
गणतंत्र दिवस: मुख्य अतिथि के तौर पर मिस्र के राष्ट्रपति को बुलाने के क्या मायने हैं?
क्या है खबर?
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी 24 जनवरी से तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं और वो दिल्ली में 74वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।
बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया।
पहली बार मिस्र के राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित किया गया है।
ऐसे में राष्ट्रपति सीसी के भारत दौरे के मायने क्या हैं, आइये इसे विस्तार समझते हैं।
निमंत्रण
गणतंत्र दिवस के निमंत्रण का क्या मायने हैं?
हर साल गणतंत्र दिवस की परेड के लिए मुख्य अतिथि का चुनाव बहुत मायने रखता है और इसका उद्देश्य राजनीतिक और कूटनीति हितों से लेकर किसी देश के साथ व्यवसायिक हितों को आगे बढ़ाना होता है।
इस बार मिस्र के राष्ट्रपति को निमंत्रण देने का भी यही उद्देश्य है। आज भारत सरकार और राष्ट्रपति सीसी के बीच साइबर सुरक्षा, कृषि, डिजिटल क्षेत्र और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को लेकर चर्चा भी हुई है।
रिश्ते
भारत-मिस्र के बीच कैसे हैं रिश्ते?
भारत और मिस्र के बीच संबंध बहुत पुराने हैं। दोनों देशों के बीच राजदूत स्तर पर राजनयिक संबंधों स्थापित करने की संयुक्त घोषणा 18 अगस्त, 1947 को की गई थी।
1955 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्देल नासिर ने दोनों देशों के बीच 'मैत्री संधि' पर हस्ताक्षर किए थे। इसी दौरान नेहरू ने अपने दोस्त नासिर के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी थी।
दौरा
1980 के बाद से भारत के चार प्रधानमंत्री कर चुके हैं मिस्र का दौरा
साल 1980 के बाद से भारत के चार प्रधानमंत्री मिस्र का दौरा कर चुके हैं। इनमें राजीव गांधी, पीवी नरसिंहा राव, आइके गुजराल और डॉ मनमोहन सिंह शामिल हैं।
साल 1982, 1983 और 2008 में मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति होस्नी मुबारक ने भारत का दौरा किया था। साल 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी ने भारत का दौरा किया था।
वहीं साल 2015 और 2016 में मिस्र के मौजूदा राष्ट्रपति सीसी भारत आ चुके हैं।
महामारी
कोरोना महामारी में मिस्र ने भारत का किया सहयोग
कोरोना वायरस महामारी के दौरान साल 2020 में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति सीसी से फोन पर बातचीत की थी। मिस्र ने 2021 में भारत में महामारी की दूसरी लहर के दौरान मदद के लिए तीन विमानों से चिकित्सा आपूर्ति और अन्य राहत सामग्री भेजी थी।
इसके अलावा भारत के दूतावास ने भी एक समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए मिस्र की दवा कंपनी ईवा फार्मा से रेमडेसिवीर की तीन लाख खुराकें खरीदीं, जो समय से काफी पहले भेज दी गई थीं।
व्यापार
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों की स्थिति क्या है?
मिस्र और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता मार्च 1978 से चल रहा है और यह मोस्ट फेवर्ड नेशन क्लॉज पर आधारित है। दोनों देशों के बीच पिछले 10 सालों में द्विपक्षीय व्यापार पांच गुना से अधिक बढ़ा है।
महामारी के बाद साल वित्तीय वर्ष 2021-22 में दोनों देशों के बीच व्यापार 2020-21 की तुलना में 75 प्रतिशत वृद्धि के साथ 7.26 अरब डॉलर (59,273 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया था।
आर्थिक संकट
मिस्र में आर्थिक सकंट के बीच भारत कर सकता है निवेश
मिस्र इन दिनों विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। हालांकि, मिस्र ने किसी तरह की कोई आर्थिक सहायता का अनुरोध नहीं किया है।
ऐसे में भारत एलेक्जेंड्रिया और काहिरा के निवेश बढ़ाने पर विचार कर सकता है। खासतौर से मिस्र की स्वेज नहर भारत के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, जो एशिया और यूरोप के बीच सबसे लोकप्रिय व्यापारिक मार्ग है। दोनों देश पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं।
सुरक्षा
भारत का रक्षा उद्योग सहयोग को बढ़ाने पर जोर
भारत मिस्र से रक्षा उद्योग सहयोग बढ़ाना चाहता है और मिस्र भी भारतीय रक्षा उपकरणों जैसे एयरक्राफ्ट तेजस, आकाश जैसी मिसाइलें, स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन और रडार खरीद में रुचि रखता है। इस क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले साल काहिरा का दौरा किया था और एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
वहीं अगले महीने बेंगलुरू के येलहंका वायुसेना स्टेशन में एयरो-इंडिया 2023 में भाग लेने के लिए मिस्र को आमंत्रित भी किया गया है।
IOC
इस दौरे का क्या है राजनीतिक महत्व?
राष्ट्रपति सीसी का भारत दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 57 देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में मिस्र भी एक सदस्य है। यहां से पाकिस्तान ने कुछ सदस्य देशों से भारत के खिलाफ आलोचनात्मक बयान दिलवाने में सफलता पाई है।
दूसरी तरफ मिस्र इसमें सकारात्मक भूमिका निभा रहा है और भारत उसे उदार आवाज के तौर पर देख रहा है। भारत में पिछले साल पैगंबर मोहम्मद पर दिये विवादास्पद बयान पर भी मिस्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।