
सुप्रीम कोर्ट में सजा-ए-मौत के तरीके के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई, केंद्र से मांगा सुझाव
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फांसी देकर मौत की सजा के तरीके को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की।
इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से सजा-ए-मौत देने के लिए फांसी से कम दर्दनाक तरीके पर चर्चा करने को कहा।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा, "सरकार इस मामले को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के दृष्टिकोण से देख सकती है।"
कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी को एक अध्ययन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पैनल गठन का दिया सुझाव
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "मौत की सजा देने के तरीके के विकल्प पर विचार हो सकता है। हमारे पास पहले कुछ वैज्ञानिक डाटा होना चाहिए, जो फांसी के दौरान होने वाले दर्द का अध्ययन करें। इसके लिए एक पैनल बना सकते हैं, जो हमें बेहतर सुझाव दे।"
CJI ने कहा, "फांसी से कम दर्दनाक अगर कोई और तरीका है, जिसे अपनाया जा सकता है, तो क्या फांसी से मौत को असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।"
जज
सुप्रीम कोर्ट की पीठ के अन्य न्यायधीशों ने क्या कहा?
याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने कहा, "यह विवाद कम दर्दनाक मौत का नहीं है। यहां प्रश्न गरिमापूर्ण मृत्यु और अवैज्ञानिकता का है। इन दोनों शर्तों को फांसी पूरा करती है। अमेरिका जैसे देशों में कैदियों को घातक इंजेक्शन देकर मौत दिये जाने वाले वाले वैज्ञानिक तरीके पर सवाल उठते रहे हैं"
उन्होंने कहा कि इस बात का भी अध्ययन होना चाहिए कि घातक इंजेक्शन में किस रसायन का इस्तेमाल होता है।
जानकारी
2 मई को होगी अगली सुनवाई
केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए अटॉर्नी जनरल ने कहा कि याचिका में रखी गई बातों पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट के निर्देशों पर सजा-ए-मौत के विकल्पों पर अध्ययन किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।
याचिका
जनहित याचिका में क्या है मांग?
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा के तरीके को लेकर दायर जनहित याचिका दायर की गई है।
इस याचिका में कोर्ट से दोषियों को फांसी की बजाय गोली मारने, इंजेक्शन लगाने या करंट लगाकर मौत देने का सुझाव दिया गया है।
याचिकाकर्ता ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि दोषियों को फांसी लगाकर दी जाने वाली मौत की सजा बहुत क्रूर है और मौत की सजा देने के विकल्प होने चाहिए।
मौत
भारत में सजा-ए-मौत के तौर पर दी जाती है फांसी
भारत में सजा-ए-मौत के मामले बेहद कम होते जा रहे हैं, लेकिन अभी भी कोर्ट द्वारा गंभीर अपराधों में मौत की सजा सुनाई जाती है।
भारत में मौत की सजा देने के लिए सिर्फ फांसी का ही तरीका अपनाया जाता है, लेकिन अलग-अलग देशों में ये अलग होता है।
भारत की तरह ही 33 अन्य देशों में भी सिर्फ फांसी को सजा-ए-मौत के तौर पर चुना गया है, जबकि कई देश दूसरे तरीकों के साथ-साथ फांसी को भी अपनाते हैं।