
राजस्थान: पाकिस्तान को सेना की गुप्त सूचना भेज रहे दो नागरिक सुरक्षा कर्मचारी गिरफ्तार
क्या है खबर?
सोमवार को राजस्थान पुलिस की विशेष ब्रांच ने पाकिस्तान को गुप्त सूचना प्रदान करने के आरोप में नागरिक सुरक्षा के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक आरोपी को पाकिस्तान की रहने वाली एक लड़की की फेसबुक आईडी के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अपने जाल में फंसाया था।
आरोपी ने पाकिस्तानी हैंडलर को सूचना देने के बदले में पैसे लेने की बात भी स्वीकार की है।
मामला
श्रीगंगानगर जिले के सैन्य डिपो में काम करते थे आरोपी
गिरफ्तार किए गए 29 वर्षीय विकास कुमार और 22 वर्षीय चिमन लाल श्रीगंगानगर जिले में सेना के गोला-बारूद के डिपो में काम करते थे। पिछले साल अगस्त में सेना के खुफिया विभाग को विकास की गतिविधियों के बारे में पता चला था।
जांच करने पर सामने आया कि 'अनोष्का चोपड़ा' नामक एक फेसबुक अकाउंट के जरिए पाकिस्तान के खुफिया ऑपरेटर्स ने विकास को अपने जाल में फंसाया था। पाकिस्तान की एक महिला मुल्तान से ये अकाउंट चलाती थी।
जानकारी
महिला ने खुद को मुंबई की बताया
पुलिस ने बताया कि विकास ने स्वीकार किया है कि उसे पिछले साल मार्च या अप्रैल में फेसबुक पर अनोष्का चोपड़ा नाम से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी जिसे उसने स्वीकार कर लिया। इसके बाद उनकी आपस में दोस्ती हो गई और वे व्हाट्सऐप पर एक-दूसरे से बात करने और वीडियो कॉल करने लगे।
लड़की के पास भारत का व्हाट्सऐप नंबर था और उनसे खुद को मुंबई के कैंटीन स्टोर विभाग (CSD) की एक कर्मचारी बताया था।
साजिश
महिला के कहने पर कई व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल हुए विकास
एक पुलिस अधिकारी ने 'हिंदुस्तान टाइम्स' को गोपनीयता की शर्त पर बताया कि महिला के कहने पर विकास कई व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल हो गया। इन ग्रुप में कई मौजूदा और पूर्व सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा अधिकारी शामिल थे।
इसके बाद महिला ने विकास को अमित कुमार सिंह (छद्म नाम) नामक अपने एक बॉस से मिलवाया। भारत का व्हाट्सऐप नंबर प्रयोग कर रहे अमित ने खुद को सैन्य इंजीनियर सेवा (MES) का कर्मचारी बताया।
जासूसी
महिला ने किया ब्लॉक, अमित को सूचनाएं भेजने लगा विकास
विकास और पाकिस्तानी हैंडलर अमित की बात शुरू होने के बाद अनोष्का चोपड़ा ने विकास को अपने फेसबुक और व्हाट्सऐप पर ब्लॉक कर दिया।
एक अधिकारी ने बताया, "हैंडलर ने अमित को पैसे के बदले में सूचना देने के लिए राजी कर लिया। इस तरह अप्रैल, 2019 में हैंडलर का टास्क देना और विकास का सूचनाएं देना शुरू हो गया। ज्यादातर जानकारी विकास ने खुद या चिमन लाल के जरिए प्राप्त की थी।"
गुप्त सूचनाएं
ये जानकारियां साझा कर रहा था विकास
पुलिस के अनुसार, विकास सेना के लड़ाई के तरीके (ORBAT), गोला-बारूद के फोटो, संख्या, प्रकार आदि, फायरिंग के अभ्यास से वापस आ रही यूनिटों, MFFR का सैन्य अभ्यास और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की व्यक्तिगत खासियतें आदि के बारे में गोपनीय सूचना पाकिस्तानी हैंडलर को दे रहा था।
वह कॉन्ट्रेक्चुअल नागरिक कर्मचारी चिमन लाल के जरिए MFFR के एक जल वितरण रजिस्टर की तस्वीरें भी प्राप्त कर रहा था और उन्हें हैंडलर के पास भेज रहा था।
कबूलनामा
विकास ने स्वीकार की 75,000 रुपये लेने की बात
विकास ने पाकिस्तानी हैंडलर से कम से कम 75,000 रुपये लेने की बात स्वीकार की है। उसने ये रकम अपने और अपने भाई के तीन बैंक अकाउंट्स में पैसे मंगाए थे।
पुलिस के अनुसार, सेना के खुफिया विभाग ने जनवरी में उत्तर प्रदेश एंटी-टेरर स्क्वाड (ATS) से जानकारी साझा की थी, जिसके बाद दोनों ने मिलकर 'ऑपरेशन डेजर्ट चेज' नाम दिया गया था।
दोनों के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया है।