्रेस प्रत्याशी हैं। सावदी के खिलाफ भाजपा ने महेश कुमाथल्ली तो JD(S) ने शशिकांत पदसालगी को मैदान में उतारा है।
पिछले चुनावों में भाजपा के टिकट पर लड़े सावदी को कांग्रेस के महेश कुमाथल्ली ने हराया था। बाद में महेश भाजपा में शामिल हो गए थे और उपचुनाव में जीत दर्ज की थी।
शिकारीपुर
चन्नापट्टन और शिकारीपुर
चन्नापट्टन से JD(S) प्रमुख एचडी कुमारस्वामी मैदान में हैं। कुमारस्वामी के खिलाफ भाजपा ने सीपी योगेश्वर और कांग्रेस ने गंगाधर एस को टिकट दिया है।
2018 में कुमारस्वामी ने भाजपा के सीपी योगेश्वर को करीब 21,000 वोटों से हराया था।
शिकारीपुर से भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई विजयेंद्र को भाजपा का टिकट मिला है।
उनका सामना कांग्रेस के जीबी मलातेश से है। बता दें कि इस बार येदियुरप्पा चुनावी मैदान से दूर हैं।
चित्तपुर
चित्तपुर और तीर्थहल्ली
चित्तपुर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे कांग्रेस के टिकट से मैदान में हैं। उनका सामना भाजपा की मणिकांता राठौड़ से है। 2018 में इस सीट से प्रियांक ने 4,393 वोटों से जीत हासिल की थी।
तीर्थहल्ली सीट से कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के किम्माने रत्नाक मैदान में हैं।
2018 में यहां से अरागा को जीत मिली थी।