
जेल में बंद यासीन मलिक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- मैं कोई आतंकवादी नहीं, राजनेता हूं
क्या है खबर?
तिहाड़ जेल में बंद जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में खुद को एक राजनेता बताया।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और उज्जल भुइयां की पीठ के सामने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश मलिक ने कहा कि वह राजनेता हैं, आतंकवादी नहीं, उनसे देश के 7 प्रधानमंत्री बातचीत कर चुके हैं।
उन्होंने यह बात केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश होने पर सवाल उठाने पर कही।
सुनवाई
किस मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे मलिक
वर्ष 1989 में भारतीय वायुसेना के 4 अधिकारियों की हत्या और पूर्व केंद्रीय मंत्री की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए जम्मू-कश्मीर कोर्ट ने उसे भौतिक रूप से पेश होने को कहा था।
आदेश को CBI ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। CBI के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मलिक की भौतिक प्रस्तुति को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं।
इसके बाद पीठ ने ट्रायल कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया।
सुनवाई
कोर्ट में क्या बोले मलिक?
तिहाड़ में बंद मलिक ने मामले पर बहस के दौरान CBI की सुरक्षा खतरे वाली दलील का जवाब देते हुए अपनी बात रखी।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कोई आतंकवादी नहीं बल्कि एक राजनेता है और 7 प्रधानमंत्री उनसे बातचीत कर चुके हैं।
इस पर कोर्ट ने कहा कि अभी यह फैसला नहीं हो रहा कि आप आतंकवादी हैं या नेता, अभी यह विचार हो रहा है कि क्या आपको वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग से जिरह की अनुमति मिले या नहीं।
जवाब
मेरे खिलाफ आतंकवादी को समर्थन देने का आरोप नहीं- मलिक
न्यायमूर्ति ओका के कथन पर मलिक ने कहा कि वह CBI की इस दलील का जवाब दे रहे थे कि उन्हें जम्मू कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश नहीं किया जा सकता क्योंकि वह एक "खतरनाक आतंकवादी" हैं।
मलिक ने कहा, "मेरे और मेरे संगठन के खिलाफ किसी भी आतंकवादी को समर्थन देने या ठिकाना मुहैया कराने के लिए FIR नहीं है। मेरे खिलाफ FIR अहिंसक राजनीतिक विरोध से संबंधित हैं।"
सुनवाई
मलिक जेल से ही करेंगे बहस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला दिया है कि मलिक को तिहाड़ से ही वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं से मामले में गवाहों से जिरह करने की अनुमति दी जाए क्योंकि मलिक ने अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए वकील नियुक्त नहीं करने का विकल्प चुना है।
कोर्ट ने कहा कि जम्मू कोर्ट के समक्ष मलिक की शारीरिक पेशी उचित नहीं थी।
उसने कहा कि ट्रायल कोर्ट और तिहाड़ जेल दोनों में वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा है।