
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा- पाबंदियों पर एक-एक सवाल का देना होगा जवाब
क्या है खबर?
कश्मीर में लगी पाबंदियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा कि उसे अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पैदा हुई स्थिति से जुड़े एक-एक सवाल का जवाब देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पाबंदियों को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने अपनी समस्याएं विस्तार से बताई हैं और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को उनके हर सवाल का जबाव देना होगा।
कोर्ट जम्मू-कश्मीर प्रशासन के हलफनामे से खुश नहीं नजर आई।
सुप्रीम कोर्ट बेंच
जम्मू-कश्मीर से सभी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है तीन सदस्यीय बेंच
बता दें कि न्यायाधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट बेंच जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य में लगी पाबंदियों समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
इनमें राज्य में प्रेस और घूमने-फिरने की आजादी पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और कश्मीर टाइम्स की अनुराधा भासीन की याचिकाएं भी शामिल हैं।
आज सुप्रीम कोर्ट मुख्य तौर पर इन्हीं दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
जवाबी हलफनामा
कोर्ट ने प्रशासन के जवाबी हलफनामे को बताया अपर्याप्त
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, "आपको याचिकाकर्ताओं के एक-एक सवाल का जवाब देना होगा जिन्होंने विस्तार से अपनी दलीलें पेश की हैं। आपके जवाबी हलफनामे से हम किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने में नाकाम रहे हैं।"
मेहता को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने कहा, "हमें ये आभास न कराएं कि आप मामले पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।"
दलीलें
मेहता ने कहा- जम्मू-कश्मीर में छप रहे सभी अखबार
इससे पहले जम्मू-कश्मीर में प्रेस की पाबंदी के खिलाफ दायर अनुराधा भासीन की याचिका पर मेहता ने जवाब दिया।
उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर में सभी टीवी चैनल चल रहे हैं और सभी अखबार छापे जा रहे हैं। श्रीनगर से अखबार नहीं छापना उनकी (अनुराधा भासीन) खुद की इच्छा है। जम्मू से ये छापा जा रहा है। ये उनका दावा है कि पत्रकारों को सूचनाओं के प्रसार तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल रही है।"
बयान
कल गृह मंत्री ने कही थी जम्मू-कश्मीर में सब सामान्य होने की बात
बता दें कि कल गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और राज्य में उर्दू, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं के सभी अखबार छप रहे हैं।
सुनवाई
याचिकाकर्ताओं ने दिया हांगकांग प्रदर्शन का उदाहरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने हांगकांग प्रदर्शनों का उदाहरण भी दिया जहां हाई कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के मास्क पहनने पर सरकार के प्रतिबंध को हटा दिया था।
वकील मीनाक्षी अरोरा ने कहा, "हांगकांग में स्थिति कहीं ज्यादा खराब थी, कश्मीर से कहीं ज्यादा विकट। वहां रोजाना प्रदर्शन हो रहे थे।"
इस पर न्यायाधीश रमणा ने कहा कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के मूल अधिकारों की रक्षा करने में अधिक सक्षम है।
पृष्ठभूमि
क्यों लगी थीं जम्मू-कश्मीर में पाबंदियां?
बता दें कि भारत सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 में बदलाव करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था।
इसके अलावा राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, में बांटने का फैसला भी लिया गया था।
इन फैसलों के विरोध में प्रदर्शनों और हिंसा की संभावना को देखते हुए सरकार ने राज्य में कई तरह की पाबंदियां लगाईं थीं, जिन्हें बाद में धीरे-धीरे हटा दिया गया।
इंटरनेट पर रोक अभी भी जारी है।