
किसान संयुक्त मोर्चा का आरोप- केंद्र सरकार ने रची ट्रैक्टर परेड के दौरान हिंसा की साजिश
क्या है खबर?
ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा पर बयान जारी करते हुए किसान संयुक्त मोर्चा ने केंद्र सरकार पर किसान मजदूर संघर्ष समिति और दीप सिद्धू के साथ मिलकर इसकी साजिश करने का आरोप लगाया है।
32 किसान संगठनों के इस मोर्चे ने कहा कि सरकार किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन से हिल गई थी और इसलिए उसने इस आंदोलन को कमजोर करने के लिए ये साजिश रची।
मोर्चा ने किसानों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की।
पृष्ठभूमि
क्या है पूरा मामला?
पिछले दो महीने से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे किसान आंदोलन में कल ट्रैक्टर परेड के दौरान अचानक से हिंसा हो गई थी और किसानों का एक धड़ा तय रास्ते से हटकर ITO होते हुए लाल किले पहुंच गया।
इस दौरान उनकी ITO और लाल किले समेत अन्य कई जगहों पर पुलिस के साथ जबरदस्त भिडंत हुई और उन्होंने कई बसों और वाहनों को निशाना बनाया। कुछ किसानों ने लाल किले पर सिख धर्म का झंडा भी फहराया।
बैठक
बलवीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में हुई किसान संगठनों की बैठक
किसान संयुक्त मोर्चा ने आज इसी संदर्भ में सिंघु बॉर्डर पर बैठक बुलाई थी और बलवीर सिंह राजेवाल के नेतृत्व में दोपहर करीब 2 बजे ये बैठक हुई।
बैठक के बाद अपने बयान में मोर्चा ने कहा, "किसान संगठनों ने नई दिल्ली में हिंसा पर चर्चा की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि केंद्र सरकार इस किसान आंदोलन से बुरी तरह से डर गई है। इसलिए किसान मजदूर संघर्ष समिति और अन्य के साथ मिलकर एक गंदी साजिश रची गई।"
बयान
किसान मजदूर संघर्ष समिति का हमसे कोई संबंध नहीं- मोर्चा
मोर्चा ने बयान में कहा कि किसान मजदूर संघर्ष समिति ने उनके आंदोलन शुरू करने के 15 दिन बाद आकर अपना अलग प्रदर्शन स्थल बनाया था और उसका आंदोलन को संयुक्त रूप से चला रहे संगठनों से कोई संबंध नहीं है।
बयान के अनुसार, जब किसान संगठनों ने 26 जनवरी को किसान परेड का ऐलान किया तो दीप सिद्धू जैसे असामाजिक तत्वों ने इस संगठन (किसान मजदूर संघर्ष समिति) के साथ मिलकर किसान आंदोलन को नष्ट करने की साजिश रची।
आरोप
"यह शांतिपूर्ण किसान आंदोलन को खत्म करनी की गहरी साजिश"
संयुक्त मोर्चा ने कहा कि इस साजिश के तहत किसान मजदूर संघर्ष समिति और अन्य लोगों ने रिंग रोड पर मार्च निकालने और लाल किले पर झंडा फहराने का ऐलान किया और इसी पर चलते हुए संघर्ष समिति ने तय समय से दो घंटे पहले रिंग रोड पर मार्च करना शुरू कर दिया।
मोर्चा ने आगे कहा कि ये शांतिपूर्ण और मजबूत किसान आंदोलन को खत्म करने की गहरी साजिश है और हम इस घटना की आलोचना करते हैं।
जानकारी
किसान संगठनों ने लिया प्रण- किसी को नहीं तोड़ने देंगे आंदोलन
अपने बयान के अंत में मोर्चा ने किसानों से प्रदर्शन स्थल पर बने रहने और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। किसान संगठनों ने संकल्प लिया कि वे सरकार और अन्य ताकतों को इस संघर्ष को तोड़ने नहीं देंगे।
आरोप-प्रत्यारोप
दीप सिद्धू को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता
बता दें कि पहले ही किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सतनाम सिंह पन्नू खुद को परेड के दौरान हुई हिंसा से अलग कर चुके हैं और उन्होंने इसके लिए दीप सिद्धू को जिम्मेदार ठहराया था।
उन्होंने कहा था, "लाल किले पर जो हुआ उसका जिम्मेदार दीप सिद्धू है। पुलिस ने उसे क्यों नहीं रोका? दीप सिद्धू सरकार का आदमी है। हम आउटर रिंग रोड से वापस आ गए थे... मैं संयुक्त किसान मोर्चा से बात करूंगा।"
कार्रवाई
पुलिस ने दर्ज की 22 FIR, 10 किसान नेताओं के नाम
गौरतलब है कि ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा में दिल्ली के 300 से अधिक जवान घायल हुए हैं और उसने मामले में 22 FIR दर्ज की हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन FIR में योगेंद्र यादव और राकेश टिकैट समेत कम से कम 10 किसान नेताओं का नाम भी शामिल है।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, इन FIR में दर्शन पाल, राजिंदर सिंह, बलवीर सिंह राजेवाल, बूटा सिंह बुर्जगिल और जोगिंदर सिंह का नाम भी शामिल है।