
पंजाब कांग्रेस में तकरार बरकरार, सिद्धू से माफी मंगवाने पर अड़े अमरिंदर सिंह
क्या है खबर?
पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू का झगड़ा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है और केंद्रीय नेतृत्व के सुलह के फॉर्मूले के बावजूद चीजें सुधरी नहीं हैं।
इस कड़ी में सोमवार को अमरिंदर सिंह की टीम ने साफ किया कि वे तब तक सिद्धू से नहीं मिलेंगे, जब तक कि सिद्धू सोशल मीडिया पर उन पर किए गए अपमानजनक हमलों के लिए माफी नहीं मांग लेते।
ट्वीट
अमरिंदर के मीडिया सलाहकार ने खारिज कीं मुलाकात के लिए समय मांगने की खबरें
सिद्धू के अमरिंदर सिंह से मिलने का समय मांगने की खबरों को खारिज करते हुए सिंह के मीडिया रणनीतिकार रवीन ठुकराल ने ये बात कही।
अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, "सिद्धू के अमरिंदर सिंह से मिलने का समय मांगने की रिपोर्ट्स बिल्कुल गलत हैं। रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। मुख्यमंत्री तब तक सिद्धू से नहीं मिलेंगे जब तक कि वे सोशल मीडिया पर उन पर किए गए निजी अपमानजनक हमलों के लिए माफी नहीं मांग लेते।"
खटाई में सुलह
ठुकराल के ट्वीट से बढ़ी शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं
ठुकराल का यह ट्वीट कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ाने वाला था जो मान कर चल रहा था कि सुलह के उसके फॉर्मूले के बाद चीजें बेहतर हो जाएंगी।
इस फॉर्मूले के तहत सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं अमरिंदर की मांग के अनुसार चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए हैं।
हालांकि ये नाम तय करने से पहले अमरिंदर की राय नहीं ली गई और उनकी अन्य कई अहम मांगों को भी नहीं माना गया।
अहम मांग
अमरिंदर ने रखी थी सिद्धू के माफी मांगने की मांग
अमरिंदर की जो सबसे अहम मांग नहीं मानी गई है, वो सिद्धू के माफी मांगने से संबंधित है। उन्होंने कहा था कि अगर सिद्धू उन पर किए गए अपमानजनक हमलों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ले तो वे पूरे विवाद को भुलाने को तैयार हैं।
हालांकि न तो शीर्ष नेतृत्व ने इस मांग पर कुछ कहा और न ही सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस का प्रमुख बनने के बाद उनसे माफी मांगी है।
नाराजगी
शीर्ष नेतृत्व के रवैये से नाराज है अमरिंदर की टीम
सूत्रों ने NDTV को बताया कि अमरिंदर की टीम सुलह के फॉर्मूला और सिद्धू के प्रमोशन को शीर्ष नेतृत्व की अनदेखी के तौर पर देखती है, खासकर इसलिए क्योंकि मुख्यमंत्री की अहम मांगे नहीं मानी गईं।
अमरिंदर सिद्धू को राज्य प्रमुख बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने अंतिम समय तक इसका विरोध किया था।
इसके अलावा पंजाब के कई सांसदों ने भी सिद्धू के प्रमोशन पर आपत्ति जताई थी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व सिद्धू के साथ खड़ा हुआ।
टकराव
कई मुद्दों पर अमरिंदर सिंह पर निशाना साध चुके हैं सिद्धू
बता दें कि 2019 में कम महत्व वाला पद मिलने के कारण मंत्री पद छोड़ने वाले सिद्धू पिछले काफी समय से अमरिंदर सिंह पर हमलावर बने हुए थे।
उन्होंने सिखों के पवित्र ग्रंथ के अपमान के मामले में पंजाब सरकार की कानूनी हार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की फायरिंग को लेकर अमरिंदर सिंह पर निशाना साधा था।
इसके अलावा उन्होंने बिजली के बिलों को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा किया था।
आरोप
अमरिंदर का सिद्धू पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप
अमरिंदर सिंह ने भी सिद्धू पर पलटवार किया था और पार्टी से उनकी अनुशासनहीनता की शिकायत की थी। सिंह ने सिद्धू पर पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया था।
कांग्रेस को अंदेशा था कि उसके दो बड़े नेताओं के इस खुलेआम टकराव से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे नुकसान हो सकता है और इसी कारण इसे सुलझाने के लिए खुद राहुल और प्रियंका ने प्रयास किए थे।