
बड़े स्तर के अध्ययन में 90 प्रतिशत असरदार मिली नोवावैक्स की कोरोना वैक्सीन
क्या है खबर?
पूरी दुनिया में हाहाकार मचाने वाली कोरोना वायरस महामारी से निजात पाने के लिए अब देशों में तीव्र गति से वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। इसके अलावा नई वैक्सीनों के निर्माण का कार्य भी जारी है।
इसी बीच बड़ी खबर सामने आई है कि अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन बड़े स्तर के अध्ययन में 90 प्रतिशत तक असरदार पाई गई है। नोवावैक्स ने सोमवार को अध्ययन के परिणामों की घोषणा की है।
अध्ययन
अमेरिका और मैक्सिको में 30,000 लोगों पर किया था वैक्सीन का अध्ययन
इंडिया टुडे के अनुसार नोवावैक्स के मुख्य कार्यकारी स्टेनली एर्क ने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित वैक्सीन का अमेरिका और मैक्सिको में बड़े और आखिरी चरण का अध्ययन किया गया था।
इसमें 18 साल और इससे अधिक उम्र के 30,000 लोगों को शामिल किया गया था।
इनमें से दो तिहाई को तीन सप्ताह के अंतराल पर वैक्सीन की दो खुराकें दी गईं जबकि शेष को अप्रभावी (डमी) वैक्सीन लगाई गई थी। इसमें प्रभावी परिणाम सामने आए हैं।
स्पष्ट
वैक्सीन हासिल करने वालों में 77 लोग थे कोरोना संक्रमित- एर्क
एर्क ने कहा कि वैक्सीन पाने वाले ग्रुप में कोरोना संक्रमण के 77 मामले थे। इनमें से 14 लोगों को वैक्सीन लगाई गई थी, जबकि शेष मामलों में अप्रभावी (डमी) वैक्सीन दी गई थी। वैक्सीन लगवाने वाले समूह में किसी की भी बीमारी मध्यम या गंभीर स्तर पर नहीं पहुंची।
उन्होंने कहा कि अध्ययन में वैक्सीन वायरस के कई स्ट्रेनों के खिलाफ भी असरदार रही है। इनमें पहली बार यूनाइटेड किंगडम (UK) में सामने आया स्ट्रेन भी शामिल है।
बयान
90 प्रतिशत तक प्रभावी मिली है वैक्सीन- नोवावैक्स
बड़े स्तर के अध्ययन के परिणामों की जानकारी देते हुए नोवावैक्स ने कहा, "वैक्सीन कुल मिलाकर करीब 90 प्रतिशत तक प्रभावी मिली है और शुरुआती आंकड़ें बताते हैं कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इतना ही नहीं यह कोरोना वायरस के सभी स्ट्रेनों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करती है।"
कंपनी ने कहा कि उसकी योजना सितंबर के अंत तक अमेरिका, यूरोप और अन्य जगहों पर वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी लेने की है।
दुष्परिणाम
वैक्सीन के सामने आए बहुत हल्के दुष्परिणाम- एर्क
एर्क ने कहा कि बड़े स्तर के अध्ययन में वैक्सीन के बहुत ही हल्के दुष्परिणाम सामने आए हैं। इसमें इंजेक्शन लगने वाली जगह पर दर्द होना अहम रहा है। इसी तरह खून के थक्के जमने या दिल से संबंधित कोई परेशानी सामने नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि अध्ययन के परिणामों को चिकित्सा जर्नल में प्रकाशित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। जहां स्वतंत्र विशेषज्ञ इसकी जांच करेंगे। यह वैक्सीन कोरोना महामारी के खिलाफ बड़ा हथियार साबित होगी।
बयान
"निम्न और मध्य आय वाले देशों में भेजी जाएगी शुरुआती खुराकें"
एर्क ने कहा, "हमारी शुरूआती कई खुराकें निम्न और मध्य आय वाले देशों को भेजी जाएगी जाएंगी। सितंबर तक कंपनी प्रतिमाह 10 करोड़ खुराकें तैयार करने में सक्षम होगी। वह विकासशील देशों में वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ाने में अहम किरदार निभाएंगे।"
जानकारी
स्पाइक प्रोटीन की पहचान करने में सक्षम है वैक्सीन
नोवावैक्स द्वारा तैयार वैक्सीन शरीर को कोरोना वायरस को पहचानने, खासकर इसे ढकने वाले स्पाइक प्रोटीन की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित करता है और शरीर को वायरस से लड़ने के लिए तैयार करता है।
नोवावैक्स को प्रायोगशाला में बनाए गए उस प्रोटीन क्लोन से तैयार किया गया है और यह अभी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा रही कुछ अन्य वैक्सीनों से अलग है। इसे फ्रिज के तापमान पर रखा जा सकता है और यह वितरण में आसान है।
करार
नोवावैक्स ने भारत में SII से किया है करार
बता दें कि नोवावैक्स ने वैक्सीन के भारत में उत्पादन, ट्रायल और वितरण के लिए पिछले अगस्त में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) से करार किया था। इस वैक्सीन को भारत में कोवावैक्स के नाम से तैयार किया जाएगा।
इस साझेदारी के तहत SII भारत में वैक्सीन की 200 करोड़ खुराकों का उत्पादन करेगी।
इनमें से 100 करोड़ खुराक भारत और कम आय वाले देशों के लिए होगी। इसके अलावा देश में इसका क्लिनिकल ट्रायल भी किया जाएगा।