
राजस्थान: अगले हफ्ते विधानसभा का सत्र बुला सकते हैं मुख्यमंत्री गहलोत, हो सकता है फ्लोर टेस्ट
क्या है खबर?
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अगले हफ्ते राजस्थान विधानसभा का सत्र बुला सकते हैं। शनिवार को राज्यपाल कलराज मिश्र से उनकी मुलाकात के बाद इसकी अटकलें लगाई जा रही हैं।
गहलोत इस सत्र में फ्लोर टेस्ट करते हुए अपना बहुमत भी साबित कर सकते हैं। 'NDTV' को कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी अंतिम फैसला सोमवार को राजस्थान हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद लेगी। इस सुनवाई में सचिन पायलट के खेमे के विधायकों का भविष्य तय होना है।
पृष्ठभूमि
45 मिनट चली थी मुख्यमंत्री और राज्यपाल की बैठक
भारतीय ट्राइबल पार्टी के दो विधायकों के गहलोत सरकार का समर्थन करने का ऐलान करने के बाद कल मुख्यमंत्री गहलोत राज्यपाल से मिले थे। इन दोनों विधायकों ने पायलट की बगावत के बाद अपना समर्थन वापस ले लिया था और पूरे विवाद में निष्पक्ष रहने का ऐलान किया था।
राज्यपाल और गहलोत के बीच बैठक 45 मिनट चली और गहलोत ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया। उन्होंने राज्यपाल को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई के बारे में भी बताया।
विधानसभा सत्र
बहुमत साबित करने के लिए बुलाया जा सकता है विधानसभा का सत्र
NDTV को कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि बैठक में गहलोत ने राज्यपाल को ये संकेत भी दिया कि वह अगले हफ्ते विधानसभा का सत्र बुलाना चाहते हैं। सूत्रों ने बताया कि यह एक छोटा सत्र हो सकता है और गहलोत अपना बहुमत साबित करने के लिए फ्लोर टेस्ट भी करा सकते हैं।
हालांकि कांग्रेस मामले पर कोई भी फैसला लेने से पहले बागी विधायकों के भविष्य पर राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी।
दावा
गहलोत का अपने पास पूर्ण बहुमत होने का दावा
सचिन पायलट का बागी खेमा अपने साथ 30 विधायक होने का दावा कर रहा है और उन्होंने गहलोत सरकार के अल्पमत में होने की बात कही है। वहीं गहलोत के खेमे ने अपने पास 109 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है।
इस बीच पायलट समेत 19 बागी विधायकों पर सदस्यता रद्द होने का खतरा मंडरा है। हाई कोर्ट ने मंगलवार तक उनकी सदस्यता रद्द करने पर रोक लगाई हुई है और वह सोमवार को मामले पर सुनवाई करेगी।
समीकरण
अगर ऐसा हुआ तो बहुमत परीक्षण में गिर जाएगी गहलोत सरकार
बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होना सीधे तौर पर गहलोत सरकार के भविष्य से जुड़ा है। अगर विधायकों की सदस्यता रद्द होती है तो विधानसभा का संख्याबल नीचे आ जाएगा और बहुमत परीक्षण की स्थिति में कांग्रेस आसानी से बहुमत साबित कर देगी।
लेकिन अगर उनकी सदस्यता बरकरार रहती है और उन्हें बहुमत परीक्षण के दौरान वोट डालने का अधिकार मिलता है तो कांग्रेस के लिए अपनी सरकार बचाना बेहद मुश्किल होगा।
विधानसभा की स्थिति
बगावत से पहले ऐसी थी विधानसभा की स्थिति
बगावत से पहले 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के 107 विधायक थे और उसकी सरकार को 13 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल था।
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल और भारतीय ट्राइबल पार्टी के तीन विधायकों ने भी गहलोत सरकार को समर्थन दिया हुआ है। इसका मतलब गहलोत सरकार को कुल 123 विधायकों का समर्थन हासिल था।
वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के विधानसभा में 72 विधायक हैं। भाजपा की सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायक हैं।