
कोरोना वैक्सीनेशन: दुनियाभर में लगीं एक अरब खुराकें, 50% भारत समेत केवल तीन देशों में
क्या है खबर?
दुनियाभर में कोरोना वायरस वैक्सीनों की एक अरब से ज्यादा खुराकें दी जा चुकी हैं। इनमें से आधी से ज्यादा भारत समेत केवल तीन देशों में दी गई हैं।
समाचार एजेंसी AFP ने आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से खबर दी है कि शनिवार शाम तक पूरी दुनिया में 1,00,29,38,540 खुराकें दी चुकी थीं।
कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ पहला बड़ा वैक्सीनेशन अभियान शुरू होने के लगभग पांच महीने बाद दुनिया ने यह मुकाम हासिल किया है।
कोरोना वैक्सीनेशन
इन तीन देशों ने लगाई 50 फीसदी से ज्यादा खुराकें
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इन 1 अरब में से लगभग 58 फीसदी खुराकें अमेरिका, चीन और भारत में लगाई गई हैं। अमेरिका अब तक कोरोना वायरस वैक्सीनों की 22.5 करोड़, चीन 21.6 करोड़ और भारत लगभग 14 करोड़ खुराकें लगा चुका है।
कुल खुराकों के मामले में ये तीन देश सबसे आगे हैं। वहीं आबादी के अनुपात के हिसाब से बात करें तो इजरायल सबसे आगे हैं। यहां 60 प्रतिशत आबादी पूरी तरह वैक्सीनेट हो चुकी है।
कोरोना वैक्सीनेशन
पिछले एक महीने में तेज हुई वैक्सीनेशन की रफ्तार
इजरायल के बाद संयुक्त अरब अमीरात का नंबर आता है, जहां की 51 फीसदी आबादी वैक्सीन की कम से कम एक खुराक ले चुकी है।
तीसरे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम (49 फीसदी), चौथे पर अमेरिका (42 फीसदी) और पांचवे पर चिली (41 फीसदी) है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई देशों में बीते एक महीने में वैक्सीनेशन अभियान रफ्तार पकड़ने लगे हैं और खुराक लगाने की रफ्तार दोगुनी हो गई है।
वैक्सीनेशन अभियान
यूरोपीय संघ का क्या हाल?
अगर यूरोपीय संघ की बात करें तो यहां अब तक 21 फीसदी आबादी को 12.8 खुराकें लगाई गई हैं।
यूरोप में वैक्सीन लगाने में माल्टा सबसे तेज हैं। यहां 47 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। 37 प्रतिशत के साथ हंगरी दूसरे स्थान पर है।
अगर जर्मनी और फ्रांस आदि देशों की बात करें तो यहां वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी है। जर्मनी ने 22.6, फ्रांस ने 20.5 और इटली ने 19.9 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाई है।
कोरोना वायरस
वैक्सीन वितरण को लेकर भारी असमानता
वैक्सीन वितरण में असमानता का मुद्दा लंबे समय से छाया हुआ है। अब गरीब देशों ने भी कोवैक्स प्रोग्राम की मदद से वैक्सीनेशन अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन यहां कवरेज अमीर देशों के बराबर नहीं है।
विश्व बैंक की ऊंची आय वाली श्रेणी में शामिल देशों में दुनिया की 16 फीसदी आबादी रहती है, लेकिन यहां 47 फीसदी खुराकें दी गई हैं।
वहीं निम्न मध्यम आय वाले देशों का वैक्सीनेशन में योगदान महज 0.2 प्रतिशत है।
जानकारी
इन देशों में वैक्सीनेशन शुरू होना बाकी
हैती, तंजानिया, मेडागास्कर, बुर्किना फासो, चाड, बुरुंडी, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक और एरिट्रिया (सभी अफ्रीकी देश) वेनातु, समोआ, किरिबाती और उत्तर कोरिया समेत 12 देशों में अभी तक कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन शुरू भी नहीं हुआ है।
वितरण में असमानता
गरीब और अमीर देशों के वैक्सीनेशन में भारी अंतर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉ टेड्रोस ने 9 अप्रैल को कहा था, "दुनियाभर में वैक्सीन के वितरण में अचंभित करने वाली असमानता है। ऊंची आय वाले देशों में औसतन चार में से एक व्यक्ति को वैक्सीन लग चुकी है। वहीं गरीब देशों में 500 से में से एक को वैक्सीन लगी है। मैं दोहरा रहा हूं कि चार में एक बनाम 500 में से एक।"
हाल ही में कई देश वैक्सीनों के पेटेंट हटाने की मांग कर चुके हैं।
कोरोना वैक्सीनेशन
कौन सी वैक्सीन कितने देशों में इस्तेमाल हो रही?
एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई वैक्सीन (भारत में कोविशील्ड) सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रही है। अब तक 156 देश इसका इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं।
वहीं 91 देशों में फाइजर और बायोएनटेक की वैक्सीन, 46 देशों में मॉडर्ना की वैक्सीन, 32 देशों में रूस की स्पूतनिक-V, 41 देशों में सिनोफार्म और 21 देशों में सिनोवैक की वैक्सीन उपयोग की जा रही है।
कई देश एक साथ अलग-अलग कंपनियों की वैक्सीन इस्तेमाल कर रहे हैं।