
कोरोना वैक्सीन: कब तक पूरा होगा बच्चों पर ट्रायल और ये बड़ों से कितना अलग?
क्या है खबर?
भारत में अभी 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई जा रही है और बच्चों और किशोरों के लिए वैक्सीन लाने की तैयारी की जा रही है।
अभी देश में भारत बायोटेक की 'कोवैक्सिन' और जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल चल रहा है। इस बीच बच्चों की वैक्सीन को लेकर अभिभावकों के कई सवाल और चिंताएं भी सामने आए हैं।
चलिए ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब जानते हैं।
ट्रायल
क्या वयस्कों से अलग होगी बच्चों की वैक्सीन?
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के पूर्व निदेशक एनके गांगुली ने BBC को बताया कि बच्चों पर जिन वैक्सीनों का ट्रायल किया जा रहा है, उनमें और वयस्कों को दी गई वैक्सीनों में कोई अंतर नहीं है।
उन्होंने कहा, "वैक्सीन को पहले 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को दिया जाता है। इसके बाद जब वैक्सीन के सुरक्षित और प्रभावी होने का डाटा आ जाता है, तब उसका गर्भवती महिलाओं और बच्चों जैसे संवेदनशील समूहों पर इस्तेमाल होता है।"
बयान
बच्चों में भी पहले किशोरों को लगती है वैक्सीन- डॉ गांगुली
डॉ गांगुली ने बताया, "बच्चों में भी पहले किशोरों और फिर छोटे बच्चों को वैक्सीन दी जाती है। दो साल से छोटे बच्चों को आम तौर पर वैक्सीन नहीं दी जाती क्योंकि उन्हें गर्भ और मां के दूध से ही सुरक्षा मिल जाती है।"
चयन
ट्रायल के लिए बच्चों का चयन कैसे होता है?
वैक्सीन के ट्रायल के लिए बच्चों का चयन उसी तरह से होता है जैसे वयस्कों का होता है, लेकिन सहमति और प्रोसेसिंग में थोड़ा अंतर होता है। बच्चों के अभिभावकों से भी ट्रायल की मंजूरी लेनी होती है।
मंजूरी के बाद स्वस्थ बच्चों की पहचान के लिए उनकी कुछ जांच की जाती हैं और इसमें जिन बच्चों को स्वस्थ पाया जाता है, उन्हें वैक्सीन दी जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के ट्रायल में जल्दबाजी नहीं की जा सकती।
ट्रायल
कब तक पूरे हो जाएंगे ट्रायल?
दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के डॉ संजय कुमार राय के अनुसार, बच्चों के ट्रायल का नतीजा आने में कई महीने लग सकते हैं।
उन्होंने कहा, "अभी छह से नौ महीनों तक इन बच्चों का फॉलो-अप लिया जाएगा... वयस्कों में ये वैक्सीनें सुरक्षित हैं तो बच्चों में भी सुरक्षा की कोई चिंता नहीं। हालांकि इसके ठोस सबूत मिलने तक इसे मंजूरी नहीं जा सकती और नियामक संस्थाएं ट्रायल का डाटा आने के बाद ही इसे मंजूरी देंगी।"
सरकार का पक्ष
सरकार का क्या कहना है?
नीति आयोग के सदस्य और कोविड-19 पर केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष डॉ वीके पॉल के अनुसार, देश में जल्द ही बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी।
हालांकि विशेषज्ञों ने सरकार को जल्दबाजी के प्रति चेताया है। डॉ गांगुली ने कहा कि सरकार को बच्चों के वैक्सीनेशन को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए और जब तक बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध न हो, तब तक इस प्रक्रिया को शुरू करने से बचना चाहिए।
अहमियत
किन देशों में हो रहा है बच्चों का वैक्सीनेशन?
अभी किसी भी देश में छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन नहीं हो रहा है, हालांकि ऐसे कई देश हैं जहां 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों और किशोरों का वैक्सीनेशन हो रहा है।
इनमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, दुबई, सिंगापुर और पोलैंड जैसे देश शामिल हैं।
अगर फाइजर की कोरोना वैक्सीन भारत आती है तो यहां भी 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो सकता है।
अहमियत
क्यों अहम है बच्चों का वैक्सीनेशन?
भारत में बच्चों का वैक्सीनेशन इसलिए भी अहम है क्योंकि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के ज्यादा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार समेत कई विशेषज्ञ यह बात कह चुके हैं।
विशेषज्ञों ने छह-सात महीने बाद तीसरी लहर आने की आशंका जताई है और अगर इस बीच बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो सकता है तो इसे कुछ हद तक काबू किया जा सकेगा।